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December, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

असली और नकली गॉधी परिवार ।

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महात्मा गांधी के परिवार के बारे मे बहुत कम लोग जानते है ।अभी भी कुछ ग्रामीण जन तो यह समझते है की महात्मा गांधी की कोई संतान ही नही थी । और कुछ लोग जिनकी पहुच  इंटरनेट तक नही है वे इंदरा गांधी को ही बापू की पुत्री समझते है ।
मोहनदास गाधी का असली परिवार ।
महात्मा गांधी यानी मोहनदास गांधी की पत्नी कस्तूरवा गांधी थी । और  उनके चार पुत्र थे 'हरीलाल गांधी ' रामदास गांधी ' देवदास गांधी 'और मणिलाल गांधी । हरीलाल महात्मा गांधी के बडे बेटे थे । जो इतिहास मे बदनाम है ।कहा जाता है की हरीलाल गाधी शराबी थे । विकीपेडिया पर हरीलाल गांधी का फोटो है जिसे देखकर यह  अंदाजा लगता है की यह  अदमी नशे मे है ।  हरीलाल  इंग्लैंड जाना चाहते थे उच्च शिक्षा के लिए और बापू की तरह ही बकील बनना चाहते थे ' पर बापू ने उन्हें एसा करने से रोका था । जिससे हरीलाल कुंठित होकर बापू के कट्टर बिरोधी हो गए । बापू भी हरीलाल को अपना पुत्र नही मानते थे । बापू ने एक पत्र मे लिखा था की हरीलाल तुम मुझे सच वताओ क्या तुम  अभी भी शराव  और व्यभिचार मे लिप्त हो यदि एसा है तो मे चाहता हू की तुम मर जाओ । हरीलाल गांधी ने …

MP के पूर्व CM सुंदरलाल पटवा का निधन ।

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को दिल का दौरा पडने से बुधवार 28 दिसंबर 2016 को उनका निधन हो गया वह 92 साल के थे ।
सुंदरलाल पटवा का जन्म 11 नवंबर 1924 मे मंदसौर जिले के कुकडेश्वर गांव मे हुआ था । 1942 मे पटवा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुडे थे । इसके बाद वह संघ प्रचारक रहे । फिर वह दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने ' 1998 में पहली बार  एवं 1990 से 1992 तक दो साल वह दुशरी बार मुख्यमंत्री रहे । 1997 मे सुंदरलाल पटवा दो साल  अटलविहारी की सरकार मे मंत्री पद पर रहे । बीसवीं सदी मे अटलविहारी के समकालीन नेताओं मे सुंदरलाल पटवा BJP के बहुत प्रभावशाली नेताओं मे से एक थे ।
सुंदरलाल पटवा ने मध्य प्रदेश मे अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान बहुत विकास के कार्य करवाए । भोजपुर बिधानसभा क्षेत्र मे आनेवाले गोंड आदिवासीओ के साडे बारह गांव जो अति पिछडे थे उन्हें पटवा ने गोद लिए और  इन गांवो मे स्कूल वनवाए 'पक्की सडक बनवाई और  इन गांवों को विकाश की धारा से जोडा पटवा के योगदान से यह जंगली गांव प्रकाश मे आए । सुंदरलाल पटवा को साडे बारह गांव की जनता कभी भूल नही पाएगी ।

काश अगर मे दर्पण होता ।

काश अगर मे दर्पण होता ' सबको मेरा सर्मपण होता ।

         मेरा कोई रंग न होता ' मेरा कोई रूप न होता
        मे एक खाली चोखटा होता । काश  अगर____

                         बाजार मे दुकान पर बिकता 'मकान मे दीवार पर लगता
                         कोरा काँच का तुकडा होता 'काश  अगर ________


                                             सुंदरी देखतीं मुझमे अपनी सूरत 'मे देखता उनमे अपनी मूरत
                                             एसा खुशनशीव होता । काश अगर ______________



                                                                   मुझमे अपना चहरा देखता हर सक्श ' मे खीचता उनका अक्श
                                                                   एसा नक्शा नफीज़ होता ।काश अगर ________________


सुहागिन के श्रृंगार का 'दुल्हन के उपहार का
मे सत्रहाबा सामान होता । काश अगर ____________


                             भले बुरे सब मुखडे देखता ओर दिखाता ' काले गोरे मे भेद न करता
                               सच्चाई का सवूत होता । काश अगर_____________

           …

ग्रामीण विकास मे स्कूल व पंचायतो की भूमिका ।

केंद्र व राज्य सरकारे ग्रामीण विकास के लिए बहुत प्रयत्नशील है । सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए अनेक योजनाए संचालित की है । फिर भी गॉवो का विकास बहुत धीमी गती से हो रहा है । अंतिम छोर पर खडे गरीब गॉव के मजदूर तक सरकारी योजनाओ का लाभ ना के बरावर ही पहुच पा रहा है ।
ग्रामीण जन जीवन और जीवन शैली ।
देश दुनिया मे इतना विकाश होने पर भी आज ग्रामीण जन  आज दो हजार पुरानी जीवन शेली मे जी रहे है । कच्चे मकान ' मिट्टी के चुल्हे चोके '  चिराग ' चक्की ' ओखली ' अलाव सबकुछ वही पुराना है ।पुराने जीवन मुल्यो पर  आधारित है गॉव का जीवन । कृषि एवं पशूपालन के सहारे ही चलतीं है गॉव की जिंदगीयां ' ग्रामीण क्षेत्रो का वाहरी परिवेश भले ही आधूनिक दिखता है । पर भीतर से गॉव का जन जीवन अंधकार और  अंधविश्वास से भरा है । पुराने रीति रिवाज ' पुरानी भाषा बोलियां ' पुराना धर्म और परंपराए ग्रामीण जीवन मे जड जमाए हुए है । सही मायने मे ते ग्रामीण जन जीवन मे नये आधूनिक समाज का जन्म ही नही हो रहा है ।
ग्रामीण शासकीय स्कूल _ शिक्षा का अभाव गॉवो के विकास मे सबसे बडी बाधा है । दिहाती इलाकों मे सरका…

डिजिटल लेनदेन पर करोडो रू इनाम देगी सरकार ।

ग्रामीण  इलाके मे डिजिटल भुगतान को बढावा देने के लिए ' भारत सरकार ने 15\12\2016 को दो बडी इनामी योजनाओ की घोषणा की है । यह योजनाए 25 दिसम्बर से लागू होगी और 14 अप्रैल तक चलेगी । इस 100 दिन की अवधि मे डिजिटल लेनदेन करने वले ग्रामीण जनो को रोजाना सरकार 15 लाख रू इनाम देगी ।
भाग्यशाली ग्राहक योजना _ इस योजना के अंतर्गत जो गॉव के लोग चार तरीको से डिजिटल भुगतान करेगे इनमे रूपे कार्ड' यूपीआई एप ' यू एस एस डी ' आधार समर्थित भुगतान सामिल है । इन तरीको से 50 रू से लेकर 3000 रू तक के डिजिटल भुगतान करने वालो को ही इनाम मिलेगा । पूरे भारत के ग्रामीण  इलाको के 15 हजार लोगो का चयन होगा रोजाना 100 दिन तक जिनमे से हर  एक को हजार हजार रू इनाम मे दिये जाएगे । इसके अलावा हर सप्ताह सरकार लकी ड्रा निकालेगी जिसमे 7000 विजेताओ का चयन कर  उन्हें पाँच हजार  एवं दस हजार के इनाम दिये जाएगे । यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रो के लिए ह है 'जिसमे विक्रेताओ एवं सरकारी एजेसियो को किया जाने वाला डिजिटल पेंमेंट ही शामिल होगा । इनाम की रकम सीधे विजेताओ के बैक खातो मे जमा होगी । इस योजना के अंतर्गत एक ग…

गडे धन की पहचान ।

राह किनारे चोराहो तिराहो पर स्थापित देवो के पीछे क्या उद्देश्य होगा । यह मूर्ती पूजा के बिरोध की बात नही है । देवी देवताओं की स्थापना प्रण प्रतिस्ठा के साथ होती है ' जिसमे बृहम्ण मंत्र  उच्चारण के साथ हवन विधि संपन्न करते है । इसके बाद ही देवी देवता पूजा योग्य माने जाते है । पर रास्तो के किनारे स्थापित इन साधारण पत्थरो की प्रण प्रतिस्ठा किसने की होगी । न तो यह कलॉ कृतियॉ है और न  इनके नाम देवी देवताओ से मेल खाते है । तो फिर इनहे पूजना कहॉ तक सही होगा ।
इन देव स्थानो की स्थापना के बारे मे पुराने लोग बताते है कि पुराने जमाने मे चॉदी की मुद्राए चलती थी ।और  उस समय बंजारे व्यापारी व्यापार करते थे । व्यापार के दोरान जब  इन बंजारो के पास  अधिक धन  इकट्ठा हो जाता था तब  उनहे इतना सारा धन साथ लेकर चलने मे कठिनाई होती थी । क्योंकि इसमे बजन भी होता था और इसके रखरखाव मे सिक्के खनकते भी थे जिससे लुटने का डर भी होता था । इसलिए यह बंजारे इस धन को रास्ते के किनारे किसी पेड़ के नीचे जमीन मे गाड कर रख देते थे और  उस स्थान के ऊपर पहचान के लिए पत्थर रख देते थे । यह  उनकी तरकीव होती थी । दूसरे राहगी…

नए सामुदायिक रेडियो स्टेशनो को 90% अनुदान ।

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केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 10 दिसंबर 2016 को ' नए सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोलने बालो को बडे अनुदान की घोसणा की है ।जिसमे पूर्व उत्तर प्रदेशो के लिए 90% एवं अन्य प्रदेशो मे 75% अनुदान सरकार देगी ।
सामुदायिक रेडियो क्या है ।
सामुदायिक रेडियो जिसे अंग्रेजी मे 'कम्यूनिटि रेडियो ' कहा जाता है ।यह रेडियो सेवा आकाशवाणी ' एवं एफएम चैनल के बाद तीसरे नं की रेडियो सेवा है । सामुदायिक रेडियो के प्रशारण का दायरा सीमित होता है । सामुदायिक रेडियो की स्थापना लाभ कमाना नही है ।वल्कि सामुदायिक रेडियो शिक्षा और ज्ञान देने पर  आधारित होते है ।सामुदायिक रेडियो एसे समुदाय और संस्थाओ के दुवारा संचालित होते है जो जनहित मे कार्य करते है ।जैसे शिक्षण संस्थान ' स्यंम सेवी संगठन 'कृषि विज्ञान केंद्र आदि जो कृषि स्वास्थ्य शिक्षा आदि जन कल्याण के लिए काम करते है ।
सामुदायिक रेडियो का आरंभ ।
अमेरिका मे सामुदायिक रेडियो का आरंभ 1940 मे हुआ ।और ब्रटेन मे इसकी शुरूवात 1960 मे हुई ।
भारत मे पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन 1995 मे खुला था । जिसे चिन्नईं के अन्ना विश्वविधालय ने शुरू…

डिजिटल मनी का आवाहन ।

देश मे अभी नोटबंदी का हू हल्ला थमा नही की भारत सरकार ने डिजिटल मनी का आवाहन कर दिया । नगदी रहित लेनदेन का मतलव है 'डिजिटल मनी 'यनी अब लोगो को नगदी रखने की जरूरत नही है ।इसके स्थान पर केवल रूपयो की संख्या पे करने का अधिकार लोगो को अपने पास रखना है ।वस्तू खरीद और सेवा के भुगतान के रूप मे यह  अधिकार किसी को भी दिया जा सकता है ।एवं लिया भी जा सकता है । डिजिटल मनी का उपयोग पारदर्शी सरल  और सुरक्षित तरीका है । इस तरीके से लोग घर बैठे दुनिया के किसी भी स्थान पर रूपयो का लेनदेन  आधा मिनट मे कर सकते है। डिजिटल मनी के चलन से देश की अर्थव्यावस्था वेग गती से चलेगी 'और देश भी इसी गती से विकास के पथ पर  आगे बढेगा । डिजिटल भुगतान के चलन से लोगो को नगदी के बोझ से मुक्ति मिलेगी 'साथ हीनगद मुद्रा के रखरखाव  और  उसकी सुरक्षा आदि से भी निजात मिलेगी । कुलमिलाकर देश मे डिजिटल मनी के चलन से लोगो को फायदा ही फायदा है । लोगो को डिजिटल मनी से डरने की जगह  इसका स्वागत करना चाहिए ।और डिजिटल भुगतान के तरीको को सीखकर  इन्हे जलन मे लाना चाहिए ।
डिजिटल मनी का रूपरंग _डिजिटल मनी का कोई रंग रूप नही है …

चरोटा का बहूउपयोगी पौधा ।

चरोटा सीजल पीनेसी कुल का पौधा है ।इसका वैज्ञानिक नाम केशिया टोरा है । इसे चकोडा और पुवाड भी कहते है ।विदेशो मे इसे 'इंडियन लेवरनस ' के नाम से जाना जाता है ।
निर्यात के लिए प्रतिबंधित है चरोटा ' निर्यात के लिए प्रतिबंधित लगभग 50 पौधे एसे है जिनहे महानिदेशक विदेश वयापार दुवार  इन पौधो के व्यापार और निर्यात की अनुमति तभी होगी जव  इनहे खेती करके पैदा किया जाए ।
चरोटा भारत के अधिकांश प्रदेशो मे पाया जाता है ।इसके पौधे बरसाती मोषम मे जंगलो और खाली मैदानो मे भारी उगते । यह पौधा बिलकुल मैथी के पौधे के समान होता है । चरोटा के पौधे पर पीले रंग के फूल लगते है 'इसकी लंबी फलियॉ होती है जिनमे मैथी जैसे बीज निकलते है ।
चरोटा बहूउपयोगी पौधा है । जो मनुष्य के लिए कुदरत की अनमोल देन है । जिसके निम्नलिखित उपयोग है ।

चरोटा के बीज की गिरी का उपयोग कॉफी बनाने मे होता है ।इसके बीज कडवे होने के कारण कॉफी का स्वाद बढाने मे सहायक होते है ।चरोटा के बीज मे पाए जाने वाले गोद नुमा पदार्थ से पान मशाले बनाए जाते है ।और यह गम बनाने मे भी उपयोग होता है ।चरोटा बीज पाऊडर का स्तमाल  अगरबत्ती बनाने मे बहुत …

सेन्ट्रल बैंक की एक महाभृष्ट साखा ।

हम आपको सेन्ट्रल बैंक अॉफ  इंडिया की एक  एसी साखा की जानकारी दे रहे है । जिसके बारे मे जानकर  आपको आश्चर्य होगा की देश मे इस तरह की बैके भी है ।
सेन्ट्रल बैक की यह साखा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की सुल्तानपुर तहसील के पास गॉव  'ईटखेडी ' मे स्थित है ।इस बैंक ब्रांच के अधिकंश ग्राहक  अनपढ गोड  आदिवासी है जो वन  अंचल के ग्रामीण है ।इसलिए यह बैंक  इन लोगो का भरपूर  शोषण कर रही है ।इस बैक मे लोगो को बैठने तक की कोई उचित व्यावस्था तक नही है ।लोग बैक के बाहर धूप मे खडे रहते है उपर से बैक वाले इन लोगो कू साथ बदतामीजी भरा बरताव करते है ।चपरासी से लेकर बीसी और केशियर यहा तक की बैक मेनेजर भी भृष्ट है ।इस बैंक मे लोगो का कोई भी काम बगेर रिस्वत लिए नही किया जाता है ।यहाँ तक तो ठीक ही है पर  इस बैंक के कुछ खातेदार तो एसे है जिनहे उनका खाता नं तक पता नही है 'बैक वालो ने जानबूझकर  इन लोगो को उनका खाता नं नही दिया है पासबुक देने की बात तै दूर है ।इह तरह के ग्राहको मे अधिकतर बृधा पेशन भोगी है । जिनकी पेशन का सारा रुपया बैंक कर्मचारी डकार रहे है ।बृध्दजन  अपनी पेंशन लेने बैंक जाते है तो बै…

कैरोसीन का दुरुपयोग ।

कैरोसीन ' घासलेट ' मिट्टी का तेल ' जिसे गॉव की भाषा मे चिमनी का तेल भी कहा जाता है । यह तरल  ईधन कुछ साल पहले घरेलू ईधन के रूप मे उपयोग किया जाता था । इसका उपयोग स्टोव  और चिराग जलाने मे होता था । पर  अब समय के साथ स्टोव  और चिराग लुप्त हो गए है ।अब  इनके स्थान पर गैस चुल्हे और बल्ब आ गए है ।और  अब घरों मे मिट्टी के तेल की कोई उपयोगिता नही रही ।
सरकारी उचित मूल्य की दुकानो पर राशन के साथ मिलने वाले कैरोसीन की कालाबाजारी होती है ।यह कैरोसीन  उचित मूल्य की दुकानो से ही रातो रात थोक मे बिक जाता है ।किसी किसी महिने राशन कार्ड पर भी कैरोसीन लोगो को मिलता है ' जिसे लोग  अपने घरो मे स्टोर करके रखते है और फिर  इस कैरोसीन को लोग दुगने दामो पर ट्रेक्टर बालो को बेच देते है । इस सारे कैरोसीन का दुरुपयोग ट्रेक्टरो और पानी के पंप चलाने मे होता है । कैरोसीन किसानो को बिलेक मे भी डीजल से आधे रेट पर मिल जाता है ।डीजल के मुकावले मे कैरोसीन ट्रेंक्टरो और पानी के पंपो मे थोडा जादा जरूर जलता है फिर भी किसानो को कैरोसीन से पंप  आदि चलाने मे फायदा होता है ।
घरो मे मिट्टी के तेल का दुरुपयोग  …

जनधन खातो मे रूपये जमा करेगी सरकार ।

जन धन खातो मे सरकार रूपये जमा करेगी । यह सपना सजोए बैठी है भारत की गरीब जनता 'क्योंकि लोकसभा चुनावो के दोरान BJP ने भारत की जनता से एसा कहा था कि हमारी सरकार आने पर हम विदेशी बैंकों मे जमा भारत का काला धन बापस लाएगे और हर भारत वासी को 15_15 लाख रूपये देगे । इस लालच मे आकर भारत की जनता ने BJP को भारी वोट दिये थे । और केंद्र मे भजापा की सरकार बनी मोदी PM बने । इसके बाद PM मोदी ने जब जन धन योजना चलाई तो लोगो को यह भरोषा और पक्का हो गया की अब सरकार गरीबो को धन लाभ देने वाली है इसलिए जन धन योजन मे लोगो के खाते खुलवाए जा रहे है । और गरीबो ने जनधन योजना मे भारी मात्रा मे खाते खुलवाकर रिकार्ड बना दिया । अब जब विदेशी काला धन भी भारत मे वापस  आ गया और नोटबंदी से देश का काला धन भी ऊपर  आ गया जिससे सरकार के पास  आय कर के रूप मे भी काफी धन  आया है । अब लोगो को पक्का यकीन है की अब भारत सरकार गरीब लोगो के जनधन खातो मे रूपये जरूर जमा करेगी । चाय पान की दुकानो और गॉव के चोवारो पर यह चर्चा हो रही है । कोई कह रहा है की 50000 रू जनधन खातो मे आएंगे ' तो कोई 15_15 हजार रूपये बता रहा है । लोगों का …

मोवाइल से पेमेंट करने के आसान तरीके ।

नोटबंदी के बाद भारत सरकार ने देश मे मुद्रा रहित लेनदेन के चलन को बढावा देने के लिए प्रयासरत है ।आज हर काम  अॉनलाइन होते जा रहे है । एसे मे डिजिटन मनी का चलन भी जरूरी है ।मुद्रा रहित लेनदेन बेहद  आसान है ।वस्तुएं और सेवाए लेने के बदले मे नगद रूपयो के स्थान पर क्रेडिट कार्ड और डेविट कार्ड से पेमेंट करने का चलन बहुत तेजी से बढ रहा है ।
📱 मोवाइल बैंकिंग _ यह मोवाइल से रूपये के लेनदेन का तरीका है ।जिससे हम  अपने बैक खाते मे जमा रूपये  घर बैठे किसी दूशरे ब्यक्ति के बैक खाते मे भेज सकते है ।मोवाइल से रूपये ट्रास्फर करने के प्रमुख्य तीन तरीके इस प्रकार है 1. USSD  सेवा 
2.UPIऐप
3. E _ वॉलेट
Ussd सेवा _ नेशनल यूनीफीड ussd प्लेटफार्म ' यह मोवाइल से रूपये भेजने का सबसे आसान तरीका है । जैसे हम  अपने मोवाइल का वैलेंस  आदि देखते है बिलकुल  उसी तरह से पैसे भेजने का तरीका है ।सबसे पहले अपने बैक खाते मे रजिस्टर मो . नंबर से *99# डायल करे और कॉल का बटन दबाए ।अब  एक सदेश  आता है जिसे ओके करना होता है इसके बाद दुशरे संदेश मे अपने बैक का नाम भरकर सेड करना होता है ' तीसरे संदेश मे सात विकल्प आते है …