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सब्जी के खर्च की पूरी बचत ।

सब्जियों पर होने वाले खर्च की पूर बचत कैसे करें ।
बडे बूढे बताते है कि आज से 60_70 साल पहले भारत के गांवो मे साख सब्जियों का व्यापार नहीं चलता था ।सब्जी जैसी साधारण चीज़ को व्यापार की वस्तु ही नही समझा जाता था । उस समय गाँव दिहातो मे न तो कोई सब्जियां बैचता था और न कोई खरीदता था । इसका मतलब यह नही है कि उस जमाने मे लोग सब्जियां नही खाते थे ' वल्कि उस समय  आज से जादा पोषक सब्जियां भरपूर खाईं जातीं थी 'और मुफ्त मे उपलब्ध होतीं थीं । उस जमाने मे गाँव के लोग अपनी जरूरत के लिए साख सब्जियां खुद ही पैदा करते थे ।गाँव के हर घर मे कुछ न कुछ सब्जी जरूर लगी होती थी ' किसी घर के आँगन के कोने मे सेम या तुरई की बेल होती थी तो किसी घर के पिछवाडे बेंगन के पौधे लगे होते थे ।एवं गाँव के चौराहों के किनारे सहजन के सार्वजनिक पैड होते थे । इस तरह गाँव के लोग आपस मे एक दुशरे पडोसी से मुफ्त मे सब्जियों का आदान प्रदान करके काम चलाते थे । सब्जियों की सिंचाई घर के स्नान घर के पानी से होती थी । केवल गरमी के मौसम मे थोड़ी सी सब्जी की परेशानी होती थी । तव  अरहर ' मूग ' मसूर ' आदि की दालों से…