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गडे धन की पहचान ।

राह किनारे चोराहो तिराहो पर स्थापित देवो के पीछे क्या उद्देश्य होगा । यह मूर्ती पूजा के बिरोध की बात नही है । देवी देवताओं की स्थापना प्रण प्रतिस्ठा के साथ होती है ' जिसमे बृहम्ण मंत्र  उच्चारण के साथ हवन विधि संपन्न करते है । इसके बाद ही देवी देवता पूजा योग्य माने जाते है । पर रास्तो के किनारे स्थापित इन साधारण पत्थरो की प्रण प्रतिस्ठा किसने की होगी । न तो यह कलॉ कृतियॉ है और न  इनके नाम देवी देवताओ से मेल खाते है । तो फिर इनहे पूजना कहॉ तक सही होगा ।
इन देव स्थानो की स्थापना के बारे मे पुराने लोग बताते है कि पुराने जमाने मे चॉदी की मुद्राए चलती थी ।और  उस समय बंजारे व्यापारी व्यापार करते थे । व्यापार के दोरान जब  इन बंजारो के पास  अधिक धन  इकट्ठा हो जाता था तब  उनहे इतना सारा धन साथ लेकर चलने मे कठिनाई होती थी । क्योंकि इसमे बजन भी होता था और इसके रखरखाव मे सिक्के खनकते भी थे जिससे लुटने का डर भी होता था । इसलिए यह बंजारे इस धन को रास्ते के किनारे किसी पेड़ के नीचे जमीन मे गाड कर रख देते थे और  उस स्थान के ऊपर पहचान के लिए पत्थर रख देते थे । यह  उनकी तरकीव होती थी । दूसरे राहगी…