सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

बैंक 'स्विफ्ट कोड ' की पूरी जानकारी ।

स्विफ्ट कोड " क्या है ? इसे कैसे और कहाँ से प्राप्त के करें ? 
इस विषय की पूरी जानकारी नीचे दी जा रही है । 
बैक खाते का एक कोड होता है । IFSC कोड जिसके बारे मे सभी जानते है । यह कोड हर बैक ब्रांच का अलग होता है ।यह कोड  एक ही देश के अंदर एक बैक से दूशरी बैक के खाते मे रुपये भेजने के लिए उपयोग होता है । ifsc code का फुल फार्म ' इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम ' है ।
स्विफ्ट कोड swift code : यह कोड  एक देश से दूशरे देश की बैको के खाते मे मुद्रा ट्रांस्फर करने के लिए उपयोगी होता है । पर भारत मे हर बैक ब्रांच का अपना स्विफ्ट कोड नही होता है ।बडी बडी बैको जैसे sbi आदि के एक प्रदेश मे दो या चार शहरो की बैंको के ही यह कोड होते है । कुछ बैक जैसे icici बैक  आदि के तो एक प्रदेश मे केवल  एक ही शहर का स्विफ्ट कोड होता है । किसी भी बैक का स्विफ्ट कोड  उस प्रदेश मे उस बैक की किसी भी शाखा के खाते मे विदेशी धन डलवाने के लिए उपयोग किया जा सकता है ।
स्विफ्ट कोड ' पता करना _ इंडिया मे विदेशी मुद्रा अपने बैक खाते मे ट्रांस्फर करवाने वालो को इस 'स्विफ्ट कोड ' नामक मुशीवत की जरूरत पडती है । खास कर  इंडियन ब्लॉगरों को अपने बैक खाते मे गूगल एडसेंस का पेमेट पाने के लिए यह कोड जरूरी होता है । अपनी बैक शाखा का स्विफ्ट कोड जानने के लिए उस बैक के टोल फ्री कस्टमर केयर पर कॉल करके पता किया जा सकता है । यदि यहाँ से भी समश्या का हल ना हो तो फिर गूगल देवता की शरण मे जाओ इंटरनेट पर  एसी बहुत साइट है जो इंडिया के ही नही पूरी दुनिया की बैकों के स्विफ्ट कोड  उपलब्ध करातीं है ।
बैंकों के स्विफ्ट कोड पता करने के लिए एक बहुत अच्छी वेबसाइट है जिस पर यह कोड खोजना बहुत सरल है । इस साइट का लिंक  और होम पेज का फोटो हम नीचे दे रहे है ' पर यह साइट खोलने से पहले इसके बारे मे समझ ले क्योंकि आखिर विदेशी मुद्रा पाने का सवाल है ।
www.ifscswiftcodes.com यह साइट खोले ' होम पेज अने पर उसमे उपर स्विफ्ट कोड पर क्लिक करें ' अब आपके सामने जो पेज होगा उसमे एक बॉक्स होगा जिसमे चार छोटे बॉक्स होगें । उनमे से पहले बॉक्स पर क्लिक करें 'अब आपके सामने कंटरी लिस्ट होगी जिसमे से आपको अपना देश चुन कर स्लेक्ट करना है इसी तरह दूशरे बॉक्स मे अपनी बैक का नाम चुने ' तीशरे बॉक्स मे अपना प्रदेश चुने ' अब अंतिम चोथे बॉक्स मे आपको सिटी चुनना है ।जव आप इस बॉक्स पर क्लिक करेगे तो आपके सामने एक लिस्ट होगी जिसमे कुछ शहरो के नाम होगे ' एक शहर का एक नाम भी हो सकता है ' जहाँ तक इस लिस्ट मे आपके शहर का नाम नही होगा जहाँ आपका बैंक खाता है ' पर आपको चिंता करने की जरूरत नही है । अपने शहर के पास बाले शहर के नाम पर क्लिक करे ' लिस्ट मे एक ही शरह का नाम हो तो उसी पर क्लिक करे ' अब आपके सामने उस सिटी की कुछ बैंक शाखाओ के नाम होगे 'जिनमें से किसी भी एक पर क्लिक करें । अब आपके सामने नीचे बाले बडे बॉक्स मे पहले नं पर उस शाखा का स्विफ्ट कोड लिखा आएगा और भी उस शाखा की पूरी जानकारी इसमे से यह स्विफ्ट कोड ' नोट करैं 'और उस कंटरी को भेजें जहाँ से आपका पैसा आने वाला है । एक प्रदेश मे आपनी बैंक की किसी भी शाखा का स्विफ्ट कोड अपने खाते के लिए उपयोग किया जा सकता है ।

रविवार, 30 अक्तूबर 2016

मध्य भारत की दीपावली ।

🌋 दीपावली 🌋
दीपावली हिन्दू धर्म के लोगो का सबसे बडा त्योहार है । यह त्योहार पूरे भारत मे अलग  अलग मान्यताओं  और रीती रिवाजो के साथ मनाया जाता है । आईए हम  आपको मध्य भारत के ग्रामीण  अंचलो मे मनाए जाने वाले दीवाली के त्योहार के बारे मे बताते है ।
दशहरे के बाद से इस त्योहार की तैयारी शुरू हो जाती है । घरो की साफ सफाई ' छवाई पुताई के साथ ही घर की सभी बस्तुए धो पोछ कर साफ सुथरी की जातीं है । खराब चीजे कबाडियों को बैच दी जातीं है । घरों की पूरी सजावट के बाद नये शिरे से घरों मे वस्तुएं जमाईं जाती है जैसे नया जीवन शुरू किया जा रहा है ।
दीवाली के बाजार _ दीपावली से पहले लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजारों का अपना महत्व होता है ।जो लोग कभी भी बाजार नही जाते वह लोग भी खासतोर पर दीवाली के बाजारों मे वस्तुए खरीदते देखे जाते है ।क्या गरीब  और क्या अमीर सभी लोग  इन बाजारो मे दिल खोल कर पैसा खर्च करते है और खूब सामान खरीदते है 'सामान भी क्या? रंग पेंट ' फुलझडी पटाखे ' मोर पंख ' दिया ' लक्ष्मी की मूर्ती ' सजावट के सामान 'और खाने पीने की वस्तुएं  आदि की इन बाजारो मे बहुत बिकवाली होती है । भारी भीड के साथ ही इन बाजारों की रोनक देखते ही बनती है ।
धन तेरस _ इस दिन धातु खरीदने का खास महत्व होता है ।  इसलिए लोग पीतल ' स्टील ' ताँवे के बर्तन  इस दिन खरीदते है । हर कोई कुछ ना कुछ धातु की चीज जरूर खरीदता है ।
छोटी दीपावली _  दीवाली के एक दिन पहले होती है छोटी दीपावली इस दिन हिन्दू लोग  अपनी गाय को नहलाकर  उसके सींघ रंगते है फिर गले मे घटी माला और गजरा पहनाकर ' उसके सिर पर मोर पंख बॉधते है ।इस दिन सजी धजी गाये पूरी 'कामधेनू ' ' लगतीं है । शाम को गाय की पूजा होती है ।
🎆 दीपावली🎆 कर्तिक की अमावश्या का दिन  और रात खास होते हैं । इस दिन दीपावली होती है । दिन मे धन की देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुवेर भगवन की पूजा की जाती है साथ ही घरों मे मिठाईयॉ और पकवान बनाए खाए जाते है । लोगो का एक दुशरे के यहाँ निमंत्रण होता है । महमानो को पकवान जिवाए जाते है ।सारे दिन हर्ष उल्लास के साथ दीपावली मनाई जाती है ।
दीपावली की रात _ यह अमावश्या की रात होती है पर  इस रात मे पूनम से भी आधिक चकाचोंध होती है ।हर घर का कोन कोना दियो और झालरो की रंगीन रोशनी से रोशन होता है । एसा लगता है जैसे स्वर्ग जमीन पर  आया है इस रात मे दीवाली मनाने के लिए ।
फुलझडी पटाखे _ बच्चे उछलकूद करते हुए फुलझडियॉ जला रहे होते है ' तो कुछ बच्चे रंगीन चिंगारी बाली चक्री चला रहे होते है । आसमान मे जाकर फूटने वाले पटाखे और जमीन पर बम पटाखो का धूम धडाका चारों तरफ शोर ही शोर पटाखो की गूज मे मदमस्त लोग दीवाली की पूरी रात पटाखे  जलाते है ।
गोर्वधन पूजा _ दूशरे दिन घर के आंगनो मे गोवर की पहाडी बनाई जाती है जिस पर पौधे लगाकर  उसे सजाया जाता है ।इसके बाद  उसकी पूजा होती है ।
भाई दूज _ दीवाली के तीशरे दिन भाई दूज का त्योहार होता है ।इस दिन बहने अपने भाईयो को अपने यहाँ निमंत्रण पर बुलाती है और  उनहे खीर पूडी खिलातीं है ' वहीं भाई भी अपनी बहनो को भेट मे नये वस्त्र रुपये आदि देते है । इसी के साथ समाप्त होता है मध्य भारत की दीपावली का त्योहार ।
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शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

अंतरिक्ष मे जीवन की खोज ।

बृहमांड मे केवल  एक हमारी पृथ्वी ही जीवित गृह नहीं है । अंतरिक्ष मे और भी गृह है जहाँ हमारे जैसी ही इंसानी दुनिया हैं । यह बात अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी मानती है । खगोल वैज्ञानिक ' और बडे बडे विचारक भी इस मत से सहमत है । पौराणिक कथाओं मे भी दूशरे लोको के बारे मे लेख है ।
एलियन  और  उडनतश्तरी
अनेक बार  आसमान मे उडनतश्तरी देखे जाने की खबरे आईं है ।पृथ्वी पर  एलियंस देखे गए है जो किसी दूशरे गृह से आते है ।एलियनो के फोटो भी खीचे जा चुके है जो एलियन होने के सबूत है ।
रेडियो संदेश _🌐 अनेक बार पृथ्वी पर  एसे रेडियो संदेश भी पहचाने गए है जो अंतरिक्ष के किसी दूशरे गृह से पृथ्वी पर भेजे गये थे । उन गृहो से पृथ्वी पर  आने वाले रेडियो संदेश पृथ्वी तक पहुचने मे बहुत प्रकाश बर्ष का समय लगता है ।
बृहमाण्ड _ इस शब्द का मतलव है जो फेलता ही गया हो और जिसका कोई आदि अंत ना हो । अंतरिक्ष मे दुरी मापन का पैमाना प्रकाश बर्ष होता है ।क्योंकि किरण की गती सबसे तेज है । एक सेकंड मे किरण लगभग डेढ लाख मील की दूरी तय करती है । सूरज से हमारी पृथ्वी पर किरणे पहुचने मे अठ मिनट लगते है । एक साल मे प्रकाश जितनी दूरी तय करता है उसे एक प्रकाश बर्ष माना जाता है । वैज्ञानिकों ने एसे तारे भी खोजे है जहां से किरण चली थी जव पृथ्वी बनी नही थी और वह किरण  अभी भी पृथ्वी तक नही पहुची है जवकी आज पृथ्वी को बने हुए लगभग ४अरब साल हो गए है । इसी से अनुमान लगाया जा सकता है की अंतरिक्ष कितना अनंत है । अंतरिक्ष मे हमारे सौर मंडल जैसे अनेकों सौर मंडल है जिनमे अनेक सूरज चंदा और पृथ्वी है । एसा वैज्ञानिक मानते है ।
अंतरिक्ष मे जीवन की खोज !
आज हमारा विज्ञान भी बहुत आगे पहुच गया है अंतरिक्ष मे गृहो की कक्षा मे अनेकों उपगृह स्थापित किए जा चुके है और यह सिलसिला जारी है । अव वह दिन दूर नही जव अंतरिक्ष मे हमारी पृथ्वी की तरह ही दूशरे इंसानी दुनियां  के गृह खोज लिए जाएगे और उनसे संपर्क स्थापित कर लिया जाएगा । आज तक की जानकारी से यह अनुमान लगता है की एलियनस की दुनिया का विज्ञान हमारे विज्ञान से बहुत आगे हो सकता है ।खेर यह तो आने वाला समय ही बताएगा की हकीकत क्या है ?
मंगल गृह पर जीवन संभव है !
 मंगल पर जीवन संभव है इस बात की घोसणा वैज्ञानिकों ने बहुत बार की है । पर इस बात को हकीकत का रूप देने मे समय लग रहा है । पिछले दिनो अमेरिका ने तो यह घोसणा कर दी थी की वह अगले साल मगल पर पर्यटको को ले जाने बाला है ।पर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जो उपगृह मंगल की कक्षा मे भेजा था वह फेल हो गया और  जानकारी के अभाव के कारण यह यात्रा भी रद्द हो गई ।
महान विचारक ओशो ने एक बार अपने प्रवचन मे कहा था की इक्कीसवी सदी तक अंतरिक्ष के किसी ना किसी गृह पर जीवन खोज लिया जाएगा । और अव ओशो की यह बात जल्द ही सच साबित होने बाली है । भले ही मंगल पर पृथ्वी जैसी  दुनिया बसाना संभव न हो पर मंगल का पर्यटन स्थल बनना तो सौ% तय है ।

बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

ग्रामीण भारत की तस्वीर ।

गांव की माटी की सुगंध _ मिट्टी  की दीवार के उपर लकड़ी और बॉस के जाल का छप्पर जिसके उपर मिट्टी के पक्के कवेलूओ की कतारो से बने मकानों का समूह गांव होता है । खडिया मिट्टी से पुते घर ' गोवर से लिपे अॉगन के कोने मै तुलसी का पौधा सोभायमान होता है । गांव की गलियों  चौवारो पर खेलते हुए बच्चे चिडियो से  चहचहाते है । सुवह सुवह  गांव के पनघट पर पानी भरती हुई स्त्रिया रंग बिरंगी साडियो मे तितलियो के झुंड के समान दिखती है ।
🍚 खान पान _  मिट्टी के चुल्हो पर लकडी की आग मे पकी रोटियां और गोवर के उवलो के अंगारे पर सिकी बाटियो के स्वाद का तो कहना ही क्या वस खाते ही जाओ । त्योहार पर बनाने वाली गांव की मिठाईयां बहुत मीठी होती है ' इनमे शक्कर ही शक्कर होती है । गांव के लोग चाय भी बहुत मीठी पीते है ' इतना मीठा खाने पर भी वे सुगर की बीमारी का शिकार नही होते क्योंकि वह श्रम का काम करतू है जिससे चीनी हजम हो जाती है ।
धर्मिकता_ गांव के लोग बहुत धार्मिक  प्रवृती के होते है । एक दुशरे से मिलते हुए राम _ राम  कहते हुए  देखे जाते है । कुछ गांवो मे सुवह राम नाम की प्रभात फेरिया निकलती है । मंगलवार  और शनिवार की रात गांव के मंदिर पर भजन कीर्तन होते है ।
☕ स्वागत _ गांव मे महमान को आज भी भगवान समझा जाता है ' उसका स्वागत चाय ' पान ' सुपाडी के साथ किया जाता है । महमानो कै भोजन मे खीर पूडी खिलाईं जातीं हैं ।

शहरों की चकाचौंध  और शोरगुल से दूर शांत दिहाती दुनिया  की ताजी हवा आदि । गाव के जन जीवन का लुफ्त कुछ निराला ही है । जो स्वाद जीभ चखती है उसे कान सुनकर  अनुभव नही कर सकते ' जो जीता है गांव की जन्नत का जीवन वही जानता है ।
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सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

समय के रूप रंग ।

समय ⌚
समय बहुत रहष्य मय कृया है । समय का असली रूप स्थर है ।दूशरे रूप मे मानव निर्मित  और प्राकृतिक समय चलायमान है । जो गोलाकार घूम रहा है । वर्तमान बीत जाने पर भूतकाल बन जाता है ' और फिर  अतीत ही रूप बदल कर भविष्य बन कर  आ जाता हैब जब से मनुष्य ने समय को पहचान है तभी से समय मुल्यवान समझा जाने लगा । फिर समय नापने के लिए घडी का अविष्कार हुआ । समय का चित्र बनाया गया '  इस चित्र मे समय मानव रूप मे पंखो बाला आकाश मे उडता हुआ दिखाया गया है और समय का मुह बालों से ढका हुआ है । इसका मतलव है की समय  अपना चेहरा छिपा कर  उडता है ।
समय का एक चक्कर एक साल मे पूरा होता है ।और  इसके बाद समय मे कुछ नया घटित नही होता फिर वही शुरू हो जाता है । जो पिछले साल हुआ था । उदाहरण के लिए जैसे पिछले साल बारिश के मोषम मे जिस दिन त्योहार था और  आकाश मे काले वादल थे 'प्राकृतिक  और मानव निर्मित  दोनो ही माहोल ठीक बैसे ही होगे जो पिछले साल थे ।
24 घंटे के चक्कर मे आदमी घडी के साथ घूमता है और हर दिन वही वही काम करता है जो उसने पिछले दिन किया था ।
आदमी के लिए समय का महत्व ।
मनुष्य के जीवन का समय बहुत अनमोल है । वर्तमान का हर छण बेशुमार कीमती है और पकडने लायक है । मनुष्य समय से पीढित प्राणी है उसके समय का स्केल जन्म से शुरू होता है और मृत्यु पर खत्म हो जाता है ' इस बीच  आदमी को जो समय मिलता है 'वह किसी भी तरह गूजारने के लिए नही है ' वल्की कुछ नया सृजन काम करने के लिए है ।
आदमी की आयु का अधिकार समय तो शरीरिक जरूरतो जैसे सोना ' खाना' पीना 'आदि मे नष्ट हो जाता है कुछ समय लोगों से मिलने जुलने मे चला जाता है कुछ समय टी वी खा जाती है । जीवन मे काम का समय बहुत कम होता है ।इसलिए समय के एक छण का भी भरपूर उपयोग करना चाहिए । जो लोग समय के मामले मे कजूस होते है सही मायने मे वही लोग चतुर  और होशियार है । एसे लोग दूशरो को धन देना पसंद करते है ' लेकिन समय देने के मामले मे बहुत बहाने बनाते है । क्योंकि वह जानते है की खोया हुआ धन दूवारा मिल सकता है पर खोया हुआ एक छण भी दुवारा लोट कर नही आता है ।
समय की चाल_  24 घंटे मे एक ही स्थान हर पल  अपना रूप बदलता है  पृ कृतिक समय । जबकी मानव के समय के कुछ छणो का समूह  एक समान ही चलता है ' फिर  अचानक दूशरे रंग रूप के छण  आ जाते है जो कुछ देर  अपना रंग दिखाते है ' फिर समय मे बदलाव  आ जाता है । पर सूरज के प्रकाश का रंग रूप हर दिन वैसा ही रहता है । एसा दिन कभी नही आता जिस दिन सूरज से हरा या गुलावी पृकाश निकलता हो  ।

सोमवार, 10 अक्तूबर 2016

रावण का प्रतीक 'दशहरा ।

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  द   श  ह   र   ।   र   ।   व    ण
रावण जैसा महामानव वलबान  और बुद्धीमान पुरुष कोई दुशरा पैदा नही हूआ ।और शायद  आगे होग भी नही ।रावण  उस युग का सर्व संपन्न राजा था । उसके पास सोने का महल  और वायूयान (पुष्पक )था ।उस समय रावण ने लंका मे जो विकाश किया उसके निशान  आज भी श्रीलंका मे है ।वहा एक भव्य मंदिर है शिव का जो रावण ने ही बनबाया था । महापंडित रावण राजनीती मे भी बहुत निपुण था ।रावण  एक वीर योद्धा था वीरो की यही पहचान है की वह झुकते नही है भले ही टूट जाए । रावण ने 'रावण सहिता 'नामक ग्रंथ  की रचना की थी  जो आज भी है ।रावण भविष्य ज्ञाता भी था जो उसके साथ हुआ वह सब  उसने पहले ही जान लिया था ।पर  उसके पास राम से युद्ध करने के अलावा और कोई विकल्प नही था अगर रावण  अन्य कोई विकल्प  अपनाता तो आज भारत मे दशहरा नही मनाया जाता ।  बुराई पर  अच्छाई की जीत का त्योहार दशहरा राम के साथ रावण की भी याद दिलाता है ।रावण भले ही बुराई का पात्र है । पर  उसके बिना रामायण अधूरी है । रावण गलत नही था वह  अलग था ।
दशहरा का मतलव है दस + सहरे यानी की दस सिर ' पर  इसका यह मतलव नही है की रावण के दस शिर थे ।नही इसका अर्थ है की दस बुद्धिमान  आदमीयों के बराबर ज्ञान रावण के एक ही सिर मे था ।यह दस सिर वाले रावण के चित्र यही समझाने के लिए उदाहरण है ।पर लोगो ने लकीर का फकीर बना दिया । हाँ यह हो सकता है की रावण मायावी था और  उसने कभी एकाध बार माया से अपना दस सिर बाला रूप बनाया होगा । पर वास्तविक सिर तो रावण का एक ही था ।
पर यह सच है की रावण का शरीर बहुत विशाल था ।एसा होना सोभाविक है । क्योंकि उस युग मे मनुष्यों के शरीर भी पूरे विकशित होते थे 'उस समय के इतिहास मे कही कही यह प्रमाण मिलते है की उस युग मे लोग 20 फिट तक लवे कद को होते थे ।और फिर रावण तो माशाहारी था तो उसका शरीर तो विशाल होगा ही । उस युग मे मनुष्यों की आयू भी बहुत लंबी होती थी हजार साल तक भी आदमी जीता था । पर  आज तक  अमर कोई भी नही हुआ रावण भी नही । जो पैदा होता है उसका मरना भी पक्का होता है ।

नं.1एंकर नीलम शर्मा ।

नीलम शर्मा📺
डी डी न्यूज चैनल की एंकर नीलम शर्मा ' जो की एक वरिष्ठ समाचार वाचक  और प्रस्तुतकर्ता है । वह डी डी न्यूज पर सन1995 से कार्यरत है ।उन्हें सन 2010 मे महिलाओ की एक संस्था ' आधी आवादी ' ने 'वूमन  एचीवर्स अवार्ड ' से सम्मानित किया है । नीलम  एक कुशल समाचार वाचक है उनकी साफ दमदार  आवाज लोगो को बहुत भाती है ।नीलम को अपने 21 साल के कार्यकाल मे कभी भी न्यूज चैनल पर कुर्ती सलवार मे नही देखा गया ' वह हमेशा भारत के पारंपरिक लिवाज साडी ब्लाऊज मे नजर  आती है ' माथे पर बिंदी गले मे मंगलसूत्र यही उनकी पहचान है । नीलम  अपने अलग  अदाज़ मे समाचार वाचन या इंटरव्यू लेती देखी जाती है । कार्यक्रम ' चर्चा मे ' को लेकर नीलम बहुत लोकप्रिय है । उनकी लोकप्रिता को देखते हुए उन्हें नं. वन  एंकर कहना शायद गलत नही होगा ।
नीलम शर्मा  डी डी न्यूज चैनल की पहचान है ।

चीनी धर्म ताओ और लाओत्से ।

चीन के त्चयु प्रदेश मे 605ईशा पूर्व लाओत्से नाम के आदमी का जन्म हुआ था । वह  एक सरकरी लाइब्रेरी मे काम करता था 'जहाँ उसने 40 साल तक काम किया । लाओत्से अपने जीवन मे बहुत ही कम बोला वह मोन जादा रहता था । कृष्ण और राम की ही तरह महाज्ञानी था लाओत्से पर  उसके पीछे कोई बडा धर्म नही बना क्योंकि उसका संदेश बहुत अलग है । लाओत्से कहता है _मे उसका नाम नही जानता 'वह 'तत'है उसे पाने के लिए कुछ करना नही है वस शून्य हो जाना है । लाओत्से पिंगलो पहाड पर जाना चाहता था अपने आप को बरफ मे गलाने के लिए पर लोग  उसे नही जाने देते थे । बताया गया है की एक यात्रा के दैरान जव लाओत्से 'क्वानयिन' के एक चुंगी नाके से गुजर रहा था तब वहां के अधिकारी ने उसे रोका और कर देने को कहा तो लाओत्से ने कहा की मेरे पास पैसे तो है नही ' लेकिन  अधिकारी ने कहा नही एसे नही जाने देगे कुछ ना कुछ तो दैना ही होगा । तब लाओत्से ने उस उस  अधिकारी को अपना ज्ञान दिया  जो उस  अधिकारी ने तीन दिन तक लिखा ' फिर लाओत्से को बासर जाने दिया।
उस  अधिकारी का नाम च्युंगत्सी था  जिसने लाओत्से के बोध बचनो को लिखा था । यह बोध बचन  आज चीन मे 'ताओ ते चिंग ' जो चीन के ताओ धर्म का ग्रंध है के  रूप मे उपलब्ध है ।इस किताव का पहल बोध बचन है की _ जिस रास्ते के बारे मे बात की जा सके वह रास्ता सनातन नही है ।ताओ पहले चीन का दर्शन था बाद मे धर्म बन गया । इसका सारा ईनाम  उस नाके के अधिकारी को देना चाहिए जिसने ज्ञान की इस संपत्ति को लुप्त होने से बचा लिया बरना आज कोई लाओत्से को नही जानता और न चीन मे ताओ धर्म होता और नाही ताओ ते चिग नाम की कोई किताव होती ।



                ताओ  ते   चिंग  और लाओत्से
 

सुर्खीयो मे 'तारिक फतेह ।

पिछले कुछ दिनो से पाकिस्तानी लेखक तारिक फतेह  भारत के न्यूज चैनलो पर नजर आ रहे है ।वह पाकिस्तान के खिलाफ आग  उगल रहे है ।और पाक की पोल खोलते हुए वहाँ के हुक्मरानो पर खूव व्यंग बॉण छोड रहे है । उनका कहना है की वह सच बोलते है ।उन्हें किसी का डर नही है । इन दिनो तारिक साहव भी मकबूल फादा हुसैन की तर्ज पर खूव सुरखी वटोर रहे है । वह बलूचिस्तान के पक्षधर है । उनके विचारो मे भारत के प्रति प्रेम है और पाकिस्तान के प्रति नफरत है । फतेह साहव नरेंद्र मोदी की बहुत तारीफ करते है ' वे लालवहादुर शास्त्री के भी फैन है । उन्हें पाक के बारे मे जो भी कहना होता है उसे बगेर लाग लपेट के दो टूक शब्दों मे कहते है ।
एक  इंटरव्यू के दोरान किसी ने तारिक से कहा की _क्या पाक मे छूपे दाऊद को घर मे घुस कर मारना चाहिए ? इसके  उत्तर मे तारिक फतेह ने कहा की आपको मारने की क्या जरूरत है ' वही के किसी आदमी को दस का नोट दो वह मार देगा । 67वर्षीय तारिक फतेह  इन दिनो भारत मे बतोर महमान है ।

तारिक फतेह  एक लेखक के रूप मे जाने जाते है । उनका जन्म पाकिस्तान के कराची शहर मे 1949 मे हुआ ।उन्होंने अपने जीवन का बहुत समय साऊदी अरब  और कनाडा मे विताया है । पाकिस्तान की व्यावस्था पर बिरोधी ब्यानो के लिए 'फतेह साहव  इस समय खूव फेमस हो रहै है ।वह बलोचिस्तान को भारत मे मिलाने पर भी जोर दे रहे है ' जो बिलकुल सही है । तारिक फतेह का हसमुख मिजाज  और  उनके क्रांतीकारी विचार लोगो को बहुत प्रभावित करते है ।सच्चाई को उजागर करने बाले एसे लोग बहुत कम होते है ।

रविवार, 9 अक्तूबर 2016

डिप्रेशन के शिकार लोग ।

इस शहर मे हर शख्स परेशान सा क्यों है ।

बच्चे संसार का भविष्य ।

बच्चे प्यारे क्यों होते है ?
बच्चे इंसानी हो या पशू पक्षियों के बच्चे सभी बच्चे बहुत प्यारे लगते है । पहले केवल नौ ही रस थे  बाद मे सूरदास ने  एक  और रस की खोज की ' वात्सल्य रस ' यह रस सूरदास को कृष्ण के बाल रूप से मिला था ।
बच्चे सभी को प्यारे होते है । मॉ बच्चों को सबसे जादा प्यार करती है ।इससे भी अधिक प्यार बच्चों को उनके दादा दादी करते है । यह कुदरत का नियम है संसार चलाने के लिए ।जब जहाँ जो जरूरत होती है उसका पूरा इंतजाम कुदरती होता है । बच्चे के दुनिया मे आते ही माँ के स्तन मे उसके लिए दूध  आ जाता है । अगर बच्चो मे मोह ना होता तो दुनिया की कोई भी माँ अपने बच्चों को दूथ नही पिलाती और बच्चे पैदा होते ही मर जाया करते जिसके कारण संसार चलना कठिन था । इसलिए बच्चे ईश्वर का मोहनी रूप होते है ।क्योंकि बाल रूप मे बच्चे असहाय और  अवोध होते है ओर  उनहे इस समय संसार मे जीने के लिए सहारे की जरूरत होती है जो मोह बस माँ करती है । जव बच्चा कुछ बडा होता है तो उसे शिक्षा की जरूरत होती है वह सीखना चाहता है । इसलिए ही बच्चे दादा दादी से कहानी सूनाने की जिद करते है ।दादा दादी भी मोह बस बच्चों को कहानी के माध्यम से शिक्षा देते है । ओर  अपनी आप बीती बच्चों को सुनाते है । जो उन्होने जीवन मे सीखा अनुभव किया वह बच्चे को बताते है । दुनिया के अच्छे बुरे का ज्ञान कराते है ।
पर जैसे जैसे बच्चे बडे होते है उन पर सबका प्यार कम होता जाता है । चिडियाँ के बच्चों की तरह चिडियाँ के बच्चे भी जव  उडना सीख जाते है और खुद ही दाना खोज कर चुगने लगते है तब चिडिया के बच्चे घोसला छोड कर फूर्र हो जाते है ।
बदला कुदरती कानून 
आज पुरुष के मुकावले स्त्रियों की संख्या का अनुपात बहुत कम है ।जिसे देखते हुए समाज  और सरकार मिल कर बेटी बचाओ आंदोलन चला रहे है । वही कुदरत ने भी अपने कानून मे बदलाव किया है संतुलन बनाने के लिए ' अब लडको से जादा लडकीयाँ पेदा हो रही है । लोग लडका पैदा होने के इंतजार मे गर्भ निरोध नही कराते और हर वार लडकी ही होती है दो तीन लडकियों के बाद फिर कही जाकर  आखिरी मे लडको के जन्म होते है ।
उदाहरण_पालतू पशुओ मे भैंस की जरूरत दूध के लिए जादा होती है । इसलिए कुदरत भी मादा भैंस को ही अधिक जन्म देती है । जबकी भैसा (पडा) बहुत कम पैदा होते है उनमे से भी बहुत मर जाते है क्योंकि उनकी जरूरत भी नही होती है ।सौ भैंसो के अनुपात मे बडी मुश्किल से दो या चार भैसा पाए जाते है । यह कुदरत का ही कमाल है ।
मन चाही सूरत का बच्चा पैदा कर सकती है माँ !

महारानी अवंतीबाई लोधी

वीरंगना रानी अवंतीबाई
प्रथम आजादी की लडाई की वीरंगना रानी अवंतीबाई लोधी ' रानी लक्ष्मीबाई और रानी दुर्गाबती की श्रेणी मे आती है ।पर  उन्हें बहुत कम लोग ही जानते है । इसका कारण  है की अवंती रानी को इतिहास मे संमान नही मिला ।लेकिन पिछ्ले दशको मे खोजी लेखको ने इतिहास के बिखरे पन्नों से रानी अवंतीबाई लोधी का इतिहास  इकट्ठा किया और रानी को समाज के सामने प्रकाशित किया है । मध्य प्रदेश के जवलपुर  आदि शहरो मे स्मारक के रूप मे रानी अवंतीबाई की प्रतिमाए स्थापित हुई है । भरतिय डॉक विभाग ने भी सन 2001 मे रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर डाक टिकिट  जारी किया था ।  मध्य प्रदेश् के शिक्षा पाठय क्रम मे भी  रानी अवंतीबाई लोधी पर  पाठ  जोडागया है ।
रानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 1831 मे मध्य प्रदेश के सिवनी जिले मे मनकेडी गाव के जमीदार जुझार सिह के घर हुआ था । उनका विवाह रामगढ (मडला ) रियासत के राजकुमार बिक्रम सिंह के साथ हुआ था । जव बिक्रम  सिंह राजा बने  तो वह धार्मिक प्रवृती के होने के कारण  अपना  समय पूजा पाठ मे अधिक लगाते थे एसी स्थित मे रानी ही राज्य सभालतीं थी उनके दो पुत्र थे ।
सन1952 मे अंग्रेजो ने. कोर्ट अॉफ  अवर्डस ' कानून के तहत राजा बिक्रम को पागल और बच्चों को नाबालिग घोसित कर रामगढ रियासत पर अधिकार करने लगे जिसका रानी ने बिरोध किया ।1954 के आसपास राजा विक्रम की स्वभाविकमृत्यू हो गई ।
सन 1858 मे अग्रेजो ने युद्ध करके रामगढ का किला पर कब्जा कर लिया ।रानी अवंतीबाई ने पढोसी राजाओ के पास शरण ले ली और जमीदारो एवं पढोसी राजाओ के साथ मिलकर  अंग्रेजो के बिरुध 'देवहागढ' युध किया । इस युद्ध मे रानी अपनी तलवार से अंत तक  अंग्रेजो को काटती रही ।रानी घोडे पर बैठकर लड रही थी ।यह युद्ध एक पखवाडा चला पर रानी ने हार नही मानी जव रानी के पास गिने चुने सेनिक ही बचे तब रानी ने समझ लिया कि अब जरूर  अंग्रेज  उसे बंदी बना लेगे । इससे पहले की रानी को दुश्मन बंदी बनाते ' रानी अवंतीबाई ने अपनी ही तलवार से वीर गती पा ली ।
मध्य प्रदेश के मंडला मे नारायणगंज के पास रानी अवंतीबाई लोधी का किला आज भी है । जो रामगढ का किला के नाम से जाना जाता है । उस समय रामगढ रियासत का विस्तार अमरकंटक तक था । अब  इस राज का बहुत सा भाग नर्मदा नदी पर बने बरगी बॉध के पानी मे डूव जाता है । 
मध्य प्रदेश सरकार इस किले को पर्यटन स्थल  का स्थान बनाकर बहुत सी बिदेशी मुद्रा कमा सकती है  । क्योंकि इस किले के पास बरगी डेम का पानी होने से इस किले की सुंदता को चार चॉद लग जाएगे ।

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

लोकगीत गायक: देशराज पटैरिया ।

बुंदेलखंडी लोकगीत संम्राट देशराज पटेरिया का जन्म मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला के गॉव 'तिटानी ' मे हुआ । वह  अपनी यूवा अवस्था से ही अपने अस पडोस के गॉवो मे भजन कीरतन के कार्यक्रम करते रहते थे ।उनकी सुरीली आवाज के कारण लोगो को उनका गायन पसंद आता था । देशराज ने अपने गुरु अमरनाथ से लोकगीत गायन सीखा । सन 1976 मे देशराज ने बुंदेलखंडी लोकगीत गाना आरंभ किया । इसके बाद  उनके गीतो और भजनो का प्रशारण  आकाशवाणी छतरपुर से होने लगा । और फिर कन्हैया केसिट कंपनी ने उनके गीतो के रिकार्ड केसिट के रूप मे बाजार मे उतारे तो कन्हैया केसिट धढल्ले से बिकने लगे ।और देशराज पटैरिया अपने गीतो को ले कर पूरे भारत मे छा गये ।

आज देशराज पटैरिया बूढे हो चुके है पर  उनकी आवाज मे अभी भी जादू है । पर  अब वह बहुत कम स्टेज सो करते है ।फिर भी नवरात्र के समय  उनके पास सेकडो आफर  आते है ।आज देशराज छतरपुर मे रहते है ' उनहे छतरपुर मे कन्हैया केसिट वालो ने मकान उपहार मे दिया है ।उनका एक मकान भोपाल मे भी है जहाँ वे कभी कभार ही रहते है ।दूरदर्शन भोपाल से उनके कार्यक्रम प्रशारित होते रहते है । उनके हर स्टेज सो मे भारी भीड जमा होती है ।यूपी और मध्य प्रदेश मे तो लोग देशराज के लोकगीतों के दीवाने है ।उन्के कार्यक्रम मे मैने खुद लंगडो को नाचते देखा है । उनका हरदोल चरित्र भजन सुन कर पत्थर दिल लोग भी रौ पडते है । और  उनके लोकगीत सुनकर बूढे भी जवान हो जाते है ' उनके चुटकुले सुनकर रोतेहुए भी हसने लगते है । देशराज के लोकगीत फिल्मी गीतों को भी पीछे छोड देते है । देशराज पटैरिया ने अपने 50 साल के गायकी के सफर मे लगभग दो सौ भजन  और बुन्देली गीत गाये है । वह सभी सुपर हिट रहे है ।

विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार ।

इस समय भारत के बाजारों मे विदेशी वस्तुओं की भारी भीड है ' खासकर चाइना की वस्तुओं की भारत के बाजार मे रोजाना अनुमानित 10778 डालर की बिक्री होती है ।चीन हर साल भारत मे लगभग 62 अरब डालर की वस्तुओं का निर्यात करता है ।जवकि भारत चीन को कुल 12 अरब डालर का निर्यात करता है । भारत एक बहुत बडा बाजार है और  आज भारत के बाजार मे चीन के माल की भरमार है ।made in china  के बने सामानो मे सबसे जादा इलेक्ट्रॉनिक आइटम है जैसे _ टेवलेट ' मोबाइल ' लैपटॉप ' टीवी ' टार्च ' झालर बाली लाइटें आदि ।अन्य वस्तुओं मे चाइना के बने कपड़े 'जूते और साथ ही गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति भारत मे बहुत पसंद की जाती है । यह सभी चीनी वस्तुएं भारत की वस्तुओं से काफी सस्ती होती है ' पर यह चीजे घटिया क्वालिटी की होने के कारण जल्दी ही खराव हो जाती है ।भारत मे चीनी माल की कोई गेरंटी बारंटी नही दी जाती ।
चीन पाकिस्तान का पक्छधर है '  इसलिए भारत के लोग चीन से नाराज़ है और  उसे सवक सिखाने के लिए चीन की वस्तुओं के बहिष्कार की मुहीम चलाले पर विचार कर रहे है । क्योंकि चीन को चोट पहुँचाने का यह  एक कारगर  उपाय है ।
विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से स्वदेशी को बढावा मिलेगा ।आगामी सालो मे मेक  इन  इंडिया के माध्यम से यह वस्तुए भारत मे ही बनने लगेगी । जिससे रोजगार के अवसर  अधिक पैदा होगे ।स्वदेशी अपनाने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी । और देश का विकास होगा ।देश का पैसा देश मे ही रहेगा ।
                                         ⌚        MADE IN INDIA👗👕👜

मंगलवार, 4 अक्तूबर 2016

भारत विरोधी बयान ।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरील ने कल  एक विडियो संदेश मे देश के खिलाफ ब्यान दिया 'की भारत सरकार को 'सर्जीकल स्टाइक ' का सबूत देना चाहिए ।उनहे सेना पर भरोसा नही ' एसा कह कर केजरीवाल पाकिस्तान को भारत पर सवाल उठाने का मोका दे रहे है जो सरासर देश हित मे नही है ।

संजय निरूपम _आज कॉग्रेस के एक नेता सजय निरूपम ने भी एसा ही देशद्रोही ब्यान टयूटर पर दिया है । उनका कहना है कि यह ' सर्जीकल स्टाइक ' फर्जी है । सरकार  इसका सबूत दिखाए ।

सलमान खान _ पिछले दिनो अभिनेता सलमान खान ने भी देश के बिरोध मे कहा था की पाक कलाकार आतंकबादी नही है ' पर  इसका सबूत नही दिया था  जवकी उन्हें देश पर मरने बाले सैनिको का दुख होना चाहिए था पर नही ' इससे जादा दुख  उन्हें विदेशी कलाकारो के जाने का हुआ ।
इन देशद्रोही ब्यानबाजो को सबक सिखाए सरकार चाहे वह मुख्य मंत्री हो या फिर कोई नाचने गाने बाला फिल्म कलाकार ।
देश  आतंकबाद से लड रहा है ' आए दिन सेना के जवान मर रहे है ।और  एसी स्थित मे लोग जो मुह मे आता है बोल देते है ' शर्म की बात है ।
 कपिल मिश्रा _ दिल्ली के एक कार्यक्रम के दोरान केजरीवाल के जल मंत्री का विवादित बयान? उन्होंने महबूबा मुख्ती से पूछा की क्या बुढानवानी आतंकी था या नही ?
ओमपुरी ःअभिनेता ओमपुरी ३ अक्टूबर को एक टीवी सो के दोरान शराव के नशे मे शहीद सैनिको के बारे मे कहने लगे की मरते है तो सेना मे जाते ही क्यों है ।ओम के इस ब्यान पर देश भर मे लोगो ने ओमपुरी के उपर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की बात कही 'एक दो जगह  उनके खिलाफ शिकायत भी लिखाई है । इस बात से घवरा कर  ओमपुरी 4 अक्टूबर को दिनभर मिडिया के सामने हाथ जोडकर बार बार माफी माग कर शरमिंदा हूए ।

चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ।

पेंटर  एम एफ हुसैन के नाम से जाना जाने बाले चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का जन्म 15 सितंवर ?1915 मे भारत के महाराष्ट्रपंढरपुर मे हुआ था ।मॉ के दिहांत के बाद हुसैन अपने बालिद के साथ  इंदोर जले गए जहाँ उन्होने स्कूली पढाई की । हुसैन शोकिया तोर पर प्राकृतिक दृश्य बनाते थे । 1935 मे हुसेन बंबई चले गए और पैसे कमाने के लिए छोटे मोटे काम करने लगे ' पर  उनका मन तो कुछ  और ही नय करना चाहता था ।हुसेन ने कुछ कलाकर  एवं चित्रकारो के साथ मिल कर  एक  आर्ट ग्रुप बनाया ' उनकी पहली चित्र प्रदर्शनी ' सुनेहरा ससार ' बम्बे आर्ट सोसाइटी मे प्रदर्शत हुई ।
इसके बाद हुसैन ने एक घॉस के मैदान की सबसे बडे आकार की पेंटिंग बनाकर  अपना नाम गिनिज बुक मे खिला लिया ।  उनकी कार पर गोपियो के चित्र बने थे । जिसे देखकर कोई भी कह सकता था की यह किसी चित्रकार की कार है ।

एम  एफ हुसैन पहली बार प्रकाश मे अए जब  उनकी चित्र प्रदर्शनी ज्यूरिख मे लगी थी । इसके बाद  उनकी प्रदर्शनी अमेरिका यूरोप  और  अन्य देशो मे भी लगी । उनकी एक पेंटिंग 16 लाख डॉलर मे बिकी थी ' अब हुसेन  बीसवीं सदी के सबसे महगे भारतिय चित्रकार बन गए थे । भारत सरकार ने एम  एफ हुसैन को 1955 मे पदमश्री और 1991 मे पदमविभूषण पुरुस्कार से नवाजा था ।
मकबूल फिदा हुसैन का एक रूप फिल्म निर्देशक का भी था ' 1967 मे उनकी फिल्म ' थ्रू दा अॉइज  अॉफ  ए पेंटर ' आई ।फिर  उनकी फिल्म ' गजगामनी ' आई जिसमे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित थी ' इसके बाद हूसेन ने दो तीन फिल्म और बनाई ।
मकबूल फिदा हुसेन को सुर्खीयो मे आने की महारथ थी ' इस कला मे हुसेन बहुत निपुण थे  ।वह बडी बडी हस्तियों के साथ नजर  आते थे ।सन 1971 के साओ पावलो कार्यकृम मे हुसेन साहब को मशहूर चित्रकार पिकासो के साथ  आमंत्रित किया गया था । उस समय  एक संस्था ने एम  एफ हुसैन को दुनिया के सबसे अधिक फेमस मुसलमानों की सूची मे सामिल किया था ।
विबाद 
1996 मे मकबूल हुसैन पर हिन्दु देवी देवताओ के नग्न चित्र बनाने का आरोप लगा ' जिसमे उनके खिलाप न्यायालय मे सौ के लगभग मामले दर्ज हुए थे । पर हुसेन खजुराहो के मंदिर का तर्क देकर किसी भी तरह बच निकले थे 
इसके बाद हुसेन  एक बार फिर समाचार पत्रो मे छपे जब  उन्होंने अभिनेत्री माधुरी के नंगे चित्र बनाने की घोषणा कर दी ।
2006 मे मकबूल फिदा हुसेन पर फिर  एक बार भारत माता का नग्न चित्र बनाने का आरोप लगा ' इस मामले से बचने के लिए आखिर हुसेन को भारत छोडना पडा और वह लदन चले गए ' फिर  उन्हें कतर की नागरिकता मिलगई  2011 तक चित्रकार  एम  एफ हुसैन ' कतर देश मे रहे । 9जून2011 को  लंदन के एक  अस्पताल मे दिल का दोरा पडने से मकबूल फिदा हुसेन की मोत हो गई । उनके बनाए गए चित्र  पिकासो की तरह कुछ हटके होते थे  इसलिए वह बिवादो मे आ जाते थे । एम  एफ हुसैन को भारत का पिकासो कहा जाता है । आज भी कलॉ के संसार मे एम  एफ हुसेन को याद किया जाता है

सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

अमिताभ बचचन का एड लोकप्रिय ।

इन दिनो टीवी चेनलो पर दिखाया जाने बाला टाटा स्कइ सेट  अप बॉक्स का विज्ञापन बच्चो और महिलायो को खूब भा रहा है । क्योंकि इस  एड मे अमिताभ कठपुतली का नाच दिखा रहे है ।
अमिताभ बच्चन के एड की लोकप्रियता से पता चलता है की भारत मे "नरेन्द्र मोदी " के बाद सबसे अधिक जाना जाने बाला अगर कोई है ' तो वह  अमिताभ बच्चन हैं । अमिताभ बच्चन को भारत की 75% के लगभग जनता पहचानती है ।
अमिताभ बच्चन का संछिप्त परिचय _
अमिताभ बच्चन का जन्म स्थान बनारस है ' उनके पिता कवि हरिबंश राय बच्चन थे ' इस समय  अमित  अपने परिवार के साथ मायानगरी मुम्बई के बॉद्रा मे रहते है । उनकी पत्नी जया बच्चन झीलों की नगरी भोपाल की है ' जो कभी झील के कमल की तरह खिलती हुई अदाकारा थी अब राजनीत मे है । उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी अभितेता है । बहू एशवरिया राय जो एक समय दुनिया की सबसे सुन्दर स्त्रियों मे गिनी जाती  थी  और  अच्छी अभिनेत्रियों मे भी ' अमित की पोती आराध्या है ।
अमिताभ बच्चन  आध्यात्मिक विषय मे भी रूची रखते है । वे ओशो से बहुत प्रभावित है ।एक जमाने मे अमिताभ भारत के भूतपूर्व प्रधान मंत्री राजीवगाँधी के अच्छे मित्र थे  ' उनकी दोस्ती अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के साथ भी गहरी रही है ।उसी दोर मे इस जोडी की फिल्म दोस्ताना आई थी । अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्मों मे सबसे लोकप्रिय फिलमे दीवार ' शहनशाह ' शोले ' कुली ' आज का अरजुन ' बागवान प्रमुख है ।
अमिताभ बच्चन  इटरनेट पर भी एक ब्लॉगर है उनका ब्लॉग इग्लिश मे है ।अमिताभ बच्चन की सबसे बडी विशेषता यह है की इस दोर की पीडी भी उन्हें उतना ही पसंद परती है ' जितनी पुरानी पीढी करती थी और करती है ।

अमिताभ बच्चन को एड मे देखकर  एक 80 साल का बूढा कहता है _ अरे यह बूढा अभी भी नाच रहा है !

लव मेरिज ।

love 💏
प्रेम करना पाप नही है । पर प्रेमी के साथ शादी करना जरूरी नही है ।

नवरात्र मे ध्वनि प्रदूषण ।

नवदूर्गा  के आते ही ध्वनि प्रदूषण तेज हो जाता है ।जो दस दिन तक लोगों की रातों की नीद हराम करता है ।  हर झाँकी पर लाऊडस्पीकर लगे होते है जिन पर दिन रात भनन के रिकॉर्ड बजते है ।जिनसे निकलने वाली तेज ध्वनि तरंगों के कारण लोगों का ध्यान भटकता है 'विचार विषय का शोध नही कर पाता ' जिससे लोगों को काम काज के निर्णय लेने मे कठिनाई होती है । लोगों को आपसी संवाद मे भी बाधा महसूस होती है । झॉकियो पर लगे माइक की तेज  आवाज से बच्चों की पढाई भी बहुत प्रभावित होती है । कुछ दुर्गा झॉकी पर तो बडे बडे डी जे साऊड बजते है ' जिनसे निकलने बाली तेज  आवाज कान फोडती है । इस  आवाज का असर नवजात बच्चों के कान पर बहुत घातक हो सकता है ।
रवरात्र मे होने वाले ध्वनि शोरगुल के बिरोध मे आवाज उठाने पर स्थानिय दुर्गा उत्सव समीतियॉ चढ बेठती है ' उनका कहना होता है की हमारी आस्था पर ठेस पहुचाई जा रही है ।
पर धर्म की आड मे रात दिन लगातार तेज  आवाज मे माइक बजाने की मनमानी सरासर गलत है । इस विषय पर कडे नियम  कानून  लागू होने की जरूरत है । नियम  अनुसार रह झॉकी पर सुवह शाम  एक  एक घंटे पूजा आरती के समय पर ही माइक बजना एलाऊड होना चाहिए । सही मायने मे वही धार्मिक कार्यक्रम सही होता है जिससे दूशरो को असुबिधा नही होना चाहिए ।
          
                                       🌹🌹   "जय दुर्गे ' जय  अम्बे "🌹🌹

रबर बलून विजनस 500₹ से शुरू ।

गु व्वा रे 🎈💃 रबर बलून से तो सभी परिचित है जिनहे फुग्गा और गुब्बारा भी कहा जाता है । हम सभी ने अपने बचपन मे जरूर गुब्बारे खेले होगे ।गुब...