शनिवार, 28 नवंबर 2015

ग्रामीण खेती मजदूरो की दशा।


कृषी प्रधान देश भारत मे किसान को ही अन्नदाता माना जाता है । एवं श्रम का सारा श्रेय किसान को ही दिया जाता है । जवकि आज वह जमाने नही रहे तव किसान खुद  अपने खेतो मे हल चलाते थे । कवि उन पर लिखते थे कि _ सूरज के उगने से पहले खाट छोड  उठ गया किसान ' और चला खेत पर करने काम - - -  ।
आज तो कृषी कार्य मशीन यंत्रों से होता है । बाकी का सारा कृषी काम मजदूर करते है । किसान तो जमीन का मालिक होता है और प्रबंधन करता है । जबकि खेती मजदूर ठंड ' गरमी ' धूप ' बरसात  मे भी खेतो मे काम करते है । रात मे भी खेतो की रखवाली वा पानी सिचाई जेसे काम भी करते है । खेतो मे जहरीली दवाओं का छिडकाव  और धान की फसल मे सुगंध के कारण सॉपो के होने पर भी यह मजदूर  अपनी जान की परवाह किए बिना खेतो मे खतरा होने पर भी काम करते है । क्योकि इनहे अपना परिवार  चलाना होता है । पर  इन पर किसी की नजर नही जाती  न कवि  न पत्रकार न सरकार  कोई इनहे नही देखते ' सिवाय  एक चमगीदण के जो इनके अंधेरे झोपडो मे भी देख लेता है ।

मध्य भारत के गॉवो मे रहने वाले भूमी हीन लोगो के पास  आय का साधन न होने के कारण यह लोग खेती मजदूरी पर ही   निर्भर रहते है । पर हर बडा जानवर छोट को खाता है ' इस नियम के तहत किसान  इन मजदूरो का शोषण करके अपना धर्म निभाते है । बर्तमान समय मे गॉवो मे कृषी कामगारो से दिन मे 10 घंटे काम लिया जाता है । और  एक दिन की मजदूरी का रेट 150 रू से200 तक देय है । भुगतान  अनाज बिकने पर किया जाता है '  एवं जव  अनाज का अच्छा भाव होता है तब  अनाज बैचा जाता है । और फिर मजदूरो का भुगतान होता है ।
एसी स्थति मे बेचारा  कृषी मजदूर कैसे जीता होगा । सरकार के पास  इसका जवाव है ' नरेगा '  पर नरेगा मॉ  टी वी और कगजो मे ही दिखती है । नरेगा का सारा काम मशीनो से होता है । बैक से पैसा किराए के मजदूरो दुवारा निकलवा लिया जाता है ।
अब ग्रामीण मजदूर के पास  एक ही रास्ता होता है की वह शहर मे जाकर काम करे ' पर इनमे से कुछ लोग  अपनी जन्म भूमी नही छोडना चाहते । अब  इनके पास  आखरी बिकल्प होता है कि यह मजदूर बैक से रिण लेकर  अपना स्वरोजगार करे । पर  इस  अस्त्र का प्रयोग  इनके बापो ने पहले ही कर लिया ' और  अभी चुकाया नही गया ' इस कारण बैक रिण नही देता । कृषि कामगारों के लिए विशेष  कर  सरकार की भी कोई एसी योजना नही है जिसके चलते इन कामगारो का विकाश हो सके ' अरे हॉ याद  आया  एक योजना है सरकार की  २ रू किलो अनाज मिलने बाली योजना ' जिसके सहारे यह लोग जीवित रह सकते है । क्योकि अगर यह लोग नही रहेगे तो कृषि काम के अलावा भवन पुल बॉध बनाने का काम कोन करेग ।  फिर तो ईट मिट्टी गारे का काम भी इंजीनियर  को ही करना पडेगा । पर  एसी नोवत नही आएगी क्योकि  इन मजदूरो के बच्चे है ना जो  भविश्य मे मजदूरी करने के लिए तैयार हो रहै है ' सरकारी स्कूलो मे पढ कर  ' गॉव के सरकारी स्कूलो मे मजदूरो के ही बच्चे जादा पढते है । वहॉ इन बच्चो को ज्ञान के नाम पर मध्यान भोजन के रूप मे अल्प  अहार ही मिलता है ।
इन गॉव के गरीब लोगो के बारे  मे जानकारी मिलती है कि  इनमे से अधिकाश  के बाप दादा परदादा भी हलवाहे या खेतीहल मजदूर का ही काम करते थे । और  अब  इनके बच्चे भी आगे मजदूरी ही करेगे । इनकी किसमत मे मजदूरी करना ही लिखा है । यह  इनका दुरभाग्य है ।
चमगीदण की नजर मे इनका आर्थिक विकास असंभव ही नही नामुमकिन है ।

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शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

सन कंट्रोल फिल्म 'कम लागत का व्यवसाय ।

सन कंट्रोल फिल्म _ यह कॉच पर चिपकाने वाली एक पोलेथिन होती है ।जो पोलिएस्टर फिल्म के नाम से भी जानी जाती है ।जिसका उपयोग शीशे पर  इंसुलेशन करने के लिए किया जाता है । इस पोलेथिन को कॉच पर चिपकाने से सूरज की धूप से बचाव  के अलावा और भी फाएदे होते है ।जैसे शीशा रंगीन दिखना ' एवं फिल्म लगे कॉच से गाडी के अंदर से बाहर तो देखा जा सकता है पर बाहर से भीतर नही देखा जा सकता है ' फिल्म बाले कॉच का टूटने का चान्स भी कम रहता है ।टी . वी. लेपटॉप 'कंप्यूटर  आदि की स्क्रीनो पर फिल्म चढाने से अॉखे खराब होने से बचती है । इस फिल्म का सबसे अधिक  उपयोग बस 'ट्रक' जीप 'कार  आदि मोटर बहनो की बिन्डो स्क्रीनो पर किया जाता है ।शीशे पर यह फिल्म लगाने के बाद यह 3से5साल तक चलती है ।

सन कंट्रोल फिल्म लगाने का काम वेरोजगार युवाऔ के लिए रोजगार का एक  अच्छा बिकल्प हो सकता है । इसे बिलकुल कम लागत मेहनत से शुरू किया जा सकता है । इस काम के लिए विशेष स्थान की भी आवश्यकता नही पडती युवा चाहे तो वह ग्राहको के पास जाकर भी यह काम कर सकता है ।और चाहे तो पार्ट टाइम या फुल टाइम भी कर सकता है । किसी दूशरे काम के साथ भी इस काम को किया जा सकता है जैसे पेंटिंग 'आदि ।
शहरो के अलावा स्टेट हाइवे या नेशनल हाइवे रोडो के किनारे पर  इस सेवा इकाई को स्थापित करना अधिक फायदेमंद हो सकता है । क्योकि मोटर गडियो के शीशो पर फिल्म लगाने का काम एसे स्थानो पर  अधिक मिल सकता है ।जिससे अच्छा लाभ कमाया जा साकता है।
पोलिएस्टर पोलेथिन खरीदने के लिए शहरो के बाजारो मे पोलेथिन की थोक दुकानो पर संपकृ किया जा सकता है । जहॉ यह फिल्म बहुत ही सस्ते रेट पर मिलती है लगभग 10 रू वर्गफिट के हिसाव से मिलती है ।

इस फिल्म को कॉच पर लगाने का काम दो तीन दिन की ट्रेनिंग से सीख सकता है ।अपने घर पर कॉच पर फिल्म लगाने का अभ्यास करने से ' जिसमे कुछ फिल्म तो बेकार जाएगा । पर फटाफट काम करने का तरीका मिल जाएगा । जिससे गाडीऔ बाले ग्राहको को काम कराने के लिए देर तक  इंतजार नही करना पडता ।
यह काम करने का बिलकुल सरल तरीका है । सबसे पहले स्प्रे से कॉच को धोया जाता है इसके बाद साफ कपडे से पोछा जाता है ' कॉच सूखने के बाद  इसके आकार की फिल्म काटकर साबधानी से कॉच पर चढा दी जाती । बस  इतनी सी कारीगरी है इस काम मे और  इसी के पैसे देता है ग्राहक ।
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रविवार, 22 नवंबर 2015

हर समस्या से लाभ उठाने का राज़ ।

थिंक एन्ड ग्रो रिच ' किताब के लेखक नेपोलियन हिल के अनुशार _ हर  समस्या अपने साथ  अपने बराबर या अपने से भी बडा अवशर साथ लाती है ।
लेखक की यह खोज मनुष्य के लिए एक बरदान है । यह  एक  एसी राज़ की बात है जिसका लाभ  उठाकर व्यक्ती सफल हो सकता है । व्यक्ति परेशानी के साथ  आने वाले अवसर को पहचानने की कलॉ  सीखकर  अपने ऊपर  आने बाली हर समस्या से लाभ  उठा सकता है । यह जादा कठिन नही है ' समस्या आने पर थोडी सी सूझ बूझ की जरूरत है ' बस । पहले  एक दो बार कठनाई पडती है ' इसके बाद तो चाबी हाथ लग जाती है । और फिर व्यक्ति परेशानी आने पर घबराता नही है । अपितु खुस होता है क्योकि वह परेशानी को नही बल्कि अवसर को देखता है और  उसका लाभ लेता है ।

हर समस्या मे छिपे हुए चॉन्स को खोजने के लिए ' हमे समस्या को बिपरीत  और साकार  आत्मक नजर से देखना होता है । तभी हम  अवसर को जान पाते है वा उसका लाभ  उठा पाते है । एवं  राह मे आने वाली कठिनाईऔ के रोडो को सीडी बनाकर जीवन मे आगे बढ पाते है ।

उदाहरण _ व्यक्ति का बीमार होना उसके लिए एक समस्या है । पर बीमारी के दोरान मिलने वाला ' फुरसत का समय  उसके  लिए एक  अवसर भी है । जिसका लाभ लेने के लिए व्यक्ति  इस समय मे एसे काम कर सकता है ' जिनहे भाग दोड भरे समय मे नही किया जा सकता है ।
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शनिवार, 21 नवंबर 2015

कपडा बेचने की एक सफल स्कीम ।

पिछले दिनो मुझे एक कपडा व्यपारी के बारे मे पता चला है ।  वह  एक स्कीम से कपडे बेचता है और भारी मुनाफा कमाता है ।
उस वयपारी की योजना कुछ  इस प्रकार है _ व्यपारी किसी कंपनी से घटिया किस्म के कपडे थोक मे सस्ते रेट पर खरीद कर लाता है ' जिनमे पेंट सर्ट' सडी ब्लाऊज ' और कुर्ती  सलवार के कपडे होते है ।इन कपडो को वह  अपने यहॉ लाकर  इनके फीस कटवाकर  तीन पृकार की आकृषक पेकिंग मे आलग  अलग मेच के अनुसार सेट तैयार करवाता है । एक सेट पेंट सर्ट के कपडो का दुशरा साडी व्लाउज का और तीसरे सेट मे कुर्ती सलवार के कपडे पेक होते है । यही कपडे परिधानो  मे सबसे अधिक पहने जाते है ।इसके बाद व्यापारी इन कपडो के पेकिंग सेटो के साथ  इनामी कूपन लगवाता है ' जो स्क्रेच करने बाला होता है जिसके उपर मोबाइल  आदि ईनाम छपे होते है । पर हर कूपन मे कपडो का ही एक सेट निकलता है । साडी के सेट के कुपन मे पेंट सर्ट और पेंट सर्ट  के सेट मे साडी व्लाउज य सलवार सूट का सेट निकलता है । यह व्यपारी अपनी बेन मे माल लेकर  अपने आठ दस सेल्स मेनो के साथ कपडे बेचने के लिए मुहल्लो ' कस्वो और गॉवो मे जाता है ।  वहॉ पर  इसके सेल्स मेन  अपने कंधो पर कपडो के सेटो से भरे बेग टाग कर  अलग  अलग गलियो मे जाकर  आवाजे लगाकर कपडे बेचते है ।और हर सेट मे इनाम निकलने की गेरंटी देते है । इनाम के लालच मे आकर वह स्त्रियॉ और पुरूस भी इनके कपडे खरीद लेते है जिनहे कपडो की जरुरत नही थी । और प्राय: 600 रू तो हर  आदमी की   जेव मे पडे ही रहते है {' जितनी इन कपडो की कीमत है }  इन पैसो को यह सेल्स मेन लोगो की जेव से स्कीम के तहत निकाल लेते हे । और जिन लोगो को एक जोड कपडो की भी जरूरत नही होती ' उनहे दो जोड कपडे बेच देते है । तो है न कमाल की स्कीम ।
इस तरह  इस व्यपारी का एक सेल्स मेन दिन मे 15 से 30 तक कपडे के सेट बेच लेता है । हर  एक सेट पर सेल्स मेनो को 50 रू का कमीशन मिलता है । जिससे यह लोग भी खूव कमा लेते है । अगर  एक सेट पर 50 रू कमीशन है तो व्यपारी को भी इतना ही प्राफिट  एक सेट पर जरूर मिलता होगा । इस हिसाव से दस लोग  एक दिन मे लगभग 200 सेट बेचते है जिन पर व्यपारी को 10000 रू का शुध लाभ होता है । और  इस चलती फिरती कपडे की दुकान मे तेजी से माल बिकने के कारण मुदृा भी स्थर नही होती ' एवं उधार  माल का पेमेंट भी जलदी चुकता हो जाता है । इस काम मे जादा झंझट भी नही है । न दुकान का किराया ना बिजली का बिल और न नोकर की सेलरी आदि कोई खर्च नही होत  इस तरह के काम मे । उपर से मुनाफा भी अधिक मिलता है ।
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शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

Money पाने का रहस्य जानिए ।


      कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है ।

लोग पाना तो चाहते ' पर कुछ खोना नही चाहते । इस  उलटे नियम से कुछ पाना असंभव है ।
हर चीज को पाने के बदले मे कुछ न कुछ कीमत तो जरूर ही देना पडता है । जो मेहनत ' समय ' वस्तु आदि कुछ भी हो सकती है ।किसी भी व्यक्ति से कुछ पाने से पहले उसे कुछ देना पडता है । चाहे हम  अपनी बातो से उसे भरोष दे ' लोभ लालच दे ' या अपना समय दे  कुछ भी दे पर देना जरूर होगा । जब हमारे दुवारा दी जाने वाली चीज को सामने वाला व्यक्ति स्वीकार कर लेता है । तव हमारे लिए कुछ  आदान करने का मार्ग खुलता है । और तब हम पाने के अधिकारी होते है । अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम समने वाले से कुछ  आदान करे या न करे ।और हमारी छमता पर यह निर्भर करता है कि हम प्रदान से कम  आदान ले या प्रदान के बराबर  आदान ले या प्रदान से अधिक का आदान करें ।
इस  आदान प्रदान के विनियम मे हमे धन  अथवा कोई भी इछित वस्तु का आदान करने से पहले कुछ प्रदान करना जरूरी होता है ।
उदाहरण:  दुआपुर युग मे सुदामा नामक वृहाम्ण जव दुवारका के राजा कृष्ण के पास धन मागने गया था । तव सुदामा अपने साथ  एक चावल की पोटली कृष्ण को प्रदान करने के लिए ले गया था ।जिस भेट को कृष्ण ने स्वीकार किया था ।और बदले मे सुदामा को बहुत सारा धन दिया था ।

दुशरा उदाहरण: मे एक  एसे सज्जन को जानता हू । जिनका यह  उसूल है कि जब  उनहे किसी भी आदमी से कोई काम लेना होता है ' तब वे उस  आदमी को आदर से अपने घर पर बुलाकर  बेठाते है और स्वागत मे उसके सामने मिठाई की थाली पेस करते है ।एवं मिठाई खिलाने के बाद वे उससे कम की बात करते है । जिसमे वे सफल रहते है । उनके इस स्वागत को लगभग 70%  लोग स्वीकार कर लेते है ' और फिर मिठाई के दबाव मे आकर  इनका काम करने से इनकार नही कर पाते और काम कर देते है ।
कुछ लोग जो इन सज्जन से भी जादा चतुर होते है वे लोग 'डाविटीज' का बहाना बना कर मिठाई खाने से इनकार कर देते है ।और वह इनके दबाब मे नही आते एवं स्वतंत्र रहते है 'वे चाहे तो इनका काम करे या न करे ।

इस दुनियॉ मे प्रदान से बिना मागे मोती मिलते है । प्रदान के बिना मागने पर भीख भी नही मिलती है ।
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सोमवार, 16 नवंबर 2015

दुनियॉ के सबसे धनी देश और गॉव ।

इस वर्ष के अॉकडो के अनुशार विश्व मे सबसे अमीर देश 'कतर' को माना जा रहा है ।
कतर राज्य _अरब प्रायद्वीप के उत्तर पूर्वी तट पर स्थित  एक छोटा दीप है ।इसके दक्षिण मे साऊदी अरब  एवं तीन तरफ  फारस की खाडी है । इस देश मे प्रति व्यक्ति आय  एक लाख डालर के लगभग है । जो अन्य देशो के मुकावले मे सबसे अधिक है । इसलिए आज कतर को दुनियॉ का सबसे अमीर देश माना जा रहा है ।  इस देश के धनी होने का कारण यहॉ तेल  और गैस के भडारो का होना है । कतर ' संसार के सबसे बडे तेल निर्यातक देशो मे दूशरे नं का तेल निर्यातक है । इस देश की राजधानी 'दोहा ' है । देश की भाषा अरबी एवं धर्म स्लाम है । इस देश मे राजशाही सरकार है । कतर' का मोषम ठंडा है । कतर ' का क्षेत्रफल 11437 वर्ग  किलो मीटर  एवं  जनसंख्या  18 लाख के लगभग है । प्रथम  विश्व युद्ध के बाद कतर 'ब्रटेन के आधीन हो गया था । जो सन १९७२ मे आजाद हुआ । अब कतर विकाश मे संसार मे सबसे आगे है ।

दुनियॉ का सबसे अमीर गॉव _ विश्व का सबसे धनी गॉव चीन मे है ।जहॉ प्राति व्यक्ति सालाना आय 80 लाख रूपये के आसपास है । यह गॉव  आर्थिक विकाश मे दुनियॉ मे शहरो से भी आगे है ।

भारत मे दो गॉव  एसे है ।जो देश मे सबसे धनी माने जा रहे । पहला हिमाचल प्रदेश का 'कोटगढ' गॉव है । और दूशरा गुजरात का 'धर्मज ' गॉव है । ए दोनो गॉव पूरे देश मे सबसे अमीर माने जा रहे है ।
कोटगढ_ यह गॉव हिमाचल प्रदेश मे है । इस गॉव के हर  आदमी की सलाना आय ' देश की ओसत  आय से पॉच गुना अधिक है । जिसका राज़ यह है कि यहॉ विदेशी नश्ल के सेव के बाग है । जिनहे 70 साल पहले एक  अमरीकि पादरी ने लगवाए थे । इस गॉव के लोगो की आय का साधन सेवो का व्यपार है ।

धर्मज गॉव _ इस  समय गुजरात के आनंद जिले के इस देहात को देश का सबसे धनी गॉव कहा जा रहा है । इस गॉव की आबादी 11000 के लगभग है । इस गॉव मे 14 बैके है । जिनमे 1000 करोड रूपये जमा होने की खबरे मिल रही है । इसका कारण इस गॉव के हजारो लोग विदेशो मे काम धंदा करते है ' यहॉ के N.R.I. दुनियॉ के देशो से धन कमाकर गॉव की बैको मे जमा करते है । इस गॉव के 65 परिवार  अॉस्टेलिया मे रहते है एवं 200 कनाडा मे व 300 परिवार के करीव  अमेरिका मे है ।और कुछ लोग  अन्य देशो मे भी है ।
धर्मज गॉव के घरो के सामने महगी कारे खडी नजर  आने से यह  अंदाजा लगता है कि यहॉ के लोग 'एस' की जिंदगी जीते है ।
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शनिवार, 14 नवंबर 2015

फ्री सबजी पाए महिलाए' वारह महिने ।

घरेलू महिलाओ को रोज शुबह शाम खाना बनाने से पहले ' सबजी बनाने का सवाल परेशान करता है कि आखिर सबजी क्या बनाए । और रोजाना सबजी खरीदने पर रूपये भी खर्च करना पडता है । हर घर मे रोज ही सबजी भाजी पर रूपये खर्च किए जाते है ।
अगर हमे हर दिन घर बैठे मुफ्त मे सबजी मिलने लगे  तो इससे अच्छी बात  और क्या होगी । इससे सबजी पर व्याय होने वाला पूरा पैसा बचेगा । पर क्या एसा हो सकता है । जी हॉ  बिलकुल हो सकता है ।  इस लेख मे हम  आपको एक  एसी सबजी की बेल के बारे मे जानकारी दे रहे है जो हमेशा फलती ही रहती है ।

भारत मे मध्य प्रदेश के गॉबो मे कही कही लोगो के स्नान घर के पास  एक बेल पाई जाती है ।जो हमेशा साल के बारह महिने  फलती है । इस सदाफलदार सबजी की बेल को लोग  'कदूरी 'के नाम से जानते है । शायद  इसका बनस्पती नाम कुछ  और हो । यह  अंगूर की बेल जैसी होती है । इसके फल भी अंगूर से कुछ ही बडे होते है । जिनहे कच्चे खाने पर ककडी खीरा जैसा स्वाद मिलता है । इन फलो का सलाद बहुत  अच्छा बनता है ' एवं इनकी सबजी भी स्वादिष्ट बनती है । कंदूरी के फलो को किसी भी सबजी के साथ मिक्स करके भी बनाया जा सकता है । कंदूरी के पके फल लाल रंग के होते है जो अन उपयोगी होते है ।

कंदूरी की बेल का रोपण किसी भी मोषम मे किया जा सकता है । इसकी कलम लगती है । जो दो तीन महिने बाद फलने लगती है ।और दो वर्ष तक हमेशा लगातार फलती रहती है । पर कंदूरी की बेल तराई बाली जगह होना चाहिए ।

अगर  इस कंदूरी की बेल को गमलो मे लगाकर मकान के पास किसी पैड पर चढा दिया जाए । य मकान की जलियो आदि पर फैला दिया जाए ' तो घर की सुन्दरता बढने के साथ ही घर की सबजी का खर्च मुफ्त मे चल सकता है । जिससे रूपये की बचत भी होगी ' और  कंदूरी के फलो की पेदावार  अधिक होने से  इनका बिकृय भी किया जा सकता है । महिलाए बचत करने के साथ ही कंदूरी के फलो से कुछ रूपये भी कमा सकती है । इसमे लागत कुछ भी नही है ' और ना ही मेहनत है । नहाने  धोने के पानी से यह बेल सदा हरी भरी रहती है । इसमे कोई रोग भी नही लगता है

यह जानकारी आपको कैसी लगी कृप्या कमेंट करे ।Seetamni@gmail. com पर 
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गुरुवार, 12 नवंबर 2015

जमीन मे सोने की खोज ।

एक जमाना था जब भारत को 'सोने की चिडियॉ ' कहा जाता था ।अठारहबी सदी तक भारत मे बहूत सोना चॉदी था । इस बात की पुष्टी टी. बी.मैकॉले की सर्बे रिपोर्ट से भी होती है ' मैकॉले ने 2 जनवरी 1835  को ब्रटिस संसद मे भारत के बारे मे अपनी रिपोट मे स्यम कहा था _ मै पूरब से पश्चिम तक पूरे भारत मे घूमा पर मुझे भारत मे एक भी भिखारी या चोर  और गरीब  आदमी नही मिला ' एवं मैकॉले ने अपने भाषण मे भारतियो के पास बहुत सोना चॉदी होने के बाबत भी जिकृ किया है ।
पुराने जमानो मे भारत के अलावा और भी देशो के पास  अटुट सोना था ।उस समय मुद्वा के रूप मे सोना या सोने के सिक्को का ही चलन था ।उस जमाने के राज महाराजा और सेठ साहूकार वा मठ मंदिरो के अधिकारी आदि अमीर लोग  अपना धन सोना चॉदी जमीन मे ही गाड कर रखते थे । एसी प्रथा थी । जिनमे से कुछ लोग वह स्थान भुल जाते थे । और कुछ धन गडा होने की बात किसी को बताए बिना ही दुनियॉ से चले जाते थे । और  उनका सोना चॉदी हमेशा के लिए जमीन मे ही रह जता था । पुराने समय के खजाने भी जमीन मे ही होते थे जो भवन ढह जाने या किनही अनय कारणो से गुम जाते थे । वे जमीन मे ही है । आज भी ।
पुराने समय मे एक प्रथा और थी दुनियॉ मे जिसके कारण  आज सोना जमीन मे मिलता है । वह प्रथा कुछ  एसी थी ' जिसके बारे मे बिश्व प्रशिध  उपनयास 'केलियोपेट्रा ' मे बिस्तार से वर्णन है । उस समय दुनियॉ के स्लामी देशो मे यह चलन था कि व्यक्ति की मृत्यू होने पर  उस व्यक्ति के उपयोग का सोने चॉदी का सामान जैसे -गहने 'र्वतन सुराही आदि ।लास के साथ ही ताबूत मे रखकर  उसे जमीन मे दफन कर देते थे । रहीसो के साथ  एसा ही किया जाता था । इसलिए ही आज गडे धन को 'दफीना ' भी कहा जाता है ।
पुरानी मानव सभ्यताए हमेशा पानी के पास नदियो के किनारो पर ही वसती थी ।इसकी जानकारी नदियो के किनारे पुराने अवशेस जैसे मिटटी के र्बतनो के तुकडो आदि से मिलती है । जिन स्थानो पर पुराने नगर बसे थे । उन स्थानो पर  आज भी जमीन मे कुछ ना कुछ मात्रा मे तो सोना जरूर ही होना चाहिए ।
जमीन के अंदर सोना होने के संकेत हमे कूछ पेड पौधो से भी मिलते है ।जैसे यूकेलिप्टस पेड की पत्तियो पर सोने के कण होने के बारे मे बैज्ञानिको ने पता लगाया है । जनरल नेचर कम्यूनिकेशनस ' मे छपी एक सोध के मुताबिक बैज्ञानिको ने यह पता लगाया है कि कुछ पेड पौधो मे सोने के कण पाए जाने से यह ज्ञात होता है की उनकी जडो मे जमीन मे सोना हो सकता है अॉसटेलिया के सोध कर्ताओ के आनुशार यूकेलिप्टस की पत्तायो पर सोने के कण टिम टिमाने से पता चलता है कि जमीन मे कई मीटर नीचे  सोने का भंडार है ।
इसी तरह की एक घटना के बारे मे मैने भी सुना है जो सच होना चाहिए मैने सुना है एक बार कलकत्ता के मशहूर जदूगर पी.  सी . सोरकर ने कददू के तुकडो पर सोने के कण पहचान लिए थे । और  उनहोने उस कददू की बेल को भी ढूढ लिया था । उसकी जडो मे उनहे कुछ सोना भी मिला था ।
मेटल डिटेक्टर मशीन _ धातू सूचक यंत्र का उपयोग भी जमीन के अंदर  उपस्थित धातुओ का पता लगाने के लिए किया जाता है ।जिस जगह पर धरती मे सोना चॉदी लोहा आदि धातुए होती है ।एसी जगह मेटल डिटेक्टर जमीन पर टच करने पर  वह हमे धातू होने का संकेत देता है । पर जमीन मे धातुओ का पता बताने वाला यह यंत्र यह नही बताता की जमीन मे कोन सी धातू है 'ओर कितनी मात्रा मे है वा कितने गहरे पर है ।सिर्फ धातू होने का संकेत देता है ।

नोट _ हर चमकने वाली चीज सोना नही होती ।Seetamni@gmail. com
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शनिवार, 7 नवंबर 2015

कर्ज मे डूबने से कैसे बचे ।

कर्ज 'दोस्त यार व रिस्तेदार या साहूकार या बैक का कर्ज चाहे किसी का भी हो ' कर्ज  कर्ज ही होता है । इस भूत से प्राया सभी डरते है । किसी से भी पूछो वह यही कहता है कि भाई कर्ज बहुत बुरा होता है । यह  इज्जत ' सुख चेन नीद सभी कुछ छीन लेता है ।और कर्ज की चिंता चिता के समान होती है । रिण मे डूबे लोगो का आर्थिक पतन हो जाता है । कुछ लोग तो करजा से छुटकारा पाने के लिए अपनी जान तक दे देते है । कुल मिलाकर कर्ज काल का रूप होता है ।
आखिर एसा कैसे होता है कि व्यक्ति कर्ज के मकडजाल मे फस कर  अपने जीवन को नर्क बना लेता है । इसकी शुरूवात कुछ  इस तरह होती है _व्यक्ति अपनी आय से अधिक धन  उधार लेकर खर्च कर देता है ।और चुकाने का समय  आने पर रिण चुकाने मे असमर्थ हो जाता है ।और फिर रिण चुकता करने मे टाल मटोल करता रहता है ' एवं रिण का रूपया मागने बालो से छिपता व दूर भागता रहता है ।यह सोचकर कि कुछ समय वाद यह लोग  उसका पीछा छोड देगे । और  उसे रिण नही देना पडेगा ।इस तरह रिण का ब्याज दिन प्रति बढता रहता है । और  अंत मे व्यक्ति को अपना घर 'मकान ' जमीन  आदि  बेचकर कर्ज का रूपया चुकाना ही पडता है । इस तरह व्यक्ति का पतन होता है
कर्ज मे डुबने से बचने के लिए व्यक्ति को निम्न साबधानियॉ रखनी चाहिए ।जैसे _
[1] सबसे पहले तो हर हाल मे व्यक्ति को रिण लेना ही नही चाहिए ।जहॉ तक संभव हो रूपये 'बस्तुए 'सेवाए उधार लेने से परहेज रखना चाहिए ।
[2]  जिस काम मे धन का लाभ हो एसे काम के लिए ही रिण लेना चाहिए । वह भी बगेर ब्याज के याबहुत कम ब्याज पर ' किस्त मे चुकाने के बादे के साथ ।
[3]  व्यक्ति को अपनी आय छमता से अधिक धन कर्ज  मे नही लेना चाहिए । यानि जितनी चादर हो उतने ही पैर लंबे करना चाहिए ।
[4] अनुचित रिण जैसे _अधिक ब्याज बाला रिण ' दुगना रिण ' काम  की बस्तू अमानत मे रखने के बदले रिण ' एक मुस्त चुकता करने बाला रिण  आदि  नही लेना चाहिए ।
[5]  एक रिण चुकता होने से पहले दूशरा रिण कभी नही लेना चाहिए ।

[6]  रिण देने की भावना हमेशा रखना चाहिए ।और नियम से हर महिने किस्त जमा करते रहना चाहिए । इस तरह रिण  आसानी से चुक जाता है ।

[7]  रिण होने पर व्यक्ति को जल्दी से जल्ली उसे चुकता करने का काम करना चाहिए

[8] कर्ज हजम करने का विचार नही करना चहिए । एसा करने पर बाद मे दुगना चोगना देना पडता है ।

[9] गलत लोगो जैसे गुनडे बदमाशो से कभी भी कर्ज नही लेना चाहिए ।इनका तो धंधा ही होता है लोगो को कर्ज मे फसाना ।
[10]  रिण लेते समय  आदमी को अपने उपर भरोशा हो कि वह  चुका सकता है । तभी लेना उचित है । एसा नही कि बाद का बाद मे सोचेगे । बाद मे सोचने बाले लोग ही कर्ज  मे डुबते है ।

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शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

बिजली का विकल्प सोलर पेनल ।

आज के इस  आधुनिक मशीन यंत्रो के युग मे आदमी का जीवन बहुत सुखमय है । पुराने समय की अपेछा आज  आदमी की श्रम शक्ती का बहुत कम  उपयोग होता है । सभी मेहनत के काम कृतिम  ऊर्जा से होते है ।जिसमे बिदयुत शक्ती का पहला स्थान है ।अगर 10 मिनिट के लिए भी बिजली चली जाती है  तो मानो व्यक्ति की जीवनचार्या रूक जाती है । यह भारत के शहरी क्षेत्रो की बात है ।पर ग्रामीण  इलाको मे तो महिनो बिजली का पता नही रहता एसी स्थती मे गामीण जनो के काम काज कैसे चलते होगे । और जब कभी बिजली रहती भी है तो बोल्टेज  अधिक होने से लोगो के बिदयुत यंत्र खराब हो जाते है ।और महिने मे लोगो को बिजली के बिल का भुगतान भी करना पडता है ।
सुर्य  ऊर्जा_सोलर पेनल का उपयोग व्यक्ति को बिजली की सारी झंझटो से मुक्ति दिलाता है । साथ ही बिजली के बिल से भी छुटकारा मिलता है । आज मोबाइल चार्ज करने से लेकर खेतो मे पंप चलाने के लिए भी सोलर पेनल  उपलब्ध है । 5_10 वाट के सोलर सेल से लेकर हजारो वाट के सोलर पेनल बाजार मे लिल रहे है । जो किफाइती होने के साथ ही क्इ साल तक के लिए टिकाऊ भी होते .है । कंपनियां 20_30 साल की गेरटी वारटी के साथ यह पेनल बेचती है ।और यह बास्तविक है कि अगर  इन सोलर पेनलो का सही रखरखाव व सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह 25_30 साल  आराम से चलते है । एक मध्यम घर परिवार के लिए 200 वाट का सोलर पेनल पर्याप्त होता है । जिसकी कीमत बाजार मे 7_8 हजार रू के लगभग होती है ।
सोलर पेनल का उपयोग खरना भी बडा आसान होता है ' इसमे करंट लगने का भी कोइ खतरा नही होता और  ना वोल्टेज बढने घटने से यंत्रो के खराव होने का डर रहता है । वल्कि सोलर पेनल से टीवी चलाने पर 'टीवी की पिक्चर क्वाल्टी भी साफ दिखती है । पर यह सोलर पेनल सुरज की धूप से करंट बनाते है  'जो बादल होने पर या बारिश होने पर  और रात मे काम नही करते ' इसलिए इसके साथ चार्जिगं बेटरी रखना जरुरी होता है । और यह सोलर पेनल धूप से a/c करंट बनाते है जिसे  d/c मे बदलने के लिए अल्टीनेटर यंत्र भी रखना पडता है । पर  एक बार सोलर सिस्टम सेट होने के बाद फिर सालो तक  इसके उपयोग मे कोई परेशानी नही आती है ।एवं घर की छत पर सोलर पलेट लगा होने से घर की शान भी बढती है ।

मित्रों मे किसी सोलर पेनल कंपनी का प्रचार नही कर रहा हू ।अपितु लोगो को सूरज की ऊर्जा का उपयोग करने का एक सरल  और सस्ता रास्ता सुझा रहा हू ।जिसे मे खुद भी अपना रहा हू ।और जिससे संतुष्ट भी हू ।सोलर पेनल के उपयोग से धन की बचत तो होती ही है ।काम मे भी रूकाबट नही आती है । पहले मे भी बिजली को लेकर बहुत परेशान रहता था । पर जबसे मैने सोलर पलेट का स्तमाल किया है । तबसे आब शुकुन मे हू । मेने अपने घर का बिजली का कनेक्शन भी कटवा दिया है । आज मेरे घर मे बिजली से होने वाले सभी काम सोलर पावर से हो रहे है ।


रबर बलून विजनस 500₹ से शुरू ।

गु व्वा रे 🎈💃 रबर बलून से तो सभी परिचित है जिनहे फुग्गा और गुब्बारा भी कहा जाता है । हम सभी ने अपने बचपन मे जरूर गुब्बारे खेले होगे ।गुब...