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किसान सुविधा ' एप एक वरदान ।

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किसान सुविधा ' एप्लीकेशन
भारत के किसनो  के लिए भारत सरकार का एक वरदान ' किसान सुविधा 'एप है ।इस  एप को PM मोदी ने 27 मार्च2016 को लान्च किया है ।इस  एप मे किसानो के लिए हर तरह की कृषि संबंधी जानकारी अॉनलाइन  उपलब्ध होगी ।यह  एप किसानो के लिए एक बहुत बडी उपलब्धि है ।
किसान सुविधा ' एप 7.26MBका है ।जिसे इंटरनेट पर  एप स्टोर  से मुफ्त मे डाउनलोड किया जा सकता है ।यह  एप हिंदी एवं इंग्लिश दोनो भाषाओं मे है ।इसे चलाना भी बिलकुल सरल है ।
किसान सुविधा ' एप भारत सरकार के कृषि मंत्रालय एवं किसान कल्याण विभाग संचालित किया गया है ।


बचत कैसे करें ' राज़ की बातें !

समाज मे अक्सर यह देखा जाता है की लोगों की आय मे बढोत्री होने के साथ ही उनके खर्च भी बढते जाते है । और बचत के नाम पर  एक पैसा भी नहीं बचता ।एवं लोगों का कहना होता है कि पता ही नही चलता सारा पैसा कहाँ चला जाता है ।इस स्थित मे तो आदमी कमाते कमाते मर ही जाएगा परंतु कभी भी बचत नहीं कर पाएगा । क्योंकि कमाई के चक्कर मे वह कभी समय निकाल कर फुरसत मे बैठ कर यह नही सोचता कि आखिर उसका रूपया कहाँ और कैसे खर्च होता है ।अगर  आदमी इस सवाल का सही उत्तर खोज ले तो उसे बचत का राज़ पता चल जाएगा ।
बचत का राज़
हमारी सबसे बडी चूक या गलती यह है कि हम  अपनी हर छोटी बडी जरूरत को तुरंत पैसे से पूरा करते है । हम  अपनी सभी जरूरतों की पूर्ती के लिए एक मात्र धन का विकल्प अपनाते है । जबकि जरूरत पूरी करने के लिए धन के अलावा भी हमारे पास  अन्य कई विकल्प होते है ' पर वे जरूरत के समय हमारे दिमाग मे इसलिए नही आते क्योंकि  हमें अपनी जरूरत तुरंत पैसे से पूरा करने की पुरानी आदत होती है ।
बचत के दो गुप्त उपाय !
[1] जरूरत महसूस होने पर विचार करें 'और जरूरत को पहचाने की क्या सच मे यह जरूरी जरूरत है या फिर केवल मन की चाहत ह…

सब्जी के खर्च की पूरी बचत ।

सब्जियों पर होने वाले खर्च की पूर बचत कैसे करें ।
बडे बूढे बताते है कि आज से 60_70 साल पहले भारत के गांवो मे साख सब्जियों का व्यापार नहीं चलता था ।सब्जी जैसी साधारण चीज़ को व्यापार की वस्तु ही नही समझा जाता था । उस समय गाँव दिहातो मे न तो कोई सब्जियां बैचता था और न कोई खरीदता था । इसका मतलब यह नही है कि उस जमाने मे लोग सब्जियां नही खाते थे ' वल्कि उस समय  आज से जादा पोषक सब्जियां भरपूर खाईं जातीं थी 'और मुफ्त मे उपलब्ध होतीं थीं । उस जमाने मे गाँव के लोग अपनी जरूरत के लिए साख सब्जियां खुद ही पैदा करते थे ।गाँव के हर घर मे कुछ न कुछ सब्जी जरूर लगी होती थी ' किसी घर के आँगन के कोने मे सेम या तुरई की बेल होती थी तो किसी घर के पिछवाडे बेंगन के पौधे लगे होते थे ।एवं गाँव के चौराहों के किनारे सहजन के सार्वजनिक पैड होते थे । इस तरह गाँव के लोग आपस मे एक दुशरे पडोसी से मुफ्त मे सब्जियों का आदान प्रदान करके काम चलाते थे । सब्जियों की सिंचाई घर के स्नान घर के पानी से होती थी । केवल गरमी के मौसम मे थोड़ी सी सब्जी की परेशानी होती थी । तव  अरहर ' मूग ' मसूर ' आदि की दालों से…

जल्दी अमीर कैसे बने ।

आप अमीर बनना चहते है तो सबसे पहले तो आप अपने मन से जल्दी अमीर बनने का विचार ही निकाल दे ' और रातों रात अमीर बनाने का प्रयास  न करें । अमीर होने के लिए धीरज रखना चाहिए । हर काम  अपने एक सही समय पर ही पूरा होता है । जैसे आपने खेत मे फसल बोया है तो वह  अपने सही समय पर ही पकेगी । कहते है न कि धीरज का फल मीठा होता है ।
अमीर तो सभी बनना चाहते है ' लेकिन कर्म और मेहनत कोई नही करना चाहता । जबकि मरे बिना स्वर्ग पाना असंभव है । कर्म किए बिना इस संसार मे इश्वर या देवता एवं कोई भी शक्ति धन नही दे सकती । इसलिये मेहनत और लगन से काम करते रहना चाहिए ।

अमीर बनाने के बुनियादी उसूल ।

हमें अपना ध्यान उन चीजों पर लगाना चाहिए  'जिन्हें हम पाना चाहते है  उन चीजों पर नही जिन्हें हम नहीं पाना चाहते ।सुबह जल्दी उठते हुए समय से पहले काम शुरू करना चाहिए ' जव दुनिया सो रही हो ।क्योंकि दाना उन्हीं पंछीऔ को मिलता है जो पहले पहुचते है ।अपनी रोजाना की कमाई का चौथा हिस्सा बचाकर ' उसे एसी जगह लगाए जहाँ से धन बढकर लौटे ' यह बिल्कुल पक्का हो ।पतंजलि आयुर्वेद LTD की सफलता का राज़ ' बाबा रामदेव के …

डिजिटल प्रोडक्ट एन्ड डिजिटल विज़नस ।

आज  इस डिजिटल युग मे जहाँ हर काम अॉनलाइन हो रहे है । तब फिर डिजिटल विज़नस करना ही आज  सबसे अच्छा होगा । डिजिटल का अर्थ है की न कोई सीमा और न कोई बंधन दुनिया के किसी भी कोने मे बैठा ग्राहक डिजिटल उत्पाद को एक सेकंड मे खरीद कर  अॉनलाइन पेमेंट भी कर सकता है ।
डिजिटल प्रोडक्ट ।
सबसे वेस्ट प्रोडक्ट डिजिटल प्रोडक्ट ही है । इन उत्पादों की सबसे बडी खूबी यह है कि इन्हे एक बार बनाने के बाद  असंख्य लोगों को बेंचा जा सकता    है और फिर भी यह  उत्पाद हजारों साल तक खत्म नहीं होते । एवं व्यवस्थापक की अनुमति के बिना कोई इन्हें नुकसान पहुंचा सकता है और ना चुरा सकता है । इन मे सडने गलने या जंग लगने का भी खतरा नही होता । डिजिटल उत्पादों का एक  और बडा फायदा यह है की इन्हे कंप्यूटर की मदद से सॉफ्टवेयर दुवारा कंट्रोल करके ग्राहक के पास उत्पाद होने पर भी इसमें बदलाव किया जा सकता है ।
बहुत से एसे डिजिटल उत्पाद है जिन्हें कोई भी कंप्यूटर की जानकारी रखने बाला आदमी आसानी से बना सकता है । जैसे_ फोटो ' आडियो ' विडियो ' गेम ' एप्स ' वेबसाइट ' ई_बुक आदि ।
डिजिटल विज़नस 
डिजिटल सामान या सेवाओं का व…

योगिक खेती से धरती उगलेगी सोना ।

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भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने बीसवीं सदी के आरंभ मे पेड पौधों की संवेदनशीलता को प्रमाणित किया था । जगदीश चंद्र बसु के अनुसार पैड पौधे सुख ' दुख 'दर्द 'डर ' खुशी आदि संवेदनाओ को मानव एवं पशुओं जितना ही महसूस करते है । इस सत्य को भारत के रिशि मुनियों ने दुआपुर युग मे ही जान लिया था । तभी से पेड़ पौधों सम्मान देने के लिए । पेड़ पौधों की पूजा अर्चना की प्रथा का आरंभ हुआ जो आज भी बरकरार है । आज भी तुलसी बट पीपल आदि पेड़ पौधों की पूजा होती है ।
योगिक खेती क्या है ?
शाश्रवत योगिक खेती की इस नई पद्धति की खोज 'प्रजापिता बृहम्कुमारी ईश्वरीय विश्व विधालय संस्था ने की है ।
बिधि_बीजों को बोने से पहले एक कमरे मे रखकर किसान को वहाँ बैठकर  ध्यान लगना होता है ' एवं ध्यान के माध्यम …

नौकरों से काम लेने का तरीका ।

नौकर घरेलू हो या अॉफिस कार्यालय मे काम करने बाले सरकारी नौकर  इनसे अच्छा काम कराने के लिए मालिक को इनसे मधुर संबंध रखना चाहिए ।एवं प्यार भरा व्वहार करना चाहिए ।और हमेश खुश रखना चाहिए ।नौकर से कोई गलती अथवा नुक्सान होने पर भी कटू बचन बोलने की जगह प्यार से समझाना ही उचित है । क्योंकि आखिर यह लोग भी तो हमारी ही तरह  इंसान है और गलतियां इंसान से ही होती है ।

नौकर जब तक कम को अपना समझकर नही करेगा तब तक काम बेहतर नही हो सकता है ।इसलिये नौकरौ को अपने पन का एहसास देना जरूरी है ।नौकर को डरा धमाका कर काम कराने का तरीका हानिकारक हो सकता है ।एसा करने से नौकर मालिक के खिलाफ हो सकता है और  उसके दिमाग मे टेंशन पैदा होता है जिससे रचनात्मक काम करने की छमता कम होती है । फिर वह समय पास करने या केबल रोज कमाने के लिए ही काम करता है। यानी आय जाए मालिक का पेमेंट से काम ।      💃💁
बही दुशरी तरफ नौकर पर  आँख बंद करके यकीन भी नही करना चाहिए ।आखिर नौकर तो नौकर ही होता है । क्या पता कब लालच मे आकर गडबड कर दे ।मीडिया मे एसी अपराधी घटनाएं देखने सुन्ने मे आती है जिनमें घर के नौकर का ही काम होता है ।आब  आप सोचते होग…

धन की तीन गतियाँ ।

~~~~मानव की पृबृति सुख की है ।धन सुख का ही रूप है ।धन स्वामी का सच्चा सेवक है ।इसलिये संसार मे प्राय: सभी धन चाहते है । और जीवन भर धन संगृह करते रहते है । एसे लोग जीवन जीते नही है अपितु जीने की तैयारी ही करते रहते है ।इनके विचार या सपने कुछ  एसे होते है कि अभी क्या जीना ' जब तक सभी कलो का इंतजाम पूरा न हो जाए । फिर सुख चेन से जीवन जिएगें ।यह पूर्णिमा का सपना सजोए रहते है जो कभी किसी का पूरा नही हुआ ।सिकंदर का भी नही । तो फिर हम  आप की औकात ही क्या है ।
धन बुरा नही है ' धन से अच्छा इस दुनिया मे कुछ भी नहीं है । जो कथा कथित लोग  धन को छोडने या दान करने की सलाह देते है ।और भोले भाले लोगो को गुमराह करके सुदामा और हरीशचंदृ बनाने को कहते है । वे खुद धन के लोभी होते है ।
दौलत कमाना अच्छी बात है ।आखिर आदमी जीवन मे धन नही कमाएगा तो और करेगा भी क्या? जीवन का कुछ न कुछ मकसद तो होना ही चाहिए ।पर हर काम की एक सीमा होती है ।एवं अति हर चीज़ की बुरी होती है । व्यक्ति यह भूल जाता है । धन तो समुद्र के खारे पानी को पीने जैसा है ' जितना पियो उतनी ही जादा प्यास बढती है ।
धन की अधिकता होने पर धन क…