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November, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ग्रामीण खेती मजदूरो की दशा।

कृषी प्रधान देश भारत मे किसान को ही अन्नदाता माना जाता है । एवं श्रम का सारा श्रेय किसान को ही दिया जाता है । जवकि आज वह जमाने नही रहे तव किसान खुद  अपने खेतो मे हल चलाते थे । कवि उन पर लिखते थे कि _ सूरज के उगने से पहले खाट छोड  उठ गया किसान ' और चला खेत पर करने काम - - -  ।
आज तो कृषी कार्य मशीन यंत्रों से होता है । बाकी का सारा कृषी काम मजदूर करते है । किसान तो जमीन का मालिक होता है और प्रबंधन करता है । जबकि खेती मजदूर ठंड ' गरमी ' धूप ' बरसात  मे भी खेतो मे काम करते है । रात मे भी खेतो की रखवाली वा पानी सिचाई जेसे काम भी करते है । खेतो मे जहरीली दवाओं का छिडकाव  और धान की फसल मे सुगंध के कारण सॉपो के होने पर भी यह मजदूर  अपनी जान की परवाह किए बिना खेतो मे खतरा होने पर भी काम करते है । क्योकि इनहे अपना परिवार  चलाना होता है । पर  इन पर किसी की नजर नही जाती  न कवि  न पत्रकार न सरकार  कोई इनहे नही देखते ' सिवाय  एक चमगीदण के जो इनके अंधेरे झोपडो मे भी देख लेता है ।

मध्य भारत के गॉवो मे रहने वाले भूमी हीन लोगो के पास  आय का साधन न होने के कारण यह लोग खेती मजदूरी प…

सन कंट्रोल फिल्म 'कम लागत का व्यवसाय ।

सन कंट्रोल फिल्म _ यह कॉच पर चिपकाने वाली एक पोलेथिन होती है ।जो पोलिएस्टर फिल्म के नाम से भी जानी जाती है ।जिसका उपयोग शीशे पर  इंसुलेशन करने के लिए किया जाता है । इस पोलेथिन को कॉच पर चिपकाने से सूरज की धूप से बचाव  के अलावा और भी फाएदे होते है ।जैसे शीशा रंगीन दिखना ' एवं फिल्म लगे कॉच से गाडी के अंदर से बाहर तो देखा जा सकता है पर बाहर से भीतर नही देखा जा सकता है ' फिल्म बाले कॉच का टूटने का चान्स भी कम रहता है ।टी . वी. लेपटॉप 'कंप्यूटर  आदि की स्क्रीनो पर फिल्म चढाने से अॉखे खराब होने से बचती है । इस फिल्म का सबसे अधिक  उपयोग बस 'ट्रक' जीप 'कार  आदि मोटर बहनो की बिन्डो स्क्रीनो पर किया जाता है ।शीशे पर यह फिल्म लगाने के बाद यह 3से5साल तक चलती है ।

सन कंट्रोल फिल्म लगाने का काम वेरोजगार युवाऔ के लिए रोजगार का एक  अच्छा बिकल्प हो सकता है । इसे बिलकुल कम लागत मेहनत से शुरू किया जा सकता है । इस काम के लिए विशेष स्थान की भी आवश्यकता नही पडती युवा चाहे तो वह ग्राहको के पास जाकर भी यह काम कर सकता है ।और चाहे तो पार्ट टाइम या फुल टाइम भी कर सकता है । किसी दूशरे क…

हर समस्या से लाभ उठाने का राज़ ।

थिंक एन्ड ग्रो रिच ' किताब के लेखक नेपोलियन हिल के अनुशार _ हर  समस्या अपने साथ  अपने बराबर या अपने से भी बडा अवशर साथ लाती है ।
लेखक की यह खोज मनुष्य के लिए एक बरदान है । यह  एक  एसी राज़ की बात है जिसका लाभ  उठाकर व्यक्ती सफल हो सकता है । व्यक्ति परेशानी के साथ  आने वाले अवसर को पहचानने की कलॉ  सीखकर  अपने ऊपर  आने बाली हर समस्या से लाभ  उठा सकता है । यह जादा कठिन नही है ' समस्या आने पर थोडी सी सूझ बूझ की जरूरत है ' बस । पहले  एक दो बार कठनाई पडती है ' इसके बाद तो चाबी हाथ लग जाती है । और फिर व्यक्ति परेशानी आने पर घबराता नही है । अपितु खुस होता है क्योकि वह परेशानी को नही बल्कि अवसर को देखता है और  उसका लाभ लेता है ।

हर समस्या मे छिपे हुए चॉन्स को खोजने के लिए ' हमे समस्या को बिपरीत  और साकार  आत्मक नजर से देखना होता है । तभी हम  अवसर को जान पाते है वा उसका लाभ  उठा पाते है । एवं  राह मे आने वाली कठिनाईऔ के रोडो को सीडी बनाकर जीवन मे आगे बढ पाते है ।

उदाहरण _ व्यक्ति का बीमार होना उसके लिए एक समस्या है । पर बीमारी के दोरान मिलने वाला ' फुरसत का समय  उसके  ल…

कपडा बेचने की एक सफल स्कीम ।

पिछले दिनो मुझे एक कपडा व्यपारी के बारे मे पता चला है ।  वह  एक स्कीम से कपडे बेचता है और भारी मुनाफा कमाता है ।
उस वयपारी की योजना कुछ  इस प्रकार है _ व्यपारी किसी कंपनी से घटिया किस्म के कपडे थोक मे सस्ते रेट पर खरीद कर लाता है ' जिनमे पेंट सर्ट' सडी ब्लाऊज ' और कुर्ती  सलवार के कपडे होते है ।इन कपडो को वह  अपने यहॉ लाकर  इनके फीस कटवाकर  तीन पृकार की आकृषक पेकिंग मे आलग  अलग मेच के अनुसार सेट तैयार करवाता है । एक सेट पेंट सर्ट के कपडो का दुशरा साडी व्लाउज का और तीसरे सेट मे कुर्ती सलवार के कपडे पेक होते है । यही कपडे परिधानो  मे सबसे अधिक पहने जाते है ।इसके बाद व्यापारी इन कपडो के पेकिंग सेटो के साथ  इनामी कूपन लगवाता है ' जो स्क्रेच करने बाला होता है जिसके उपर मोबाइल  आदि ईनाम छपे होते है । पर हर कूपन मे कपडो का ही एक सेट निकलता है । साडी के सेट के कुपन मे पेंट सर्ट और पेंट सर्ट  के सेट मे साडी व्लाउज य सलवार सूट का सेट निकलता है । यह व्यपारी अपनी बेन मे माल लेकर  अपने आठ दस सेल्स मेनो के साथ कपडे बेचने के लिए मुहल्लो ' कस्वो और गॉवो मे जाता है ।  वहॉ पर  इसके…

Money पाने का रहस्य जानिए ।

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है ।

लोग पाना तो चाहते ' पर कुछ खोना नही चाहते । इस  उलटे नियम से कुछ पाना असंभव है ।
हर चीज को पाने के बदले मे कुछ न कुछ कीमत तो जरूर ही देना पडता है । जो मेहनत ' समय ' वस्तु आदि कुछ भी हो सकती है ।किसी भी व्यक्ति से कुछ पाने से पहले उसे कुछ देना पडता है । चाहे हम  अपनी बातो से उसे भरोष दे ' लोभ लालच दे ' या अपना समय दे  कुछ भी दे पर देना जरूर होगा । जब हमारे दुवारा दी जाने वाली चीज को सामने वाला व्यक्ति स्वीकार कर लेता है । तव हमारे लिए कुछ  आदान करने का मार्ग खुलता है । और तब हम पाने के अधिकारी होते है । अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम समने वाले से कुछ  आदान करे या न करे ।और हमारी छमता पर यह निर्भर करता है कि हम प्रदान से कम  आदान ले या प्रदान के बराबर  आदान ले या प्रदान से अधिक का आदान करें ।
इस  आदान प्रदान के विनियम मे हमे धन  अथवा कोई भी इछित वस्तु का आदान करने से पहले कुछ प्रदान करना जरूरी होता है ।
उदाहरण:  दुआपुर युग मे सुदामा नामक वृहाम्ण जव दुवारका के राजा कृष्ण के पास धन मागने गया था । तव सुदामा अपने साथ  एक चावल क…

दुनियॉ के सबसे धनी देश और गॉव ।

इस वर्ष के अॉकडो के अनुशार विश्व मे सबसे अमीर देश 'कतर' को माना जा रहा है ।
कतर राज्य _अरब प्रायद्वीप के उत्तर पूर्वी तट पर स्थित  एक छोटा दीप है ।इसके दक्षिण मे साऊदी अरब  एवं तीन तरफ  फारस की खाडी है । इस देश मे प्रति व्यक्ति आय  एक लाख डालर के लगभग है । जो अन्य देशो के मुकावले मे सबसे अधिक है । इसलिए आज कतर को दुनियॉ का सबसे अमीर देश माना जा रहा है ।  इस देश के धनी होने का कारण यहॉ तेल  और गैस के भडारो का होना है । कतर ' संसार के सबसे बडे तेल निर्यातक देशो मे दूशरे नं का तेल निर्यातक है । इस देश की राजधानी 'दोहा ' है । देश की भाषा अरबी एवं धर्म स्लाम है । इस देश मे राजशाही सरकार है । कतर' का मोषम ठंडा है । कतर ' का क्षेत्रफल 11437 वर्ग  किलो मीटर  एवं  जनसंख्या  18 लाख के लगभग है । प्रथम  विश्व युद्ध के बाद कतर 'ब्रटेन के आधीन हो गया था । जो सन १९७२ मे आजाद हुआ । अब कतर विकाश मे संसार मे सबसे आगे है ।

दुनियॉ का सबसे अमीर गॉव _ विश्व का सबसे धनी गॉव चीन मे है ।जहॉ प्राति व्यक्ति सालाना आय 80 लाख रूपये के आसपास है । यह गॉव  आर्थिक विकाश मे दुनियॉ मे श…

फ्री सबजी पाए महिलाए' वारह महिने ।

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घरेलू महिलाओ को रोज शुबह शाम खाना बनाने से पहले ' सबजी बनाने का सवाल परेशान करता है कि आखिर सबजी क्या बनाए । और रोजाना सबजी खरीदने पर रूपये भी खर्च करना पडता है । हर घर मे रोज ही सबजी भाजी पर रूपये खर्च किए जाते है ।
अगर हमे हर दिन घर बैठे मुफ्त मे सबजी मिलने लगे  तो इससे अच्छी बात  और क्या होगी । इससे सबजी पर व्याय होने वाला पूरा पैसा बचेगा । पर क्या एसा हो सकता है । जी हॉ  बिलकुल हो सकता है ।  इस लेख मे हम  आपको एक  एसी सबजी की बेल के बारे मे जानकारी दे रहे है जो हमेशा फलती ही रहती है ।

भारत मे मध्य प्रदेश के गॉबो मे कही कही लोगो के स्नान घर के पास  एक बेल पाई जाती है ।जो हमेशा साल के बारह महिने  फलती है । इस सदाफलदार सबजी की बेल को लोग  'कदूरी 'के नाम से जानते है । शायद  इसका बनस्पती नाम कुछ  और हो । यह  अंगूर की बेल जैसी होती है । इसके फल भी अंगूर से कुछ ही बडे होते है । जिनहे कच्चे खाने पर ककडी खीरा जैसा स्वाद मिलता है । इन फलो का सलाद बहुत  अच्छा बनता है ' एवं इनकी सबजी भी स्वादिष्ट बनती है । कंदूरी के फलो को किसी भी सबजी के साथ मिक्स करके भी बनाया जा सकता है । …

जमीन मे सोने की खोज ।

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एक जमाना था जब भारत को 'सोने की चिडियॉ ' कहा जाता था ।अठारहबी सदी तक भारत मे बहूत सोना चॉदी था । इस बात की पुष्टी टी. बी.मैकॉले की सर्बे रिपोर्ट से भी होती है ' मैकॉले ने 2 जनवरी 1835  को ब्रटिस संसद मे भारत के बारे मे अपनी रिपोट मे स्यम कहा था _ मै पूरब से पश्चिम तक पूरे भारत मे घूमा पर मुझे भारत मे एक भी भिखारी या चोर  और गरीब  आदमी नही मिला ' एवं मैकॉले ने अपने भाषण मे भारतियो के पास बहुत सोना चॉदी होने के बाबत भी जिकृ किया है ।
पुराने जमानो मे भारत के अलावा और भी देशो के पास  अटुट सोना था ।उस समय मुद्वा के रूप मे सोना या सोने के सिक्को का ही चलन था ।उस जमाने के राज महाराजा और सेठ साहूकार वा मठ मंदिरो के अधिकारी आदि अमीर लोग  अपना धन सोना चॉदी जमीन मे ही गाड कर रखते थे । एसी प्रथा थी । जिनमे से कुछ लोग वह स्थान भुल जाते थे । और कुछ धन गडा होने की बात किसी को बताए बिना ही दुनियॉ से चले जाते थे । और  उनका सोना चॉदी हमेशा के लिए जमीन मे ही रह जता था । पुराने समय के खजाने भी जमीन मे ही होते थे जो भवन ढह जाने या किनही अनय कारणो से गुम जाते थे । वे जमीन मे ही है । आज भी …

कर्ज मे डूबने से कैसे बचे ।

कर्ज 'दोस्त यार व रिस्तेदार या साहूकार या बैक का कर्ज चाहे किसी का भी हो ' कर्ज  कर्ज ही होता है । इस भूत से प्राया सभी डरते है । किसी से भी पूछो वह यही कहता है कि भाई कर्ज बहुत बुरा होता है । यह  इज्जत ' सुख चेन नीद सभी कुछ छीन लेता है ।और कर्ज की चिंता चिता के समान होती है । रिण मे डूबे लोगो का आर्थिक पतन हो जाता है । कुछ लोग तो करजा से छुटकारा पाने के लिए अपनी जान तक दे देते है । कुल मिलाकर कर्ज काल का रूप होता है ।
आखिर एसा कैसे होता है कि व्यक्ति कर्ज के मकडजाल मे फस कर  अपने जीवन को नर्क बना लेता है । इसकी शुरूवात कुछ  इस तरह होती है _व्यक्ति अपनी आय से अधिक धन  उधार लेकर खर्च कर देता है ।और चुकाने का समय  आने पर रिण चुकाने मे असमर्थ हो जाता है ।और फिर रिण चुकता करने मे टाल मटोल करता रहता है ' एवं रिण का रूपया मागने बालो से छिपता व दूर भागता रहता है ।यह सोचकर कि कुछ समय वाद यह लोग  उसका पीछा छोड देगे । और  उसे रिण नही देना पडेगा ।इस तरह रिण का ब्याज दिन प्रति बढता रहता है । और  अंत मे व्यक्ति को अपना घर 'मकान ' जमीन  आदि  बेचकर कर्ज का रूपया चुकाना ही पड…

बिजली का विकल्प सोलर पेनल ।

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आज के इस  आधुनिक मशीन यंत्रो के युग मे आदमी का जीवन बहुत सुखमय है । पुराने समय की अपेछा आज  आदमी की श्रम शक्ती का बहुत कम  उपयोग होता है । सभी मेहनत के काम कृतिम  ऊर्जा से होते है ।जिसमे बिदयुत शक्ती का पहला स्थान है ।अगर 10 मिनिट के लिए भी बिजली चली जाती है  तो मानो व्यक्ति की जीवनचार्या रूक जाती है । यह भारत के शहरी क्षेत्रो की बात है ।पर ग्रामीण  इलाको मे तो महिनो बिजली का पता नही रहता एसी स्थती मे गामीण जनो के काम काज कैसे चलते होगे । और जब कभी बिजली रहती भी है तो बोल्टेज  अधिक होने से लोगो के बिदयुत यंत्र खराब हो जाते है ।और महिने मे लोगो को बिजली के बिल का भुगतान भी करना पडता है ।
सुर्य  ऊर्जा_सोलर पेनल का उपयोग व्यक्ति को बिजली की सारी झंझटो से मुक्ति दिलाता है । साथ ही बिजली के बिल से भी छुटकारा मिलता है । आज मोबाइल चार्ज करने से लेकर खेतो मे पंप चलाने के लिए भी सोलर पेनल  उपलब्ध है । 5_10 वाट के सोलर सेल से लेकर हजारो वाट के सोलर पेनल बाजार मे लिल रहे है । जो किफाइती होने के साथ ही क्इ साल तक के लिए टिकाऊ भी होते .है । कंपनियां 20_30 साल की गेरटी वारटी के साथ यह पेनल बेचती ह…