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असली और नकली गॉधी परिवार ।

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महात्मा गांधी के परिवार के बारे मे बहुत कम लोग जानते है ।अभी भी कुछ ग्रामीण जन तो यह समझते है की महात्मा गांधी की कोई संतान ही नही थी । और कुछ लोग जिनकी पहुच  इंटरनेट तक नही है वे इंदरा गांधी को ही बापू की पुत्री समझते है ।
मोहनदास गाधी का असली परिवार ।
महात्मा गांधी यानी मोहनदास गांधी की पत्नी कस्तूरवा गांधी थी । और  उनके चार पुत्र थे 'हरीलाल गांधी ' रामदास गांधी ' देवदास गांधी 'और मणिलाल गांधी । हरीलाल महात्मा गांधी के बडे बेटे थे । जो इतिहास मे बदनाम है ।कहा जाता है की हरीलाल गाधी शराबी थे । विकीपेडिया पर हरीलाल गांधी का फोटो है जिसे देखकर यह  अंदाजा लगता है की यह  अदमी नशे मे है ।  हरीलाल  इंग्लैंड जाना चाहते थे उच्च शिक्षा के लिए और बापू की तरह ही बकील बनना चाहते थे ' पर बापू ने उन्हें एसा करने से रोका था । जिससे हरीलाल कुंठित होकर बापू के कट्टर बिरोधी हो गए । बापू भी हरीलाल को अपना पुत्र नही मानते थे । बापू ने एक पत्र मे लिखा था की हरीलाल तुम मुझे सच वताओ क्या तुम  अभी भी शराव  और व्यभिचार मे लिप्त हो यदि एसा है तो मे चाहता हू की तुम मर जाओ । हरीलाल गांधी ने …

MP के पूर्व CM सुंदरलाल पटवा का निधन ।

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को दिल का दौरा पडने से बुधवार 28 दिसंबर 2016 को उनका निधन हो गया वह 92 साल के थे ।
सुंदरलाल पटवा का जन्म 11 नवंबर 1924 मे मंदसौर जिले के कुकडेश्वर गांव मे हुआ था । 1942 मे पटवा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुडे थे । इसके बाद वह संघ प्रचारक रहे । फिर वह दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने ' 1998 में पहली बार  एवं 1990 से 1992 तक दो साल वह दुशरी बार मुख्यमंत्री रहे । 1997 मे सुंदरलाल पटवा दो साल  अटलविहारी की सरकार मे मंत्री पद पर रहे । बीसवीं सदी मे अटलविहारी के समकालीन नेताओं मे सुंदरलाल पटवा BJP के बहुत प्रभावशाली नेताओं मे से एक थे ।
सुंदरलाल पटवा ने मध्य प्रदेश मे अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान बहुत विकास के कार्य करवाए । भोजपुर बिधानसभा क्षेत्र मे आनेवाले गोंड आदिवासीओ के साडे बारह गांव जो अति पिछडे थे उन्हें पटवा ने गोद लिए और  इन गांवो मे स्कूल वनवाए 'पक्की सडक बनवाई और  इन गांवों को विकाश की धारा से जोडा पटवा के योगदान से यह जंगली गांव प्रकाश मे आए । सुंदरलाल पटवा को साडे बारह गांव की जनता कभी भूल नही पाएगी ।

काश अगर मे दर्पण होता ।

काश अगर मे दर्पण होता ' सबको मेरा सर्मपण होता ।

         मेरा कोई रंग न होता ' मेरा कोई रूप न होता
        मे एक खाली चोखटा होता । काश  अगर____

                         बाजार मे दुकान पर बिकता 'मकान मे दीवार पर लगता
                         कोरा काँच का तुकडा होता 'काश  अगर ________


                                             सुंदरी देखतीं मुझमे अपनी सूरत 'मे देखता उनमे अपनी मूरत
                                             एसा खुशनशीव होता । काश अगर ______________



                                                                   मुझमे अपना चहरा देखता हर सक्श ' मे खीचता उनका अक्श
                                                                   एसा नक्शा नफीज़ होता ।काश अगर ________________


सुहागिन के श्रृंगार का 'दुल्हन के उपहार का
मे सत्रहाबा सामान होता । काश अगर ____________


                             भले बुरे सब मुखडे देखता ओर दिखाता ' काले गोरे मे भेद न करता
                               सच्चाई का सवूत होता । काश अगर_____________

           …

ग्रामीण विकास मे स्कूल व पंचायतो की भूमिका ।

केंद्र व राज्य सरकारे ग्रामीण विकास के लिए बहुत प्रयत्नशील है । सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए अनेक योजनाए संचालित की है । फिर भी गॉवो का विकास बहुत धीमी गती से हो रहा है । अंतिम छोर पर खडे गरीब गॉव के मजदूर तक सरकारी योजनाओ का लाभ ना के बरावर ही पहुच पा रहा है ।
ग्रामीण जन जीवन और जीवन शैली ।
देश दुनिया मे इतना विकाश होने पर भी आज ग्रामीण जन  आज दो हजार पुरानी जीवन शेली मे जी रहे है । कच्चे मकान ' मिट्टी के चुल्हे चोके '  चिराग ' चक्की ' ओखली ' अलाव सबकुछ वही पुराना है ।पुराने जीवन मुल्यो पर  आधारित है गॉव का जीवन । कृषि एवं पशूपालन के सहारे ही चलतीं है गॉव की जिंदगीयां ' ग्रामीण क्षेत्रो का वाहरी परिवेश भले ही आधूनिक दिखता है । पर भीतर से गॉव का जन जीवन अंधकार और  अंधविश्वास से भरा है । पुराने रीति रिवाज ' पुरानी भाषा बोलियां ' पुराना धर्म और परंपराए ग्रामीण जीवन मे जड जमाए हुए है । सही मायने मे ते ग्रामीण जन जीवन मे नये आधूनिक समाज का जन्म ही नही हो रहा है ।
ग्रामीण शासकीय स्कूल _ शिक्षा का अभाव गॉवो के विकास मे सबसे बडी बाधा है । दिहाती इलाकों मे सरका…

डिजिटल लेनदेन पर करोडो रू इनाम देगी सरकार ।

ग्रामीण  इलाके मे डिजिटल भुगतान को बढावा देने के लिए ' भारत सरकार ने 15\12\2016 को दो बडी इनामी योजनाओ की घोषणा की है । यह योजनाए 25 दिसम्बर से लागू होगी और 14 अप्रैल तक चलेगी । इस 100 दिन की अवधि मे डिजिटल लेनदेन करने वले ग्रामीण जनो को रोजाना सरकार 15 लाख रू इनाम देगी ।
भाग्यशाली ग्राहक योजना _ इस योजना के अंतर्गत जो गॉव के लोग चार तरीको से डिजिटल भुगतान करेगे इनमे रूपे कार्ड' यूपीआई एप ' यू एस एस डी ' आधार समर्थित भुगतान सामिल है । इन तरीको से 50 रू से लेकर 3000 रू तक के डिजिटल भुगतान करने वालो को ही इनाम मिलेगा । पूरे भारत के ग्रामीण  इलाको के 15 हजार लोगो का चयन होगा रोजाना 100 दिन तक जिनमे से हर  एक को हजार हजार रू इनाम मे दिये जाएगे । इसके अलावा हर सप्ताह सरकार लकी ड्रा निकालेगी जिसमे 7000 विजेताओ का चयन कर  उन्हें पाँच हजार  एवं दस हजार के इनाम दिये जाएगे । यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रो के लिए ह है 'जिसमे विक्रेताओ एवं सरकारी एजेसियो को किया जाने वाला डिजिटल पेंमेंट ही शामिल होगा । इनाम की रकम सीधे विजेताओ के बैक खातो मे जमा होगी । इस योजना के अंतर्गत एक ग…

गडे धन की पहचान ।

राह किनारे चोराहो तिराहो पर स्थापित देवो के पीछे क्या उद्देश्य होगा । यह मूर्ती पूजा के बिरोध की बात नही है । देवी देवताओं की स्थापना प्रण प्रतिस्ठा के साथ होती है ' जिसमे बृहम्ण मंत्र  उच्चारण के साथ हवन विधि संपन्न करते है । इसके बाद ही देवी देवता पूजा योग्य माने जाते है । पर रास्तो के किनारे स्थापित इन साधारण पत्थरो की प्रण प्रतिस्ठा किसने की होगी । न तो यह कलॉ कृतियॉ है और न  इनके नाम देवी देवताओ से मेल खाते है । तो फिर इनहे पूजना कहॉ तक सही होगा ।
इन देव स्थानो की स्थापना के बारे मे पुराने लोग बताते है कि पुराने जमाने मे चॉदी की मुद्राए चलती थी ।और  उस समय बंजारे व्यापारी व्यापार करते थे । व्यापार के दोरान जब  इन बंजारो के पास  अधिक धन  इकट्ठा हो जाता था तब  उनहे इतना सारा धन साथ लेकर चलने मे कठिनाई होती थी । क्योंकि इसमे बजन भी होता था और इसके रखरखाव मे सिक्के खनकते भी थे जिससे लुटने का डर भी होता था । इसलिए यह बंजारे इस धन को रास्ते के किनारे किसी पेड़ के नीचे जमीन मे गाड कर रख देते थे और  उस स्थान के ऊपर पहचान के लिए पत्थर रख देते थे । यह  उनकी तरकीव होती थी । दूसरे राहगी…

नए सामुदायिक रेडियो स्टेशनो को 90% अनुदान ।

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केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 10 दिसंबर 2016 को ' नए सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने बालो को बडे अनुदान की घोसणा की है ।जिसमे पूर्व उत्तर प्रदेशो के लिए 90% एवं अन्य प्रदेशो मे 75% अनुदान सरकार देगी ।
सामुदायिक रेडियो क्या है ।
सामुदायिक रेडियो जिसे अंग्रेजी मे 'कम्यूनिटि रेडियो ' कहा जाता है ।यह रेडियो सेवा आकाशवाणी ' एवं एफएम चैनल के बाद तीसरे नं की रेडियो सेवा है । सामुदायिक रेडियो के प्रशारण का दायरा सीमित होता है । सामुदायिक रेडियो की स्थापना लाभ कमाना नही है ।वल्कि सामुदायिक रेडियो शिक्षा और ज्ञान देने पर  आधारित होते है ।सामुदायिक रेडियो एसे समुदाय और संस्थाओ के दुवारा संचालित होते है जो जनहित मे कार्य करते है ।जैसे शिक्षण संस्थान ' स्यंम सेवी संगठन 'कृषि विज्ञान केंद्र आदि जो कृषि स्वास्थ्य शिक्षा आदि जन कल्याण के लिए काम करते है ।
सामुदायिक रेडियो का आरंभ ।
अमेरिका मे सामुदायिक रेडियो का आरंभ 1940 मे हुआ ।और ब्रटेन मे इसकी शुरूवात 1960 मे हुई ।
भारत मे पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन 1995 मे खुला था । जिसे चिन्नईं के अन्ना विश्वविधालय ने शुरू…

डिजिटल मनी का आवाहन ।

देश मे अभी नोटबंदी का हू हल्ला थमा नही की भारत सरकार ने डिजिटल मनी का आवाहन कर दिया । नगदी रहित लेनदेन का मतलव है 'डिजिटल मनी 'यनी अब लोगो को नगदी रखने की जरूरत नही है ।इसके स्थान पर केवल रूपयो की संख्या पे करने का अधिकार लोगो को अपने पास रखना है ।वस्तू खरीद और सेवा के भुगतान के रूप मे यह  अधिकार किसी को भी दिया जा सकता है ।एवं लिया भी जा सकता है । डिजिटल मनी का उपयोग पारदर्शी सरल  और सुरक्षित तरीका है । इस तरीके से लोग घर बैठे दुनिया के किसी भी स्थान पर रूपयो का लेनदेन  आधा मिनट मे कर सकते है। डिजिटल मनी के चलन से देश की अर्थव्यावस्था वेग गती से चलेगी 'और देश भी इसी गती से विकास के पथ पर  आगे बढेगा । डिजिटल भुगतान के चलन से लोगो को नगदी के बोझ से मुक्ति मिलेगी 'साथ हीनगद मुद्रा के रखरखाव  और  उसकी सुरक्षा आदि से भी निजात मिलेगी । कुलमिलाकर देश मे डिजिटल मनी के चलन से लोगो को फायदा ही फायदा है । लोगो को डिजिटल मनी से डरने की जगह  इसका स्वागत करना चाहिए ।और डिजिटल भुगतान के तरीको को सीखकर  इन्हे जलन मे लाना चाहिए ।
डिजिटल मनी का रूपरंग _डिजिटल मनी का कोई रंग रूप नही है …

चरोटा का बहूउपयोगी पौधा ।

चरोटा सीजल पीनेसी कुल का पौधा है ।इसका वैज्ञानिक नाम केशिया टोरा है । इसे चकोडा और पुवाड भी कहते है ।विदेशो मे इसे 'इंडियन लेवरनस ' के नाम से जाना जाता है ।
निर्यात के लिए प्रतिबंधित है चरोटा ' निर्यात के लिए प्रतिबंधित लगभग 50 पौधे एसे है जिनहे महानिदेशक विदेश वयापार दुवार  इन पौधो के व्यापार और निर्यात की अनुमति तभी होगी जव  इनहे खेती करके पैदा किया जाए ।
चरोटा भारत के अधिकांश प्रदेशो मे पाया जाता है ।इसके पौधे बरसाती मोषम मे जंगलो और खाली मैदानो मे भारी उगते । यह पौधा बिलकुल मैथी के पौधे के समान होता है । चरोटा के पौधे पर पीले रंग के फूल लगते है 'इसकी लंबी फलियॉ होती है जिनमे मैथी जैसे बीज निकलते है ।
चरोटा बहूउपयोगी पौधा है । जो मनुष्य के लिए कुदरत की अनमोल देन है । जिसके निम्नलिखित उपयोग है ।

चरोटा के बीज की गिरी का उपयोग कॉफी बनाने मे होता है ।इसके बीज कडवे होने के कारण कॉफी का स्वाद बढाने मे सहायक होते है ।चरोटा के बीज मे पाए जाने वाले गोद नुमा पदार्थ से पान मशाले बनाए जाते है ।और यह गम बनाने मे भी उपयोग होता है ।चरोटा बीज पाऊडर का स्तमाल  अगरबत्ती बनाने मे बहुत …

सेन्ट्रल बैंक की एक महाभृष्ट साखा ।

हम आपको सेन्ट्रल बैंक अॉफ  इंडिया की एक  एसी साखा की जानकारी दे रहे है । जिसके बारे मे जानकर  आपको आश्चर्य होगा की देश मे इस तरह की बैके भी है ।
सेन्ट्रल बैक की यह साखा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की सुल्तानपुर तहसील के पास गॉव  'ईटखेडी ' मे स्थित है ।इस बैंक ब्रांच के अधिकंश ग्राहक  अनपढ गोड  आदिवासी है जो वन  अंचल के ग्रामीण है ।इसलिए यह बैंक  इन लोगो का भरपूर  शोषण कर रही है ।इस बैक मे लोगो को बैठने तक की कोई उचित व्यावस्था तक नही है ।लोग बैक के बाहर धूप मे खडे रहते है उपर से बैक वाले इन लोगो कू साथ बदतामीजी भरा बरताव करते है ।चपरासी से लेकर बीसी और केशियर यहा तक की बैक मेनेजर भी भृष्ट है ।इस बैंक मे लोगो का कोई भी काम बगेर रिस्वत लिए नही किया जाता है ।यहाँ तक तो ठीक ही है पर  इस बैंक के कुछ खातेदार तो एसे है जिनहे उनका खाता नं तक पता नही है 'बैक वालो ने जानबूझकर  इन लोगो को उनका खाता नं नही दिया है पासबुक देने की बात तै दूर है ।इह तरह के ग्राहको मे अधिकतर बृधा पेशन भोगी है । जिनकी पेशन का सारा रुपया बैंक कर्मचारी डकार रहे है ।बृध्दजन  अपनी पेंशन लेने बैंक जाते है तो बै…

कैरोसीन का दुरुपयोग ।

कैरोसीन ' घासलेट ' मिट्टी का तेल ' जिसे गॉव की भाषा मे चिमनी का तेल भी कहा जाता है । यह तरल  ईधन कुछ साल पहले घरेलू ईधन के रूप मे उपयोग किया जाता था । इसका उपयोग स्टोव  और चिराग जलाने मे होता था । पर  अब समय के साथ स्टोव  और चिराग लुप्त हो गए है ।अब  इनके स्थान पर गैस चुल्हे और बल्ब आ गए है ।और  अब घरों मे मिट्टी के तेल की कोई उपयोगिता नही रही ।
सरकारी उचित मूल्य की दुकानो पर राशन के साथ मिलने वाले कैरोसीन की कालाबाजारी होती है ।यह कैरोसीन  उचित मूल्य की दुकानो से ही रातो रात थोक मे बिक जाता है ।किसी किसी महिने राशन कार्ड पर भी कैरोसीन लोगो को मिलता है ' जिसे लोग  अपने घरो मे स्टोर करके रखते है और फिर  इस कैरोसीन को लोग दुगने दामो पर ट्रेक्टर बालो को बेच देते है । इस सारे कैरोसीन का दुरुपयोग ट्रेक्टरो और पानी के पंप चलाने मे होता है । कैरोसीन किसानो को बिलेक मे भी डीजल से आधे रेट पर मिल जाता है ।डीजल के मुकावले मे कैरोसीन ट्रेंक्टरो और पानी के पंपो मे थोडा जादा जरूर जलता है फिर भी किसानो को कैरोसीन से पंप  आदि चलाने मे फायदा होता है ।
घरो मे मिट्टी के तेल का दुरुपयोग  …

जनधन खातो मे रूपये जमा करेगी सरकार ।

जन धन खातो मे सरकार रूपये जमा करेगी । यह सपना सजोए बैठी है भारत की गरीब जनता 'क्योंकि लोकसभा चुनावो के दोरान BJP ने भारत की जनता से एसा कहा था कि हमारी सरकार आने पर हम विदेशी बैंकों मे जमा भारत का काला धन बापस लाएगे और हर भारत वासी को 15_15 लाख रूपये देगे । इस लालच मे आकर भारत की जनता ने BJP को भारी वोट दिये थे । और केंद्र मे भजापा की सरकार बनी मोदी PM बने । इसके बाद PM मोदी ने जब जन धन योजना चलाई तो लोगो को यह भरोषा और पक्का हो गया की अब सरकार गरीबो को धन लाभ देने वाली है इसलिए जन धन योजन मे लोगो के खाते खुलवाए जा रहे है । और गरीबो ने जनधन योजना मे भारी मात्रा मे खाते खुलवाकर रिकार्ड बना दिया । अब जब विदेशी काला धन भी भारत मे वापस  आ गया और नोटबंदी से देश का काला धन भी ऊपर  आ गया जिससे सरकार के पास  आय कर के रूप मे भी काफी धन  आया है । अब लोगो को पक्का यकीन है की अब भारत सरकार गरीब लोगो के जनधन खातो मे रूपये जरूर जमा करेगी । चाय पान की दुकानो और गॉव के चोवारो पर यह चर्चा हो रही है । कोई कह रहा है की 50000 रू जनधन खातो मे आएंगे ' तो कोई 15_15 हजार रूपये बता रहा है । लोगों का …

मोवाइल से पेमेंट करने के आसान तरीके ।

नोटबंदी के बाद भारत सरकार ने देश मे मुद्रा रहित लेनदेन के चलन को बढावा देने के लिए प्रयासरत है ।आज हर काम  अॉनलाइन होते जा रहे है । एसे मे डिजिटन मनी का चलन भी जरूरी है ।मुद्रा रहित लेनदेन बेहद  आसान है ।वस्तुएं और सेवाए लेने के बदले मे नगद रूपयो के स्थान पर क्रेडिट कार्ड और डेविट कार्ड से पेमेंट करने का चलन बहुत तेजी से बढ रहा है ।
📱 मोवाइल बैंकिंग _ यह मोवाइल से रूपये के लेनदेन का तरीका है ।जिससे हम  अपने बैक खाते मे जमा रूपये  घर बैठे किसी दूशरे ब्यक्ति के बैक खाते मे भेज सकते है ।मोवाइल से रूपये ट्रास्फर करने के प्रमुख्य तीन तरीके इस प्रकार है 1. USSD  सेवा 
2.UPIऐप
3. E _ वॉलेट
Ussd सेवा _ नेशनल यूनीफीड ussd प्लेटफार्म ' यह मोवाइल से रूपये भेजने का सबसे आसान तरीका है । जैसे हम  अपने मोवाइल का वैलेंस  आदि देखते है बिलकुल  उसी तरह से पैसे भेजने का तरीका है ।सबसे पहले अपने बैक खाते मे रजिस्टर मो . नंबर से *99# डायल करे और कॉल का बटन दबाए ।अब  एक सदेश  आता है जिसे ओके करना होता है इसके बाद दुशरे संदेश मे अपने बैक का नाम भरकर सेड करना होता है ' तीसरे संदेश मे सात विकल्प आते है …

भारत मे नोटबंदी का प्रभाव ।

नोटबदी 11नवम्बर 2016
भारत सरकार का हजार  और पाँच सौ के पुराने नोटो का चलन बंद करने का फैसला आने के बाद देश मे बडी उधल पुथल मची है ।मुद्रा के आभाव मे समाज की दोड मानो थम सी गई है । बाजारों मे खरीदारी कम हो रही है । 11 नवंबर से ही हर दिन समाचार पत्रो ' न्यूज चैनलो एवं आकाशवाणी समाचारो मे नोटबंदी हेडलाइन बन कर छाई ।उधर कॉग्रेस  एवं विपछी दल सरकार के इस फैसले को बापस लेने की मॉग पर  अडे है ' और  इसका बिरोध कर रहे है । इस मुद्दे पर सदन मे रोज हंगामा हो रहा है । 17 नवंबर से तो सदन चलना ही बंद है और  अब 28 नवम्बर चक सदन की कार्यवाही स्थगित है ।
हालाकि सरकार का नोटबंदी के कदम का फैसला देश हित मे है ।एवं जनत ने इसका स्वागत किया है । जनता की राय मे भी 90% लोगो ने सरकार के समर्थन मे वोट किया है । क्योंकि नोटबंदी से निम्न लाभ होने वाले है । जैसे _

नोटबंदी से देश मे नकली नोटो का चलन बंद होगा ।आतंकबाद व तस्करी पर रोक लगेगी ।कालाधन सामने आने से सरकार को अधिक इंकमटेक्स मिलेगा ।नगदी की कमी से महगाई घटेगी ।डिजिटन मनी का चलन बढेगा ।अपराध और भृष्टाचार कम होगा ।देश की आर्थिक स्थित मजबूत होगी ।मुद्र…

निराकार के चित्रकार ।

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कहा जाता है की जहाँ न पहुचे रवि वहां पहुचे कवि ' उसीतरह निराकार को भी आकार देता है चित्रकार । चित्रकार  अपनी कल्पना शक्ति से अदृश्य वस्तुओं का भी चित्र बना कर  उसे समझा देते है । उदाहरण के लिए किसी चित्रकार ने समय का चित्र वनाया है । समय  एक अदृश्य शक्ति है । पर चित्रकार ने उसे भी एक रूप दिया । इसी तरह के बहुत सारे चित्र है जैसे भारत माता का चित्र ' इंसाफ की देवी का चित्र और सभी हिंदू देवी देवताओं के चित्र चित्रकारो की कल्पना के ही रूप है ।
चित्रकार पिकासो - पिकासो के चित्रो की शैली तो सभी चित्रकारो से अलग है । पिकासो के चित्रो को देखने पर सिर चकरा जाता है । एक हाथ  उठाते हुए आदमी के चित्र मे अनेक हाथ दिखते है । वाह क्या कलाकारी है ।भारतिय  चित्रकार वासुदेव एस गायतोडे की एक पेंटिंग करीब 30 करोड रूपए मे बिकी थी ।भारत के मुख्य चित्रकारो मे -चित्रकार मोहिती ' चित्रकार राजा रवि वर्मा' चित्रकार मकबूल फिदा हुसेन 'चित्रकार शिवाजी तुपे आदि नाम है ।
अब बात कारटूनकारो की _ कारटूनिस्ट भी कमाल के जादूगर होते है । एसे एसे रूप पेस करते है जिनकी आम लोग कल्पना भी नही कर सकते '…

भोजन का रहष्य ।

भोजन आदमी की पहली जरूरत है ।ईश्वर चाहता तो वह मनुष्यों को बगेर भोजन के मी जिला सकता था जैसा की सांडा जानवर हवा पीकर जीता है ।पर  ईश्वर ने अपने सबसे उत्तम प्राणी आदमी को भी कुदरत के संचालन मे भागीदार बनाया । आदमी सोचता है की वह भोजन करता है ।जवकी यह सच नही है भूख कुदरती पैदा होती है और भोजन भी कुदरत ही कराती है ।आदमी को 12 घंटे के लिए भोजन  उधार देती है कुदरत फिर बापस ले लेती है । आदमी को केवल मुह मे भोजन के जीभ से छूने का सुखद  अहसास होता है जिसे म स्वाद कहते है ।
मनुष्य भी अन्य पशु पक्षीयो की तरह कुदरत का ही काम करता है वह पेड पौधों के लिए खाद  और कॉर्बनडाइ अॉक्साइड बनाता है । मैने पढा है की एक राजा हुआ था जो केवल स्वाद के लिए ही भोजन खाता था वह दिन भर कुछ ना कुछ स्वादिष्ट चीजे खाता ही रहता था और फिर  औषधिया खाकर  उलटी कर देता था ।वह जल्दी मर गया था ।आदमी को भोजन भी मारता है और भूख भी मारती है । इसलिए आदमी को केवल जीने के लिए भोजन करना चाहिए नाकी भोजन करने के लिए जीना चाहिए ।
आम तोर पर भोजन तीन प्रकार के होते है । सात्विक ' राजसिक  और तामसिक भोजन ' सात्विक भोजन फलाहार होता ह…

बारना वॉटर डेम ।

बारन बॉध मध्य प्रदेश के रायसेन जिला की बाडी तहसील के अंतरगत  आता है । यह डेम भोपाल जवलपुर राजमार्ग पर बाडी कस्बा के पास स्थित है ।यह बॉध बारना नदी पर दो पहाडियो के बीच बना है । इस तालाव की नीव पं नेहरू के जमाने मे डली थी । बारना डेम का निमार्ण 70 के दशक मे पूरा हो गया था पहलीबार सन 1974 मे इस डेम मे पानी रोका गया था । बारना बॉध मे बारना नदी की सहायक छोटी बडी 52 नदियो और नालो का पानी जमा होता है 'इन नदियो मे करवला ' चमरसिल ' लुडहाऊ ' आदि नदियाँ मुख्य है । इस तालाव की लंबाई लगभग40 किलो मीटर है 'चोडाई कुछ कम है ।
जिस जमीन पर  आज बारना बॉध का पनी भरा है 'उस क्षेत्रफल पर पहले घने जंगल 'खेत  और गॉव बसते थे ।डेम बनने से वह सारे गॉव  उजड गए । उजडे गॉव - आलमपुर' धूरेन 'छीलरा ' कंदेला ' चितोडा ' बरखेडा ' खी ' बामनबाड 'फुरतला ' मगवानी ' जोहरिया ' भेडा भेडी ' ककरूआ ' आरसखेडा ' पापरिया ' सोजन 'आदि थे ।उस समय सरकार ने इन गॉवो के किसानो को जमीनो का मुआउजा देकर विस्थापित कर दिया था ।पर  अब भी जिस साल बारिश कम…

नरेंद्र मोदी 'भारत भाग्य विधाता है ।

नरेंद्र मोदी _आजादी के बाद नरेंद्र मोदी भारत के एकमात्र एसे प्रधानमंत्री है ' जिन्हें अगर भगवान कहा जाए तो शायद गलत नहीँ होगा । देश हित मे जितना काम पिछली सरकारो ने पिछले 65 सालो मे नहीं किया 'उससे भी जादा काम मोदी सरकार ने महज ढाई साल मे कर दिखाया है । जी . एस .टी. ' कालाधन बापसी ' सर्जीकल स्ट्राइक ' इन सभी कामो से देश की 90% जनता मोदी सरकार से खुश है 'और नरेंद्र मोदी का गुणगान कर रही है ।
नरेंद्र मोदी ने अपने अभी तक के कार्यकाल मे जो सबसे बडा काम देश हित मे किया है 'वह है 'नोट बंदी '  नोट बंदी करना कोई छोटा काम नही है 'मुद्रा समाज की रगों मे दोडता हुआ खून होता है जिसे बंद करने से समाज मे हाहाकार की स्थित उत्पंन हो सकती है । देश के अर्थशास्त्री भी यह कह रहे हे की इतना बडा कदम शाहसी प्रधानमंत्री ही उठा सकता है । नोट बंदी ' से होनेवाली कठिनाईयो केबावजूद भी देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के इस फेसले का स्वागत किया है ।क्योंकि आनेवाले साल मे इससे देश को बडा लाभ होगा ।
जिन कामो के बारे मे पिछली सरकारो ने सोचा तक नही था ' देश हित मे वह काम नरेंद…

अतिथि देवो भव ।

भारत भूमी पर महमान को भगवान के समान समझा जाता है 'और घर  आए महमान का स्वागत पूजा की तरह किया जाता है ।अलग  अलग प्रांतो मे महमानो के स्वागत के अलग  अलग चलन है ।आम तोर पर तो सभी जगह महमानो का स्वागत चाय से होता है और  उच्च वर्ग के लोग महमानो को स्वागत मे कॉपी पिलाते है ।पर महमानो के स्वागत के कुछ विशेष रीति रिवाज भी चलन मे है ।
जैसे _ सबसे सस्ता स्वागत है महमान को एक ग्लास पानी देना और केवल चाय के लिए पूछना ।बुंदेलखंड के गरीब इलाके मे लोग  अपनी हथेली पर दो लोंग रखकर महमान के सामने पेश करते है या एक बीडी जलाकर महमान को देते है ।वही यूपी के धनी लोग घर  आए महमान के स्वागत मे उसके सामने मिठाई से भरी थाली पेश करते है ।
शहरों मे अमीर लोग  अपनी शेखी दिखाने के लिए महमानों को काजू बादाम का नास्ता कराते है ।लखनऊ मे नवाबी चलन से महमान का स्वागत होता है जिसमे इत्र  और पान से महमान को खुश किया जाता है ।कहीं कहीं लोग महमान के सामने लोंग  इलाइची की तस्तरी पेश करते है । मध्य प्रदेश मे पान सुपारी से महमानो के स्वागत का चलन है ।पंजाब मे महमानो को दूध  और लस्सी पिलाई जाती है । नेता और मंत्रियों का स्…

बच्चे पढाई मे तेज कैसे बने ।

बच्चे कल का भविष्य होते है और हर माता पिता चाहते है की उनके बच्चे पढे आगे बढे एवं पढ लिखकर बडे आदमी बने । बच्चे पढाई मे तेज बने इसके लिए बच्चो और  उनके अभिभावकों को कुछ बातो पर  अमल करना जरूरी है ।जैसे _

बच्चों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूरी तरह से बिकसित हो जाने के बाद ही उन्हें पढाना शुरू करना चाहिए । कुछ माता पिता अपने बच्चो को कम  आयू मे ही पढाना शुरू कर देते है जिससे बच्चे आगे जा कर पढाई मे कमजोर पड जाते है ।बृम्ही बूटी _ बृम्ही आयूर्वेद मे दिमाग बढाने की सबसे उत्तम औषधि मानी जाती है ।इसका स्वाद कडवा होता है इसलिए इसे दूध मे मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों का दिमाग तेज हो जाता है ।बच्चो को बार बार पढने के लिए नही कहना चाहिए । क्योंकि बार बार यह बात दोहराने से इस  आदेश का अशर कम हो जाता है और फिर बच्चे सुनते ही नही है ' सोचते है की मम्मी तो वस  एसे ही चिल्लाती रहती है ।बच्चों के सभी कामो का टाइम टेविल एक तख्ती पर लिख कर  उनके पढाई वाले कमरे की दीवार पर लगाना चाहिए ' जिसमे बच्चो के सुवह  उठने से रात सोने तक के सभी कामो का समय फिक्स होना चाहिए ।जैसे _ सुवह 6 बजे सोकर  उ…

हजार पॉच सौ के नोट बंद ।

भ्रष्टाचार ' काला धन  और जाली नोटो की रोकथाम  करने के लिए भारत सरकार ने 9 नवंबर 2016 से देश मे हजार  और पॉच सौ के नोट का चलन बंद कर दिया है । पर फिर भी सरकारी अस्पताल ' दबा की दुकान ' किराना दुकान ' पेट्रोल पंप '  पर  एवं रेल टिकट ' सरकारी बस टिकट ' हबाई जहाज टिकट आदि कुछ स्थानो पर 11 नवंबर की आधी रात तक  इन नोटो का उपयोग हो सकेगा । इसके बाद हजार  और पॉच सौ के नोट बैको और पोस्ट अॉफिसो मे 30 दिसंबर 2016 तक जमा होगे । जो लोग किन्ही कारणो से 30 दिसंबर तक  अपने हजार पॉच सौ के पुराने नोट बैक मे जमा नहीं कर पाएगे उनहे फिर  अपने परिचय पत्र दिखाकर बैक मे पुराने नोट जमा करने का अंतिम समय मार्च2017 तक दिया गया है ।पर लेनदेन मे हजार  और पॉच सौ के नोट का उपयोग 9 नवंबर से ही कानूनी बद है ।

भ्रष्टाचार के मामले मे भारत दुनिया मे आज 76 वे नम्बर पर है । एवं भारत मे आज जाली नोटो का चलन  आधे से भी अधिक है । यह हजार पॉच सौ के जाली नोट भारत मे पडोसी मुल्क पकस्तान से आए है जिनहे घुसपेठियो ने भारत मे चलाया है । यह जाली नोट देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहे है । इन्हीं सब कारणो…

बेहरा बनने के लाभ ।

👂🚿 समाज मे कुछ होशियार लोग अपने कानो की विकलांगता का झूठा प्रमाण  पत्र डॉक्टरो से बनवा लेते है । क्योंकि डॉक्टर के पास कानो की विकलांगता पता करने का कोई कारगर  उपाय नही होता एसे मे वह मरीज के कानो मे एक  आवाज आने वली मशीन लगाकर मरीजों से ही पूछते है की कुछ सूनाई दे रहा है तो मरीज झूठ बोल देता है की नही कुछ नही सुनाई दे रहा है और डॉक्टर को मूर्ख बनाकर  उससे कान का विकलांग प्रमाण - पत्र बनवा लेते है ।यदि डॉक्टर को मरीज पर शक भी होता है तो उसे रिस्वत देकर भी डॉक्टर से यह प्रमाण पत्र बनवा लिया जाता है ।और फिर इस प्रमाण का उपयोग न्यायलय  और सरकारी योजनाओ का लाभ उठाने मे किया जाता है
समाज मे भी यह नकली बेहरे अपने बहरेपन का नाटक करके लोगो को खूब बेबक्कूफ बनाते है । यह  अपने फायदे की बाते तो सुन लेते है पर  अपने नुकसान की बाते अनसुनी करते है ।यदि इन बहरो पर किसी को शक भी होता है और वह पूछता है की आपको सुनाई देता है ' इस पर यह लोग कहते है की हॉ एक कान मे थोडा सुनाई देता है ।
इन नकली बहरो को असली बेहरा समझकर लोग  इनके सामने ही इनकी अच्छाई और बुराई की बातें करते है ।और यह बहरे इसका पूरा ल…

जंगल का भाग्य उदय ।

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🌳🌲🌴🌲पिछले दशकों मे जंगलों को बचाने के लिए भारत मे बहुत प्रयास किए गए ।यहाँ तक की चिप्पू आंदोलन तक चले जिनमे लोग पेड़ो को कटने से बचाने के लिए पैडो से चिपक जाते थे । पर  असफलता ही हाथ लगी और जंगल अधाधुंध कटते रहे ।क्योंकि उस समय ग्रामीण जन जंगलो पर ही निरभर होते थे  । उनके अधिकंश काम लकड़ी से ही पुरे होते थे ।
लकड़ी की काठी और काठी का घोडा _जैसे कृषि यंत्र हल ' बक्खर ' बैलगाडी ' आदि लकडी से ही बनते थे ।गाँव मे मकान भी लकडी से ही बनते थे ।फनीचर  और घर की बहुत सी वस्तुएं लकडी की ही उपयोग होतीं थी । मकानो के चारो तरफ  और खलिहानो की बागुड भी लकडी व कॉटेदार झाडियो से ही होतीं थी । चुल्हा जलाने मे भी लकडी का ही उपयोग होता था ।यहॉ तक की लोग दॉत साफ करने के लिए भी लकडी की दतून का उपयोग करते थे ।
बदलाव की बेला _अब गांव के जन जीवन मे भी समय के साथ बदलाव  आया है । अब कृषि के काम ट्रेक्टर से होते है । मकान पक्के बनने लगे है । बागुड की जगह तार फेंशिंग होने लगीं हैं ।लकडी के फर्नीचर और खिडकी दरवाजो एवं लकडी की सभी वस्तुओ की जगह  अब लोहे और प्लास्टिक के सामानो ने ले ली है ।लकड…

मोवाइल सेट दस साल कैसे चलाए ।

🚪 मोवाइल फोन सेट 🚪
एक जमाना था जव सदेश भेजने के लिए कबूतर का उपयोग किया जाता था ।फिर वह दौर  आया जव संदेश पत्र डॉक से भेजे जाते थे ' डॉक से भेजे गए संदेश का जवाब आने मे दो सप्ताह तक का समय लगता था । आज हमारी खुशकिस्मती है कि अब हमारे हाथ मे विज्ञान ने मोवाइल नामक  एसा यंत्र दिया है जिससे हम दुनिया के किसी भी कोने मे रहने वाले अपने अजीज से सीधे बात कर सकते है । और परदेश मे बसने बाले अपने प्रियजनो को वीडियो कॉल करके प्रत्यक्ष देख सकते है । विज्ञान की देन ' मोवाइल ' मनुष्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है ।
मोवाइल की कीमत_ आज बाजार मे 500 रू  मे भी मोवाइल मिल जाता है । पर  एक  अच्छा स्मार्ट मोवाइल फोन सेट बाजार मे 8 से 10 हजार रूपये के आसपास मिलता है । याने की एक आम  आदमी की महिने भर की कमाई के बराबर  एक नये मोवाइल की कीमत होती है ।
मोवाइल  आज हमारे जीवन का एक  अहम हिस्सा बन गया है और हर  आदमी का काम  इसके बिना नही चलता है ।पर  कोई भी मोवाइल सेट लापरवाही से चलाने पर  दो या चार महिने से जादा नहीं चलता और खराब हो जाता है फिर  उस सेट को कचडे मे ही फेंकना पडता है । नया मोवाइल लेन…

कर्कस पत्नी को कैसे सहें ।

कोयल का रूप भले ही काला होता है पर  उसका कुहू कुहू का मीठा स्वर कर्णप्रिय होता है । वही कुछ सुन्दर रूप वाली औरतें होती है ' जिनका स्वभाव कर्कस होता है एसी औरतो का कर्कस स्वर सुनकर सामने बाले आदमी के माथे पर बल पड जाते है और दिमाग का पारा चढ जाता है ' कर्कस वाणी के बॉण सीने मे जहर मे बुझे बॉणो की तरह लगते है ।एसी नारीयो के बचन दूशरे लोग तो यह सोचकर सहन कर लेते है की _तुल्सी इस संसार मे तरह तरह के लोग है सबसे हिल मिल चलो नदी नाव का संजोग है । पर  उन लोगो का क्या हाल होता होगा जो लोग कर्कस  औरतों के पती होते है ' आखिर वह लोग  इन  औरतो के साथ कैसे जीवन जीते होगे ' शायद यही सोचकर की _ किसी को मुकम्ल जहाँ नहीं मिलता ' किसी को जमीं नही मिलती तो किसी को आसमां नही मिलता " ।
सुकरात की पत्नी_ सुकरात की पत्नी बहुत कर्कस स्वभाव की औरत थी । दिन भर मेंडक की तरह टर्राती ही रहती थी । सुकरात  उसकी बातो पर ध्यान ही नही देते थे । सुकरात से मिलने आने वाले कई लोगों ने सुकरात से कहा_की आप  अपनी पत्नी को कैसे सहते है ' आप  इसे छोड क्यों नही देते । इस बात पर सुकरात कहते थे की नही …

बैंक 'स्विफ्ट कोड ' की पूरी जानकारी ।

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स्विफ्ट कोड " क्या है ? इसे कैसे और कहाँ से प्राप्त के करें ? 
इस विषय की पूरी जानकारी नीचे दी जा रही है । 
बैक खाते का एक कोड होता है । IFSC कोड जिसके बारे मे सभी जानते है । यह कोड हर बैक ब्रांच का अलग होता है ।यह कोड  एक ही देश के अंदर एक बैक से दूशरी बैक के खाते मे रुपये भेजने के लिए उपयोग होता है । ifsc code का फुल फार्म ' इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम ' है ।
स्विफ्ट कोड swift code : यह कोड  एक देश से दूशरे देश की बैको के खाते मे मुद्रा ट्रांस्फर करने के लिए उपयोगी होता है । पर भारत मे हर बैक ब्रांच का अपना स्विफ्ट कोड नही होता है ।बडी बडी बैको जैसे sbi आदि के एक प्रदेश मे दो या चार शहरो की बैंको के ही यह कोड होते है । कुछ बैक जैसे icici बैक  आदि के तो एक प्रदेश मे केवल  एक ही शहर का स्विफ्ट कोड होता है । किसी भी बैक का स्विफ्ट कोड  उस प्रदेश मे उस बैक की किसी भी शाखा के खाते मे विदेशी धन डलवाने के लिए उपयोग किया जा सकता है ।
स्विफ्ट कोड ' पता करना _ इंडिया मे विदेशी मुद्रा अपने बैक खाते मे ट्रांस्फर करवाने वालो को इस 'स्विफ्ट कोड ' नामक मुशीवत की जरूरत पडती है । …

मध्य भारत की दीपावली ।

🌋 दीपावली 🌋
दीपावली हिन्दू धर्म के लोगो का सबसे बडा त्योहार है । यह त्योहार पूरे भारत मे अलग  अलग मान्यताओं  और रीती रिवाजो के साथ मनाया जाता है । आईए हम  आपको मध्य भारत के ग्रामीण  अंचलो मे मनाए जाने वाले दीवाली के त्योहार के बारे मे बताते है ।
दशहरे के बाद से इस त्योहार की तैयारी शुरू हो जाती है । घरो की साफ सफाई ' छवाई पुताई के साथ ही घर की सभी बस्तुए धो पोछ कर साफ सुथरी की जातीं है । खराब चीजे कबाडियों को बैच दी जातीं है । घरों की पूरी सजावट के बाद नये शिरे से घरों मे वस्तुएं जमाईं जाती है जैसे नया जीवन शुरू किया जा रहा है ।
दीवाली के बाजार _ दीपावली से पहले लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजारों का अपना महत्व होता है ।जो लोग कभी भी बाजार नही जाते वह लोग भी खासतोर पर दीवाली के बाजारों मे वस्तुए खरीदते देखे जाते है ।क्या गरीब  और क्या अमीर सभी लोग  इन बाजारो मे दिल खोल कर पैसा खर्च करते है और खूब सामान खरीदते है 'सामान भी क्या? रंग पेंट ' फुलझडी पटाखे ' मोर पंख ' दिया ' लक्ष्मी की मूर्ती ' सजावट के सामान 'और खाने पीने की वस्तुएं  आदि की इन बाजारो मे बहुत ब…

अंतरिक्ष मे जीवन की खोज ।

बृहमांड मे केवल  एक हमारी पृथ्वी ही जीवित गृह नहीं है । अंतरिक्ष मे और भी गृह है जहाँ हमारे जैसी ही इंसानी दुनिया हैं । यह बात अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी मानती है । खगोल वैज्ञानिक ' और बडे बडे विचारक भी इस मत से सहमत है । पौराणिक कथाओं मे भी दूशरे लोको के बारे मे लेख है ।
एलियन  और  उडनतश्तरी
अनेक बार  आसमान मे उडनतश्तरी देखे जाने की खबरे आईं है ।पृथ्वी पर  एलियंस देखे गए है जो किसी दूशरे गृह से आते है ।एलियनो के फोटो भी खीचे जा चुके है जो एलियन होने के सबूत है ।
रेडियो संदेश _🌐 अनेक बार पृथ्वी पर  एसे रेडियो संदेश भी पहचाने गए है जो अंतरिक्ष के किसी दूशरे गृह से पृथ्वी पर भेजे गये थे । उन गृहो से पृथ्वी पर  आने वाले रेडियो संदेश पृथ्वी तक पहुचने मे बहुत प्रकाश बर्ष का समय लगता है ।
बृहमाण्ड _ इस शब्द का मतलव है जो फेलता ही गया हो और जिसका कोई आदि अंत ना हो । अंतरिक्ष मे दुरी मापन का पैमाना प्रकाश बर्ष होता है ।क्योंकि किरण की गती सबसे तेज है । एक सेकंड मे किरण लगभग डेढ लाख मील की दूरी तय करती है । सूरज से हमारी पृथ्वी पर किरणे पहुचने मे अठ मिनट लगते है । एक साल मे प्रकाश जितनी…

ग्रामीण भारत की तस्वीर ।

गांव की माटी की सुगंध _ मिट्टी  की दीवार के उपर लकड़ी और बॉस के जाल का छप्पर जिसके उपर मिट्टी के पक्के कवेलूओ की कतारो से बने मकानों का समूह गांव होता है । खडिया मिट्टी से पुते घर ' गोवर से लिपे अॉगन के कोने मै तुलसी का पौधा सोभायमान होता है । गांव की गलियों  चौवारो पर खेलते हुए बच्चे चिडियो से  चहचहाते है । सुवह सुवह  गांव के पनघट पर पानी भरती हुई स्त्रिया रंग बिरंगी साडियो मे तितलियो के झुंड के समान दिखती है ।
🍚 खान पान _  मिट्टी के चुल्हो पर लकडी की आग मे पकी रोटियां और गोवर के उवलो के अंगारे पर सिकी बाटियो के स्वाद का तो कहना ही क्या वस खाते ही जाओ । त्योहार पर बनाने वाली गांव की मिठाईयां बहुत मीठी होती है ' इनमे शक्कर ही शक्कर होती है । गांव के लोग चाय भी बहुत मीठी पीते है ' इतना मीठा खाने पर भी वे सुगर की बीमारी का शिकार नही होते क्योंकि वह श्रम का काम करतू है जिससे चीनी हजम हो जाती है ।
⛺ धर्मिकता_ गांव के लोग बहुत धार्मिक  प्रवृती के होते है । एक दुशरे से मिलते हुए राम _ राम  कहते हुए  देखे जाते है । कुछ गांवो मे सुवह राम नाम की प्रभात फेरिया निकलती है । मंगलवार …

समय के रूप रंग ।

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समय ⌚
समय बहुत रहष्य मय कृया है । समय का असली रूप स्थर है ।दूशरे रूप मे मानव निर्मित  और प्राकृतिक समय चलायमान है । जो गोलाकार घूम रहा है । वर्तमान बीत जाने पर भूतकाल बन जाता है ' और फिर  अतीत ही रूप बदल कर भविष्य बन कर  आ जाता हैब जब से मनुष्य ने समय को पहचान है तभी से समय मुल्यवान समझा जाने लगा । फिर समय नापने के लिए घडी का अविष्कार हुआ । समय का चित्र बनाया गया '  इस चित्र मे समय मानव रूप मे पंखो बाला आकाश मे उडता हुआ दिखाया गया है और समय का मुह बालों से ढका हुआ है । इसका मतलव है की समय  अपना चेहरा छिपा कर  उडता है ।
समय का एक चक्कर एक साल मे पूरा होता है ।और  इसके बाद समय मे कुछ नया घटित नही होता फिर वही शुरू हो जाता है । जो पिछले साल हुआ था । उदाहरण के लिए जैसे पिछले साल बारिश के मोषम मे जिस दिन त्योहार था और  आकाश मे काले वादल थे 'प्राकृतिक  और मानव निर्मित  दोनो ही माहोल ठीक बैसे ही होगे जो पिछले साल थे ।
24 घंटे के चक्कर मे आदमी घडी के साथ घूमता है और हर दिन वही वही काम करता है जो उसने पिछले दिन किया था ।
आदमी के लिए समय का महत्व ।
मनुष्य के जीवन का समय बहुत अनमोल है…

रावण का प्रतीक 'दशहरा ।

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द   श  ह   र   ।   र   ।   व    ण
रावण जैसा महामानव वलबान  और बुद्धीमान पुरुष कोई दुशरा पैदा नही हूआ ।और शायद  आगे होग भी नही ।रावण  उस युग का सर्व संपन्न राजा था । उसके पास सोने का महल  और वायूयान (पुष्पक )था ।उस समय रावण ने लंका मे जो विकाश किया उसके निशान  आज भी श्रीलंका मे है ।वहा एक भव्य मंदिर है शिव का जो रावण ने ही बनबाया था । महापंडित रावण राजनीती मे भी बहुत निपुण था ।रावण  एक वीर योद्धा था वीरो की यही पहचान है की वह झुकते नही है भले ही टूट जाए । रावण ने 'रावण सहिता 'नामक ग्रंथ  की रचना की थी  जो आज भी है ।रावण भविष्य ज्ञाता भी था जो उसके साथ हुआ वह सब  उसने पहले ही जान लिया था ।पर  उसके पास राम से युद्ध करने के अलावा और कोई विकल्प नही था अगर रावण  अन्य कोई विकल्प  अपनाता तो आज भारत मे दशहरा नही मनाया जाता ।  बुराई पर  अच्छाई की जीत का त्योहार दशहरा राम के साथ रावण की भी याद दिलाता है ।रावण भले ही बुराई का पात्र है । पर  उसके बिना रामायण अधूरी है । रावण गलत नही था वह  अलग था ।
दशहरा का मतलव है दस + सहरे यानी की दस सिर ' पर  इसका यह मतलव नही है क…

नं.1एंकर नीलम शर्मा ।

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नीलम शर्मा📺डी डी न्यूज चैनल की एंकर नीलम शर्मा ' जो की एक वरिष्ठ समाचार वाचक  और प्रस्तुतकर्ता है । वह डी डी न्यूज पर सन1995 से कार्यरत है ।उन्हें सन 2010 मे महिलाओ की एक संस्था ' आधी आवादी ' ने 'वूमन  एचीवर्स अवार्ड ' से सम्मानित किया है । नीलम  एक कुशल समाचार वाचक है उनकी साफ दमदार  आवाज लोगो को बहुत भाती है ।नीलम को अपने 21 साल के कार्यकाल मे कभी भी न्यूज चैनल पर कुर्ती सलवार मे नही देखा गया ' वह हमेशा भारत के पारंपरिक लिवाज साडी ब्लाऊज मे नजर  आती है ' माथे पर बिंदी गले मे मंगलसूत्र यही उनकी पहचान है । नीलम  अपने अलग  अदाज़ मे समाचार वाचन या इंटरव्यू लेती देखी जाती है । कार्यक्रम ' चर्चा मे ' को लेकर नीलम बहुत लोकप्रिय है । उनकी लोकप्रिता को देखते हुए उन्हें नं. वन  एंकर कहना शायद गलत नही होगा । नीलम शर्मा  डी डी न्यूज चैनल की पहचान है ।

चीनी धर्म ताओ और लाओत्से ।

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चीन के त्चयु प्रदेश मे 605ईशा पूर्व लाओत्से नाम के आदमी का जन्म हुआ था । वह  एक सरकरी लाइब्रेरी मे काम करता था 'जहाँ उसने 40 साल तक काम किया । लाओत्से अपने जीवन मे बहुत ही कम बोला वह मोन जादा रहता था । कृष्ण और राम की ही तरह महाज्ञानी था लाओत्से पर  उसके पीछे कोई बडा धर्म नही बना क्योंकि उसका संदेश बहुत अलग है । लाओत्से कहता है _मे उसका नाम नही जानता 'वह 'तत'है उसे पाने के लिए कुछ करना नही है वस शून्य हो जाना है । लाओत्से पिंगलो पहाड पर जाना चाहता था अपने आप को बरफ मे गलाने के लिए पर लोग  उसे नही जाने देते थे । बताया गया है की एक यात्रा के दैरान जव लाओत्से 'क्वानयिन' के एक चुंगी नाके से गुजर रहा था तब वहां के अधिकारी ने उसे रोका और कर देने को कहा तो लाओत्से ने कहा की मेरे पास पैसे तो है नही ' लेकिन  अधिकारी ने कहा नही एसे नही जाने देगे कुछ ना कुछ तो दैना ही होगा । तब लाओत्से ने उस उस  अधिकारी को अपना ज्ञान दिया  जो उस  अधिकारी ने तीन दिन तक लिखा ' फिर लाओत्से को बासर जाने दिया।
उस  अधिकारी का नाम च्युंगत्सी था  जिसने लाओत्से के बोध बचनो को लिखा था । यह …

सुर्खीयो मे 'तारिक फतेह ।

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पिछले कुछ दिनो से पाकिस्तानी लेखक तारिक फतेह  भारत के न्यूज चैनलो पर नजर आ रहे है ।वह पाकिस्तान के खिलाफ आग  उगल रहे है ।और पाक की पोल खोलते हुए वहाँ के हुक्मरानो पर खूव व्यंग बॉण छोड रहे है । उनका कहना है की वह सच बोलते है ।उन्हें किसी का डर नही है । इन दिनो तारिक साहव भी मकबूल फादा हुसैन की तर्ज पर खूव सुरखी वटोर रहे है । वह बलूचिस्तान के पक्षधर है । उनके विचारो मे भारत के प्रति प्रेम है और पाकिस्तान के प्रति नफरत है । फतेह साहव नरेंद्र मोदी की बहुत तारीफ करते है ' वे लालवहादुर शास्त्री के भी फैन है । उन्हें पाक के बारे मे जो भी कहना होता है उसे बगेर लाग लपेट के दो टूक शब्दों मे कहते है ।
एक  इंटरव्यू के दोरान किसी ने तारिक से कहा की _क्या पाक मे छूपे दाऊद को घर मे घुस कर मारना चाहिए ? इसके  उत्तर मे तारिक फतेह ने कहा की आपको मारने की क्या जरूरत है ' वही के किसी आदमी को दस का नोट दो वह मार देगा । 67वर्षीय तारिक फतेह  इन दिनो भारत मे बतोर महमान है ।

तारिक फतेह  एक लेखक के रूप मे जाने जाते है । उनका जन्म पाकिस्तान के कराची शहर मे 1949 मे हुआ ।उन्होंने अपने जीवन का बहुत समय सा…

डिप्रेशन के शिकार लोग ।

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इस शहर मे हर शख्स परेशान सा क्यों है ।

बच्चे संसार का भविष्य ।

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बच्चे प्यारे क्यों होते है ?
बच्चे इंसानी हो या पशू पक्षियों के बच्चे सभी बच्चे बहुत प्यारे लगते है । पहले केवल नौ ही रस थे  बाद मे सूरदास ने  एक  और रस की खोज की ' वात्सल्य रस ' यह रस सूरदास को कृष्ण के बाल रूप से मिला था ।
बच्चे सभी को प्यारे होते है । मॉ बच्चों को सबसे जादा प्यार करती है ।इससे भी अधिक प्यार बच्चों को उनके दादा दादी करते है । यह कुदरत का नियम है संसार चलाने के लिए ।जब जहाँ जो जरूरत होती है उसका पूरा इंतजाम कुदरती होता है । बच्चे के दुनिया मे आते ही माँ के स्तन मे उसके लिए दूध  आ जाता है । अगर बच्चो मे मोह ना होता तो दुनिया की कोई भी माँ अपने बच्चों को दूथ नही पिलाती और बच्चे पैदा होते ही मर जाया करते जिसके कारण संसार चलना कठिन था । इसलिए बच्चे ईश्वर का मोहनी रूप होते है ।क्योंकि बाल रूप मे बच्चे असहाय और  अवोध होते है ओर  उनहे इस समय संसार मे जीने के लिए सहारे की जरूरत होती है जो मोह बस माँ करती है । जव बच्चा कुछ बडा होता है तो उसे शिक्षा की जरूरत होती है वह सीखना चाहता है । इसलिए ही बच्चे दादा दादी से कहानी सूनाने की जिद करते है ।दादा दादी भी मोह बस बच्चों …

महारानी अवंतीबाई लोधी

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वीरंगना रानी अवंतीबाई
प्रथम आजादी की लडाई की वीरंगना रानी अवंतीबाई लोधी ' रानी लक्ष्मीबाई और रानी दुर्गाबती की श्रेणी मे आती है ।पर  उन्हें बहुत कम लोग ही जानते है । इसका कारण  है की अवंती रानी को इतिहास मे संमान नही मिला ।लेकिन पिछ्ले दशको मे खोजी लेखको ने इतिहास के बिखरे पन्नों से रानी अवंतीबाई लोधी का इतिहास  इकट्ठा किया और रानी को समाज के सामने प्रकाशित किया है । मध्य प्रदेश के जवलपुर  आदि शहरो मे स्मारक के रूप मे रानी अवंतीबाई की प्रतिमाए स्थापित हुई है । भरतिय डॉक विभाग ने भी सन 2001 मे रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर डाक टिकिट  जारी किया था ।  मध्य प्रदेश् के शिक्षा पाठय क्रम मे भी  रानी अवंतीबाई लोधी पर  पाठ  जोडागया है ।
रानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 1831 मे मध्य प्रदेश के सिवनी जिले मे मनकेडी गाव के जमीदार जुझार सिह के घर हुआ था । उनका विवाह रामगढ (मडला ) रियासत के राजकुमार बिक्रम सिंह के साथ हुआ था । जव बिक्रम  सिंह राजा बने  तो वह धार्मिक प्रवृती के होने के कारण  अपना  समय पूजा पाठ मे अधिक लगाते थे एसी स्थित मे रानी ही राज्य सभालतीं थी उनके दो पुत्र थे ।
सन1952 मे अंग्रेजो ने. …

लोकगीत गायक: देशराज पटैरिया ।

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बुंदेलखंडी लोकगीत संम्राट देशराज पटेरिया का जन्म मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला के गॉव 'तिटानी ' मे हुआ । वह  अपनी यूवा अवस्था से ही अपने अस पडोस के गॉवो मे भजन कीरतन के कार्यक्रम करते रहते थे ।उनकी सुरीली आवाज के कारण लोगो को उनका गायन पसंद आता था । देशराज ने अपने गुरु अमरनाथ से लोकगीत गायन सीखा । सन 1976 मे देशराज ने बुंदेलखंडी लोकगीत गाना आरंभ किया । इसके बाद  उनके गीतो और भजनो का प्रशारण  आकाशवाणी छतरपुर से होने लगा । और फिर कन्हैया केसिट कंपनी ने उनके गीतो के रिकार्ड केसिट के रूप मे बाजार मे उतारे तो कन्हैया केसिट धढल्ले से बिकने लगे ।और देशराज पटैरिया अपने गीतो को ले कर पूरे भारत मे छा गये ।

आज देशराज पटैरिया बूढे हो चुके है पर  उनकी आवाज मे अभी भी जादू है । पर  अब वह बहुत कम स्टेज सो करते है ।फिर भी नवरात्र के समय  उनके पास सेकडो आफर  आते है ।आज देशराज छतरपुर मे रहते है ' उनहे छतरपुर मे कन्हैया केसिट वालो ने मकान उपहार मे दिया है ।उनका एक मकान भोपाल मे भी है जहाँ वे कभी कभार ही रहते है ।दूरदर्शन भोपाल से उनके कार्यक्रम प्रशारित होते रहते है । उनके हर स्टेज सो मे भारी भीड…

विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार ।

इस समय भारत के बाजारों मे विदेशी वस्तुओं की भारी भीड है ' खासकर चाइना की वस्तुओं की भारत के बाजार मे रोजाना अनुमानित 10778 डालर की बिक्री होती है ।चीन हर साल भारत मे लगभग 62 अरब डालर की वस्तुओं का निर्यात करता है ।जवकि भारत चीन को कुल 12 अरब डालर का निर्यात करता है । भारत एक बहुत बडा बाजार है और  आज भारत के बाजार मे चीन के माल की भरमार है ।made in china  के बने सामानो मे सबसे जादा इलेक्ट्रॉनिक आइटम है जैसे _ टेवलेट ' मोबाइल ' लैपटॉप ' टीवी ' टार्च ' झालर बाली लाइटें आदि ।अन्य वस्तुओं मे चाइना के बने कपड़े 'जूते और साथ ही गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति भारत मे बहुत पसंद की जाती है । यह सभी चीनी वस्तुएं भारत की वस्तुओं से काफी सस्ती होती है ' पर यह चीजे घटिया क्वालिटी की होने के कारण जल्दी ही खराव हो जाती है ।भारत मे चीनी माल की कोई गेरंटी बारंटी नही दी जाती ।
चीन पाकिस्तान का पक्छधर है '  इसलिए भारत के लोग चीन से नाराज़ है और  उसे सवक सिखाने के लिए चीन की वस्तुओं के बहिष्कार की मुहीम चलाले पर विचार कर रहे है । क्योंकि चीन को चोट पहुँचाने का यह  एक कारगर …

भारत विरोधी बयान ।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरील ने कल  एक विडियो संदेश मे देश के खिलाफ ब्यान दिया 'की भारत सरकार को 'सर्जीकल स्टाइक ' का सबूत देना चाहिए ।उनहे सेना पर भरोसा नही ' एसा कह कर केजरीवाल पाकिस्तान को भारत पर सवाल उठाने का मोका दे रहे है जो सरासर देश हित मे नही है ।

संजय निरूपम _आज कॉग्रेस के एक नेता सजय निरूपम ने भी एसा ही देशद्रोही ब्यान टयूटर पर दिया है । उनका कहना है कि यह ' सर्जीकल स्टाइक ' फर्जी है । सरकार  इसका सबूत दिखाए ।

सलमान खान _ पिछले दिनो अभिनेता सलमान खान ने भी देश के बिरोध मे कहा था की पाक कलाकार आतंकबादी नही है ' पर  इसका सबूत नही दिया था  जवकी उन्हें देश पर मरने बाले सैनिको का दुख होना चाहिए था पर नही ' इससे जादा दुख  उन्हें विदेशी कलाकारो के जाने का हुआ ।
इन देशद्रोही ब्यानबाजो को सबक सिखाए सरकार चाहे वह मुख्य मंत्री हो या फिर कोई नाचने गाने बाला फिल्म कलाकार ।
देश  आतंकबाद से लड रहा है ' आए दिन सेना के जवान मर रहे है ।और  एसी स्थित मे लोग जो मुह मे आता है बोल देते है ' शर्म की बात है ।
 कपिल मिश्रा _ दिल्ली के एक कार्यक्रम के दोरान…

चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ।

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पेंटर  एम एफ हुसैन के नाम से जाना जाने बाले चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का जन्म 15 सितंवर ?1915 मे भारत के महाराष्ट्रपंढरपुर मे हुआ था ।मॉ के दिहांत के बाद हुसैन अपने बालिद के साथ  इंदोर जले गए जहाँ उन्होने स्कूली पढाई की । हुसैन शोकिया तोर पर प्राकृतिक दृश्य बनाते थे । 1935 मे हुसेन बंबई चले गए और पैसे कमाने के लिए छोटे मोटे काम करने लगे ' पर  उनका मन तो कुछ  और ही नय करना चाहता था ।हुसेन ने कुछ कलाकर  एवं चित्रकारो के साथ मिल कर  एक  आर्ट ग्रुप बनाया ' उनकी पहली चित्र प्रदर्शनी ' सुनेहरा ससार ' बम्बे आर्ट सोसाइटी मे प्रदर्शत हुई ।
इसके बाद हुसैन ने एक घॉस के मैदान की सबसे बडे आकार की पेंटिंग बनाकर  अपना नाम गिनिज बुक मे खिला लिया ।  उनकी कार पर गोपियो के चित्र बने थे । जिसे देखकर कोई भी कह सकता था की यह किसी चित्रकार की कार है ।

एम  एफ हुसैन पहली बार प्रकाश मे अए जब  उनकी चित्र प्रदर्शनी ज्यूरिख मे लगी थी । इसके बाद  उनकी प्रदर्शनी अमेरिका यूरोप  और  अन्य देशो मे भी लगी । उनकी एक पेंटिंग 16 लाख डॉलर मे बिकी थी ' अब हुसेन  बीसवीं सदी के सबसे महगे भारतिय चित्रकार बन …

अमिताभ बचचन का एड लोकप्रिय ।

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इन दिनो टीवी चेनलो पर दिखाया जाने बाला टाटा स्कइ सेट  अप बॉक्स का विज्ञापन बच्चो और महिलायो को खूब भा रहा है । क्योंकि इस  एड मे अमिताभ कठपुतली का नाच दिखा रहे है ।
अमिताभ बच्चन के एड की लोकप्रियता से पता चलता है की भारत मे "नरेन्द्र मोदी " के बाद सबसे अधिक जाना जाने बाला अगर कोई है ' तो वह  अमिताभ बच्चन हैं । अमिताभ बच्चन को भारत की 75% के लगभग जनता पहचानती है ।
अमिताभ बच्चन का संछिप्त परिचय _
अमिताभ बच्चन का जन्म स्थान बनारस है ' उनके पिता कवि हरिबंश राय बच्चन थे ' इस समय  अमित  अपने परिवार के साथ मायानगरी मुम्बई के बॉद्रा मे रहते है । उनकी पत्नी जया बच्चन झीलों की नगरी भोपाल की है ' जो कभी झील के कमल की तरह खिलती हुई अदाकारा थी अब राजनीत मे है । उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी अभितेता है । बहू एशवरिया राय जो एक समय दुनिया की सबसे सुन्दर स्त्रियों मे गिनी जाती  थी  और  अच्छी अभिनेत्रियों मे भी ' अमित की पोती आराध्या है ।
अमिताभ बच्चन  आध्यात्मिक विषय मे भी रूची रखते है । वे ओशो से बहुत प्रभावित है ।एक जमाने मे अमिताभ भारत के भूतपूर्व प्रधान मंत्री राजीवगाँधी के…

लव मेरिज ।

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love 💏
प्रेम करना पाप नही है । पर प्रेमी के साथ शादी करना जरूरी नही है ।

नवरात्र मे ध्वनि प्रदूषण ।

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नवदूर्गा  के आते ही ध्वनि प्रदूषण तेज हो जाता है ।जो दस दिन तक लोगों की रातों की नीद हराम करता है ।  हर झाँकी पर लाऊडस्पीकर लगे होते है जिन पर दिन रात भनन के रिकॉर्ड बजते है ।जिनसे निकलने वाली तेज ध्वनि तरंगों के कारण लोगों का ध्यान भटकता है 'विचार विषय का शोध नही कर पाता ' जिससे लोगों को काम काज के निर्णय लेने मे कठिनाई होती है । लोगों को आपसी संवाद मे भी बाधा महसूस होती है । झॉकियो पर लगे माइक की तेज  आवाज से बच्चों की पढाई भी बहुत प्रभावित होती है । कुछ दुर्गा झॉकी पर तो बडे बडे डी जे साऊड बजते है ' जिनसे निकलने बाली तेज  आवाज कान फोडती है । इस  आवाज का असर नवजात बच्चों के कान पर बहुत घातक हो सकता है ।
रवरात्र मे होने वाले ध्वनि शोरगुल के बिरोध मे आवाज उठाने पर स्थानिय दुर्गा उत्सव समीतियॉ चढ बेठती है ' उनका कहना होता है की हमारी आस्था पर ठेस पहुचाई जा रही है ।
पर धर्म की आड मे रात दिन लगातार तेज  आवाज मे माइक बजाने की मनमानी सरासर गलत है । इस विषय पर कडे नियम  कानून  लागू होने की जरूरत है । नियम  अनुसार रह झॉकी पर सुवह शाम  एक  एक घंटे पूजा आरती के समय पर ही माइक बज…