शनिवार, 7 नवंबर 2015

कर्ज मे डूबने से कैसे बचे ।

कर्ज 'दोस्त यार व रिस्तेदार या साहूकार या बैक का कर्ज चाहे किसी का भी हो ' कर्ज  कर्ज ही होता है । इस भूत से प्राया सभी डरते है । किसी से भी पूछो वह यही कहता है कि भाई कर्ज बहुत बुरा होता है । यह  इज्जत ' सुख चेन नीद सभी कुछ छीन लेता है ।और कर्ज की चिंता चिता के समान होती है । रिण मे डूबे लोगो का आर्थिक पतन हो जाता है । कुछ लोग तो करजा से छुटकारा पाने के लिए अपनी जान तक दे देते है । कुल मिलाकर कर्ज काल का रूप होता है ।
आखिर एसा कैसे होता है कि व्यक्ति कर्ज के मकडजाल मे फस कर  अपने जीवन को नर्क बना लेता है । इसकी शुरूवात कुछ  इस तरह होती है _व्यक्ति अपनी आय से अधिक धन  उधार लेकर खर्च कर देता है ।और चुकाने का समय  आने पर रिण चुकाने मे असमर्थ हो जाता है ।और फिर रिण चुकता करने मे टाल मटोल करता रहता है ' एवं रिण का रूपया मागने बालो से छिपता व दूर भागता रहता है ।यह सोचकर कि कुछ समय वाद यह लोग  उसका पीछा छोड देगे । और  उसे रिण नही देना पडेगा ।इस तरह रिण का ब्याज दिन प्रति बढता रहता है । और  अंत मे व्यक्ति को अपना घर 'मकान ' जमीन  आदि  बेचकर कर्ज का रूपया चुकाना ही पडता है । इस तरह व्यक्ति का पतन होता है
कर्ज मे डुबने से बचने के लिए व्यक्ति को निम्न साबधानियॉ रखनी चाहिए ।जैसे _
[1] सबसे पहले तो हर हाल मे व्यक्ति को रिण लेना ही नही चाहिए ।जहॉ तक संभव हो रूपये 'बस्तुए 'सेवाए उधार लेने से परहेज रखना चाहिए ।
[2]  जिस काम मे धन का लाभ हो एसे काम के लिए ही रिण लेना चाहिए । वह भी बगेर ब्याज के याबहुत कम ब्याज पर ' किस्त मे चुकाने के बादे के साथ ।
[3]  व्यक्ति को अपनी आय छमता से अधिक धन कर्ज  मे नही लेना चाहिए । यानि जितनी चादर हो उतने ही पैर लंबे करना चाहिए ।
[4] अनुचित रिण जैसे _अधिक ब्याज बाला रिण ' दुगना रिण ' काम  की बस्तू अमानत मे रखने के बदले रिण ' एक मुस्त चुकता करने बाला रिण  आदि  नही लेना चाहिए ।
[5]  एक रिण चुकता होने से पहले दूशरा रिण कभी नही लेना चाहिए ।

[6]  रिण देने की भावना हमेशा रखना चाहिए ।और नियम से हर महिने किस्त जमा करते रहना चाहिए । इस तरह रिण  आसानी से चुक जाता है ।

[7]  रिण होने पर व्यक्ति को जल्दी से जल्ली उसे चुकता करने का काम करना चाहिए

[8] कर्ज हजम करने का विचार नही करना चहिए । एसा करने पर बाद मे दुगना चोगना देना पडता है ।

[9] गलत लोगो जैसे गुनडे बदमाशो से कभी भी कर्ज नही लेना चाहिए ।इनका तो धंधा ही होता है लोगो को कर्ज मे फसाना ।
[10]  रिण लेते समय  आदमी को अपने उपर भरोशा हो कि वह  चुका सकता है । तभी लेना उचित है । एसा नही कि बाद का बाद मे सोचेगे । बाद मे सोचने बाले लोग ही कर्ज  मे डुबते है ।

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