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भोजन का रहष्य ।

भोजन आदमी की पहली जरूरत है ।ईश्वर चाहता तो वह मनुष्यों को बगेर भोजन के मी जिला सकता था जैसा की सांडा जानवर हवा पीकर जीता है ।पर  ईश्वर ने अपने सबसे उत्तम प्राणी आदमी को भी कुदरत के संचालन मे भागीदार बनाया । आदमी सोचता है की वह भोजन करता है ।जवकी यह सच नही है भूख कुदरती पैदा होती है और भोजन भी कुदरत ही कराती है ।आदमी को 12 घंटे के लिए भोजन  उधार देती है कुदरत फिर बापस ले लेती है । आदमी को केवल मुह मे भोजन के जीभ से छूने का सुखद  अहसास होता है जिसे म स्वाद कहते है ।
मनुष्य भी अन्य पशु पक्षीयो की तरह कुदरत का ही काम करता है वह पेड पौधों के लिए खाद  और कॉर्बनडाइ अॉक्साइड बनाता है । मैने पढा है की एक राजा हुआ था जो केवल स्वाद के लिए ही भोजन खाता था वह दिन भर कुछ ना कुछ स्वादिष्ट चीजे खाता ही रहता था और फिर  औषधिया खाकर  उलटी कर देता था ।वह जल्दी मर गया था ।आदमी को भोजन भी मारता है और भूख भी मारती है । इसलिए आदमी को केवल जीने के लिए भोजन करना चाहिए नाकी भोजन करने के लिए जीना चाहिए ।
आम तोर पर भोजन तीन प्रकार के होते है । सात्विक ' राजसिक  और तामसिक भोजन ' सात्विक भोजन फलाहार होता ह…