शनिवार, 31 अक्तूबर 2015

पैसा 'पैसे को खीचता है ।

मित्रो कुछ समान गुणो वाली वस्तुए आपस मे एक दूशरी वस्तू को खीचती है ।जिनमे से एक वस्तू पैसा भी है ।  आपने यह मुहाबरा तो सुना ही होगा कि -पैसा 'पैसे को खीचता है । हकीकत मे भी यह बात बिलकुल सच है । आइए कुछ  उदाहरणो से समझे की पैसा पैसे को कैसे खीचता है ।
पहला उदाहरण _रेल्वे स्टेशन पर मैने एक भिखारी को देखा 'उसके हाथ मे तीन रूपये थे और वह लोगो से कह रहा था '  बाबुजी मुझे चाय पीना है  पर मेरे पास केवल यह तीन रूपये है आप मुझे दो रूपये दे दीजिए । तो लोग  उसे दो रूपये दे देते थे । पर वह भिखारी उन दो रूपये को अलग रख लेता था 'और फिर किसी नये आदमी के पास जाकर उसे तीन रूपये दिखाकर यही बात कहता जिससे उसे फिर दो रूपये मिल जाते थे ' और किसी -किसी आदमी के पास छुटटा ना होने पर वह लोग  उसे पॉच रूपये भी देते थे । इस तरह वह भिखारी पैसे 'से पैसे को खीच रहा था ।
दूशरा उदाहरण _ जुआ 'सटटा ' लॉटरी आदी जैसे अवेध कामो मे भी पैसे को दाव पर लगाकर पैसा खीचा जाता है । जिस तरफ  आकृशण बल  अधिक होता है  पैसा उस तरफ खिच जाता है ।
तीशरा उदाहरण _ एक मदारी बाजार मे तमाशा दिखा रहा था । उसने एक चादर बिछा रखी थी  जिस पर दो सौ सौ के नोट पडे थे । और वह  आवाज लगा रहा था -साहवानो आइए देखिए रूपये का तमासा रूपया 'रूपये को खीचेगा । यह सुनकर कुछ लोग तमाशावाज के पास  आए और  खेल देखने के लिए  चादर पर  10_20 के नोट डालने लगे 'यह लोग मदारी के ही आदमी थे ' जिनहे देखकर  और भी लोग चादर पर नोट डालने लगे ' कुछ ही देर मे लोगो की भीड लग गई  और मदारी की चादर पर भी नोटो का ढेर लग गया । तब खेल देखने वालो मे से किसी ने कहा  मदारी से कि भाई देर हो गई अब तमाशा तो दिखाओ 'ज़रा हम भी तो देखे कि रूपया रूपये को कैसे खीचता है । इस पर मदारी ने जवाव दिया ' यह देखो ना इन दो नोटो ने कितने नोट खीच लिए ढेर लग गया ' अरे यही तो तमाशा था । देखने बालो ने भी कहा की बात तो ठीक ही कह रहा है भाई । फिर मदारी ने कहा सब लोग देख लो  बाद मे मत कहना की हमने नही देखा 'यह कहते हुए मदारी ने नोटो सहित  अपनी चादर समेटी और चलता बना ।
चौथा उदाहरण _एक बार  एक मुहल्ले के लोग कोई सार्वजनिक कार्य  कर रहे थे । जिसके लिए उनहे बीस हजार रूपयो की जरूरत थी । रूपया चंदे से इकटठा करना था । और चंदा देने वाले बीस लोग तैयार भी थे । पर सवाल यह था कि पहले चंदे का रूपया कोन दे 'सब लोग यही कह रहे थे कि और लोग तो चंदा दे 'हम भी दे देगे ।इस तरह बैठक ही खत्म हो गई पर किसी ने चंदा नही दिया ।
दूशरे दिन फिर बैठक लगी जिसमे चंदा देने बालो मे से चार लोग नही आए थे बाकी सब लोग बैठक मे उपस्थित थे । आज चंदा इक्टठा करने बाले मुखिया ने कहा कि जो चार लोग नही आए है उन लोगो ने मेरे पास चंदे के रुपये जमा कर दिए है यह कहते हुए उसने अपनी जेव से चार पॉच हजार रूपये निकालकर लोगो के सामने रख दिए । और फिर कहा कि अब  आप लोग भी अपने हिस्से का रूपया जमा करे । यह देख कर  और लोगो ने भी अपने  अपने हिस्से के हजार हजार रूपये मुखिया के पास जमा कर दिए । और काम की रूप रेखा वा काम तय हो गया ।
जवकी सच्चाई यह थी कि अभी वाकी चार लोगो को कुछ पता ही नही था और नाही उनके रूपये जमा हुए थे ' यह तो लोगो से रूपये लेने की एक तरकीब थी जो सफल रही ।
उपरोक्त  उदाहरणो से सिद्ध होता है कि वास्तब मे पैसा 'पैसे को खीचता है ।
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