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बालू रेत के रंगीन पत्थर ।

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नदियों की बालू रेत मे पाए जाने वाले चमकदार  और रंगीन पत्थर सबका मन मोहते है खासकर बच्चों के लिए तो यह रंगीन पत्थर हीरे मोती के बराबर होते है ।हम भी जब कभी नदियों मे नहाने जाते है और नरम रेत पर बैठते है तब हम भी इन पत्थरो से प्रभावित होकर सुन्दर सुन्दर चमकीले पत्थर चुन चुन कर बीनने बटोर कर  इकट्ठा कर लेते है ।फिर जब हम घर चलने लगते .है तो मन करता है की हम  इन पत्थरो को अपने साथ रख ले पर फिर सोचते है की आखिर हम  इन पत्थरो को घर लेजाकर क्या करेगे और पत्थरो को नदी मे ही छोड  आते .है ।
कुदरत की इस अनुपम कलॉ कृति "बालू रेत के रंगीन पत्थरो " का अगर  उपयोग किया जाए तो मकानों की दीवारो और फर्श की सजाबट के लिए यह पत्थर बडे काम की चीज है । लोग मकान बनाने के लिए बालू लाते है और  उसमे से इन रंगीन पत्थरो को छान कर  बेकार समझकर फेक देते है । अगर सूझबूझ से इन पत्थरो का उपयोग मकान की दीवारों पर कलॉ कृतियॉ बनाने मे किया जाए तो इन रंगीन पत्थरो का सद  उपयोग होगा । अभी तक तो रेत ले निकले रंगीन पत्थरो का उपयोग सीमेंट की टाइलस बनाने मे किया जा रहा है ।इसके अलाबा इनका कही कोई विशेष उपयोग नही होता …

नाम बडे और दर्शन छोटे ।

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हिंदुस्तान मे हिन्दुओ के देवी देवताओ की एक बडी संख्या है । हिन्दुओं के अनुसार हिन्दु धर्म के कुल 33 करोड देबी देवता है । भारत मे मंदिरो की भी कमी नही है । हर गॉव मे दो चार मंदिर होते है । शहरो मे तो भारी लागत से बडे बडे मंदिर बनाए गए है तीर्थ स्थानो पर तो शाहर मे जितने मकान होगे उन्से कुछ ही कम मंदिर होगे । पहाड़ों की चोटियो पर मंदिर बने है । जिन्है देखने के लिए लंबी चढाई चढना पडता है ।कुछ फेमस मंदिरो के सामने तो हमेशा भारी भीड़ होती है ।जिसे देखकर लोग सोचते है अगर  इतनी संख्या मे लोग मंदिर देखने आते है तो जरूर भीतर कुछ चमत्कार होगा पर जब  भीतर जाकर देखते है तो पाते है वही साधारण सी मूर्ती है जो हमारे गॉव के मंदिर मे होती है ।मंदिर भी उसी ईंट पत्थर सीमेंट से बना है जिससे सभी मंदिर बने है ।कुल मिलाकर दूर के ढोल सुहाने होते है ।

सुपरहिट गाने ।

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पुराने दोर से लेकर  आज तक के सबसे सुपरहिट गाने जो दिल को छू  जाते है और हमे प्रेम की गंगा मे बहाकर प्रेम के सागर मे डूबा देते है । तो आइए हम भी डूबे  प्रीत के इस सागर मे और महसूस करे अपने अपने प्यार के अहसास को  ।

बीमार पर रिस्तेदारों की मार ।

हमारे समाज मे ब्यक्ति का बीमार होना किसी गुनाह से कम नही है ! क्योंकि हमारा समाज  इसकी कडी सजा देता .है ।     आइए जाने कैसे ।
जब भी कोई बीमार होता है तो सबसे पहले तो डॉक्टर उसकी बीमारी को बढा चढा कर बताता है और मरीज को वा उसके परिवार बालो को डरा कर खूब पैसा खीचता है । पहला नुकसान तो ब्यक्ति का काम पर न जाने का होता है बीमारी के कारण ' दुशरा नुकसान इलाज पर रूपए खर्च होने का होता है । तीशरा परिवार का एक सदस्य  और काम पर नही जा पाता वह मरीज की सेवा मे रहता है । चौथा नुकसान बीमार  आदमी को देखने आने बाले करते .है दोस्त यार नाते रिस्तेदार बीमार  आदमी को देखने आते है । क्योंकि पता नही फिर वह देखने को मिलेगा या नही । मरीज के घर की औरते मरीज को देखने आने वाले महमानो के चाय नास्ते मे ही लगी रहती है । भारत के दिहाती इलाको मे अगर किसी को साधारण बुखार भी आ जाता है और  इसकी भनक रिस्तेदारो को लग जाती है तो वह  उसे देखने जरूर  आते है आखिर रिस्तेदार होते किस लिए है सुख दुख मे साथ रहने के लिए ही ना । बीमार  आदमी को आराम की जरूरत होती है पर दर्शनाथियो की भीड बीमार  आदमी की तबियत  और खराब करती है ।

बोलो तो बात बने ।

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चुप रहने से कुछ ना होगा ।
बोलो तो बात बने ।
मन की बात जुवा पर ना लाने कुछ ना होगा ।
मुह खोलो तो कुछ पता चले ।
अंजाम के डर से खामोस रहो तो कुछ ना होगा ।
हिम्मत से बोलो तो अंजाम मिले ।
बोलने से पहले ही मत सोचो जबाव न होगा ।
बोलकर तो देखो जबाव हॉ मिले ।
बोलने कीआजादी है बात कहना गुनाह न होगा ।
कोइ न सुने तो भी कहने मे हमारा क्या लगे ।
बात  आज ही आभी कहो कल कहने से क्या होगा ।
पता नही कल कैसी हवा चले ।
हक के मसले मे खामोसी से कुछ न होगा ।
आवाज उठाओ तो हक मिले ।
अनजान ठिकाना पुछने सकुचाने से कुछ न होगा ।
पता पूछो तो मंजिल मिले ।
मेरे लिखने से कुछ ना होगा ।
तुम पढो समझो तो बात बने ।

जीएटी भारत कीअर्थव्यवस्धा सुधार

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एक देश एक टेेक़्स जीएसटी कानून भारत मे एक जुलाई से लागू हो गया है ।30 जून कीआधी रात कोभारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने घटी बजाकर  जीएसटी लागू किया ।

सावधानी से सहायता करें ।

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मददगारो सावधान 💃
( जो अपनी मदद खुद करते है उनकी मदद खुदा करता है )
 बाबा भारती की कहानी तो हम सभी जानते है बाबा भारती दीन दुखियो की मदद करते थे उनके पास  एक सुन्दर घोडा था जिसे एक डाकू छीनना चाहता था । एक दिन जब बाबा भारती अपने घोडे पर सवार होकर जगल के रास्ते जा रहे थे । तब डाकू अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते मे मिला और बाबा से मदद मागने लगा बाबा ने उसे घोडे पर बिठा लिया' घोडे पर बैठते ही डाकू ने बाबा को धक्का देकर निचे गिरा दिया और घोडे पर कबजा कर लिया । तभी बाबा भारती ने डाकू से कहा था की तू यह घोडा ले जा पर कभी भी भूल कर किसी को यह बात मत बताना की मैने अपाहिज बनकर बाबा को धोखा देकर यह घोडा छीना है । नही तो संसार मे कोई किसी अपाहिज की मदद नही करेगा ।
एक  और सच्ची कहानी मदद पाने बाले की है ।
शहर मे एक गाव का भोला आदमी एक फेक्ट्री मे काम करता था ।भूकप  आने से उसका गाव  तवाह हुआ उसमे उसका घर परिवार भी तहस नहस हो गया था कुछ भी नही बचा था । इस दुख मे उसके साथी कामगारो ने अपनी महिने भर की वेतन का आधा आधा रूपया उस भोले आदमी को दिया और  उससे कहा की भाई तू अपने गाव जा और  इस पैसे से अपने परिव…

कपडा कागज बैग बनाने का अवसर ।

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भारत का दिल मध्य प्रदेश  अब पोलेथिन पन्नी के प्रदूषण से साफ हो रहा है । 24 मई2017 से मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  ने पन्नी के उपयोग पर रोक लगा दी है ।पन्नी का उपयोग करने बालो पर र्जुमाना लगेगा ।पन्नी की जगह कागज  और कपडे के बैग  उपयोग करने की सलाह दी जा रही है । अब पूरे भारत मे पन्नी का चलन बंद होने की पूरी संभावना है क्योंकि पोलेथीन पन्नी का प्रदूषण  अब चरम सीमा पर है । मध्यप्रदेश मे अब कागज  और कपडे के बैग की माँग बढने बाली है । यह समय कागज  और कपडे के बैग बनाने का उधोग लगाने का सुन्हरा अवसर है ।
👜 कपडा बैग बनाने का गृह उधोग बहुत कम लागत से स्थापित किया जा सकता है ।बस  इसके लिए एक सिलाई मशीन  जाहिए और सस्ते कपडे के थान ' लटठा और नेट के कपडे सस्ते पढते है । नेट का कपडा थोक मे कटनी से खरीदने पर सस्ता पढता है क्योंकि यहॉ नेट का कपडा बनता है । कपडे के बैग बनाने मे जादा झंझट भी नही है । इसकी मार्केटिग करना भी आसान होगा हर दुकानदार को इसकी जरूत पडेगी आखिर ग्राहक को किसी ना किसी थेले मे रखकर ही तो सामान देना होगा । कपडे की पोटली मे बॉधकर तो सामान दिया नही जा सकता है ' किरा…

दिमाग तेज करने का तारीका ।

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आदमी शारीरिक रूप से सब जानवरों मे सबसे कमजोर प्राणी है । लेकिन दिमाग के कारण  आदमी प्रथ्वी का सबसे उत्तम प्राणी माना जाता है । बैज्ञानिको के मुताविक  आज तक मनुष्य के आधे दिमाग का उपयोग ही नही हुआ है ।आधा दिमाग बंद ही है । आइंस्टीन जैसे बडे बडे बैज्ञानिक तक  अपने दिमाग का 25% तक ही उपयोग कर पाए है । मनुष्य का दिमाग पेराशूट की तरह है जितना खोलो उतना ही बढता जाता है ।
निराहार शरीर मे दिमाग बहुत तेज काम करता है । यदि यकीन ना आए तो आप  एक दिन  उपवास कर  अपने दिमाग की चाल देखिए । दुनिया का हर समझदार बक्ता निराहार रहकर ही बोलता है । कथा बाचक ' प्रबचन कर्ता या भाषण करने वाले यह निराहार या अल्प  अहार के बाद ही कुशलता से धारा प्रवाह बोलते रहते है । क्योकि निराहार शरीर मे जरठ  अग्नि को भोजन पचाने का काम नही रहता तब वह दिमाग की सहायता करती है ।
बृम्ही बूटी _ दिमाग तेज करने की सबसे तज  औषधि बृम्ही मानी गई है ।इसके सेवन से दिमाग तेज होता है ।
शीर्ष आसन करने से दिमाग कमजोर होता है । यह बैज्ञानिक तथ्य है । मनुष्य का दिमाग  इसलिए विकशित हुआ की मनुष्य ने दो पैरो पर चलना शुरू किया ।जबकि सभी जानवर च…

दूशरा मोगली ।

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मोगली 💃
सर विलियम हेनरी ने एक एसे बालक का उल्लेख किया था  जो जंगल मे भेडियो के बीच पला बढा था । यह बालक मध्य प्रदेश मे सिवनी जिले के संतबाउडी गाव मे सन 1831 मे पाया गया था ।
इस बालक के आधार पर लेखक रुडयार्ड किपलिंग  ने "दा जंगल बुक " नामक किताव लिखी है । इस किताव की कहानी का मुख्य पात्र मोगली है जो जगल मे जंगली जानवरो के बीच रहता है । दा जंगल बुक पर  एक बहुत ही रोमांचक कारटून फिल्म भी बनी है जो बच्चो की सबसे पसंदीदा फिल्म है ।
दूशरा मोगली ।
यह  एक  एसा बिचित्र बालक है जो अभी है ।यह बालक मध्य प्रदेश के रायसेन जिला के किनगी गाव मे रहता है ।यह बालक मोगली की तरह जंगली जानवरो मे तो नही रहता पर यह  एक र्दजन कुत्तो के बीच मे रहता है ।यह बालक कुत्तो से इतना घुला मिला है की सारे कुत्ते इसके इशारे पर चलते है ।यह बालक  इन कुत्तो की भाषा समझता है । सुवह होते ही यह  अट्ठा नाम का लडका अपने डोगस फ्रैंस के साथ घूमने निकल जाता है जहाँ कही भी कोई मरा हुआ मबेशी देखकर यह बालक  अपने दोस्तों को खिलाता है ।यह लडका आदमीओ मे कम कुत्तो मे अधिक रहता है । इस दूशरे मोगली मे एक  और खूबी है यह बालक जानी ली…

कंचन तेरी याद में ।

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में जब भी कभी सुनता हू प्रेम के कहीं ' 
तव में खो जाता हू ' कचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी पढता हू कोई प्रेम कहानी '
 तव कल्पना मे तुम दिखती हो ' कंचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी देखता हू कोई फिल्म कभी ' 
तब नाइका मे तुम नजर  आती हो ' कंचन तेरी याद मे ।

में उदास होकर कभी जाता हू मंदिर कभी ' 
तब राधा के रूप मे तुम्हे पाता हू ' कंचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी सोता हू तो देखता हू तेरा ही सपना ' 
मुझे हर बक्त तेरी फिक्र है ' कंचन तेरी याद मे ।

मे पत्थर था तुम  कंचन हो पर फिर भी अभी '
पानी मे बन गया हू ' कचन तेरी याद मे ।

मे जानता हू की तुम भी बधी हो जमाने की जंजीर से मेरी ही तरह ' 
फिर भी तुम्हें पाने के लिए क्यो मे पागल हू ' कंचन तेरी याद मे ।

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समय एक भ्रम है !

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समय क्या है ? समय पर  मैने बहुत सोच विचार किया ' समय के बारे मे बडे बडे विचारको का मत जाना तो आश्चर्य चकित रह गया की यह समय नाम की चीज तो बडी जादूई चीज है जो है भी और नही भी है । आखिर यह पहेली कैसे सुलझेगी अंत मे इस निष्कर्ष पर पहुचा की समय  एक भ्रम है ।
कभी जब हम  अतीत को र्वतमान मे पाते है या अतीत की यादो मे जाते है तो एसा लगता है की यह सबकुछ  अभी अभी हुआ है । कभी एसा लगता है की समय थमा है । आपको भी कभी ना कभी एसा जरूर लगा होगा ।हमे अपने भीतर कोई बदलाव महसूस नही होता ' वदलाव तो बाहरी जगत मे दिखाई देता है ।इसी बदलाव को समय कहा जाता है ।
आइंस्टीन ने कहा है की समय  एक भ्रम है ।अंतरिक्ष मे समय का कोई अस्तित्व ही नही है ।सबकुछ  एक साथ घटित हो रहा है ।आदमी को समय का भ्रम  इसलिए पैदा होता है की वह रह चीज को एक के बाद  एक होते देखता है ।
भोतिकशास्त्री  क्वांटम का भी यही मत है की समय नाम की कोई चीज नही है ।
औशो ने भी अपने एक प्रवचन मे अपने सात सो साल पहले के  पूर्वजन्म के बारे मे बताते हुए समय के बारे मे कहा है की मृत्यु के बाद समय खत्म हो जाता है ।मृत्यु के बाद नया जन्म लेने के बीच क…

प्रधानमंत्री आवास योजना -ग्रामीण

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🏠प्रधानमंत्री आवाज योजना _ग्रामीण " संछिप्त परिचय ।
इंदिरा आवास योजना को 2016 से प्रधानमत्री आवास योजना मे पुनः गठित किया गया है ।इस योजना के तहत भारत वासियो को जो टूटे फूटे और कच्चे मकानो मे रहते है उन्हें 2022 तक पक्के मकान बनवाने का लक्ष्य है । इस योजना से बनने वाले कमान का आकार 25 वर्ग मीटर होता है ।इस  इकाई की लागत सहायता राशी 1.20 लाख  एवं 1.30 लाख है ।हितग्राही कुछ बडा मकान बनाना चाहे तो उसे 70 हजार रू लोन भी मिल सकता है । इसके आलावा हितग्राही मनरेगा से 90\95 दिन की मजदूरी पाने का भी हकदार है ।मकान के साथ शोचालय बनाने पर 12 हजार रू की राशी अलग से मिलने का नियम है । साथ ही अन्य योजनाऔ के तालमेल से पेयजल व्यवस्था ' बिजली कनेक्शन ' गैस चुल्हा आदि भी मकान के साथ मुहैया कराने का प्रयास है ।
इस योजना मे 2011 की जनगणना के आधार पर हितग्राहियो का चयन किया जा रहा है ।हितग्राही अपने ब्लॉक से स्वीकृती आदेश पा सकता है या pmyg की बेवसाइट से भी डाउनलोड कर सकता है ।लाभार्थी को स्वीकृती आदेश मिलने के 15 दिन के भीतर 40 हजार रू की पहली किस्त मिलने का नियम है 'स्वीकृति मिलने की त…

अमीर बनाने वाली 10किताबें ।

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अमीर बनने की शिक्षा देने वाली और धनवान बनने के गुरले सूत्र सिखाने वाली दुनिया की सबसे अच्छी 10 किताबें है । इन किता की करोडो प्रतियॉ बिकी है ।यह चुनिदा किताबे है आर्थिक ज्ञान की जो दुनिया भर मे चर्चित है । इन 10 किताबों का कोर्स पढकर  इनमें बताए गए नियम के आधार पर चलकर कोई मी साधारण  आदमी अमीर बन सकता है और सफलता की बुलंदीयों पर पहुच सकताहै ।क्योंकि इन किताबो मे अमीर बनने का अनमोल ज्ञान भरा है ।
अमीर बनाने वाली किताबे ।
जीत  आपकी । लेखक - शिव खेडा
इस किताव मे साकारात्मक सोच विकशित करने के बारे मे  अच्छे उदाहरणो से समझाया गया है । यह किताब  व्यक्ति को अपनी खूवी और बुराई का आइना दिखाती है । इस किताव मे हर समश्या का समाधान मिलता है । जीत  आपकी पुस्तक नेट पर पीडीएफ डाउनलोड मे मुफ्त उपलब्ध है ।
बेबीलॉन का सबसे अमीर  आदमी'।लेखक - जार्ज एस क्लासन
यह किताब बताती है की बेबीलोन का सबसे गरीव  आदमी वहाँ का सबसे अमीर  आदमी कैसे बना ।इस पुस्तक मे धन को आकृषित करने के नियम के बारे मे बताया गया है ।यह किताब वित्तिय ज्ञान देने वाली विश्व की सबसे फेमस किताव है । जो आदमी को अमीर बनाने की शक्ति देती है…

अमीर बनाने का रास्ता ।

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दुनिया मे जव भी दुनिया के सबसे अमीर लोगो की लिस्ट निकलती है तो उसमे सबसे जादा नाम  उधोगपति लोगो के ही होते है । इससे यह बात साफ होती है की अमीर बनने का रास्ता  उधोग ही है । उधोग भी हर  अदमी के उपयोग मे आने वाली वस्तुओ का लगाना चाहिए ।जहॉ तक हो सके तो वच्चो की उपयोगी चीजे खिलोने आदि और महिलाओं के सृंगार की वस्तुओ का व्वसाय  अधिक लाभदायक होता है । महिलाए और बच्चे अपने उपयोग की बस्तुए मुह मागी कीमत देकर खरीदते है उन्हें रूपए की कीमत कुछ कम पता होती है । जवकि कमाऊ पुरूष खासकर बूढे आदमी जादा चतुर होशियार  और बेईमान होते है । खरीदारी मे कंजूसी करते है । मोल भाव करते है । वस्तु कम से कम कीमत चुकाकर खरीदते है । एक  एक रूपया गिन गिन कर खर्च करते है । क्योंकि बूढे आदमीओ को दुनिया की हकीकत पता होती है और वह जानते है की धन की कीमत क्या है और धन कितनी मेहनत से कमाया जाता है ।
अव कुछ बात युवाओ की हो जाए युवा और किशोर अवस्था के लोग भी अपनी शोक पूरी करने पर  अधाधुंद पैसा उडाते है । बाप की दोलत पर खूव  एस करते है । बाप सोचता है की मेरा लडका शहर मे पढ रहा है । और  उसकी पढाई के खर्चके नाम पर खूव पैसे भ…

गर्मीयो मे खाना सुरक्षित कैसे रखे ?

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गरमी के दिनो मे गृहमंत्री इस बात को लेकर परेशान रहतीं है की बिना फ्रिज के खाने की चीजो को खराव होने से कैसे बचाया जाय । ग्रामीण  इलाकों मे हर घर मे फ्रिज नही होता है और होता भी है तो बिजली नही रहती है ।इस स्थित मे खाने की चीजें जैसे _फल' हरी सब्जियॉ ' दूध ' पान ' पका हुआ भोजन दाल ' चावल ' सब्जी रोटी आदि गरमी के कारण  अधिक समय तक नही चलती है वह जल्दी खराव हो जाती है और  उन्हें फिर फेकना पडता है इससे नुकसान होता है ।
गरमी के दिनो मे खाने की चीजो को सुरक्षित रखने और  उन्हे लंबे समय तक चलाने के लिए । इन्हे खराव होने से बचाने का सबसे सरल  उपाय यह है  की इन चीजो को ठंडे पानी के मटके या किसी परात जैसे चौडे आकार के र्बतन मे पानी भरकर  उसी मे यह चीजे रखी जाए । पानी भरा र्बतन खिडकी  आदि एसी हवादार जगह पर रखा जाए जहॉ पानी मे हवा लगने से पानी ठंडा होता रहे और  उसमे फल  दूध का पेकिट या चावल वाला दूशरा र्बतन हवा लगने पर पानी मे तेरते रहे । रात के बाद सुवह  इस र्बतन का पानी बदलकर  इसमे ताजा ठंडा पानी भरा जाए । इस तरीके से खाने की चीजो को गरमी के दिनो मे भी खराव होने से आसानी…

जीवन का रहष्य ।

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मनुष्य के जीवन का राज़ यह है की मनुष्य खुद ही अपने जीवन का निर्माता और भाग्य विधाता है ।वह  अपने जीवन की जैसी कल्पना करता है उसका जीवन वैसा ही बन जाता है ।रहष्य यह है की कल्पना ही सबकुछ है ।ब्यक्ति की जैसी कल्पना या सोच होती है वह परिणाम रूप मे साकार होती है यह कुदरत का नियम है । संसार की सभी वस्तुएं कल्पना के ही रूप है । किसी विचारक का कथन है की इंसान का दिमाग जिन चीजो को सोच सकता है ' इंसान  उन्हें पा भी सकता है ।पुराणो मे कल्पबृक्ष की कथा है ' कामधेनु की कथा है ' अलादीन का चिराग कहानी है ।वैसे तो यह कहानियॉ काल्पनिक है । पर यह कहानीयाँ कल्पना की शक्ति को समझाने के लिए गढी गई थी । जैसे देवी देवता ' आत्मा परमात्मा ' ईश्वर आदि से सच्चे मन से पूरे विश्वास के साथ जो भी मागो वह मिलता है यह सच है । पर विश्वास पैदा नही होता क्योंकि देवी देवता  आत्मा परमात्मा जिन्न कामधेनु कल्पबृक्ष  ईश्वर आदि यह सब नाम  उसी असीम शक्ति के है जिसे हम वृम्हाण कहते है । जो विसाल है और  आखड है । उसे यह छोटे छोटे नाम रूप देने से वह खडित होता है और  आदमी इसमे भ्रमित होता है ।
आदमी की कल्पना व…

कोड वर्ड भाषा ।

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मेरा एक दोस्त मोवाइल पर  अपनी प्रेमिका से कोडवर्ड मे बात करता है ।कोई नही समझ पाता की वे आपस मे क्या बात करते है यह  उनकी अपनी निजी भाषा है । इस विषय मे पूछने पर मित्र ने बताया की इस भाषा का कोड वर्ड " ची" है । जिसको यह कोड पता होता है वही इस भाषा को समझ पाता है । जैसे मेरी मासूका को यह कोड पता है और मे उससे बात करता हू ची कोड मे तो वह सब समझ  जाती है । जैसे मे उससे कहू की मे महेश बोल रहा हू ' तो इसे मे ची कोड वर्ड की भाष मे इस तरह बोलूगा या लिखूगा _ मेची मचीहेचीशची बोचीलची रचीहाची हूची । इसका मतलव हे मे महेश बोल रहा हू ची को हटाते जाओ सब साफ हो जाता है । ची तो हर  अक्षर के बाद दूशरो को गुमराह करने के लिए बोला जाता है ।

राम जन्म भूमि पर कब बनेगा मंदिर ।

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हिदुस्तान हिन्दू प्रधान देश है । हिन्दू धर्म का आधार और केंद्र राम है । रामायण हिदूओ का मुख्य धर्म ग्रंथ है ।हर हिंदू सुबह उठकर जिस राम का नाम लेता है उस भगवान राम का मंदिर राम की जन्म भूमि पर  अयोध्या मे नही है यह बडी शर्म की बात है । भारत के बाकी सब मंदिर बेकार है जब तक राम जन्म भूमी पर मंदिर नही है तब तक सभी मंदिरो का कोई मूल्य नही है ।
इतिहास गवाह है की अयोध्या मे ही राम की जन्म भूमी है ।न्यायालय ने भी फैसला कर दिया ।वहाँ पहले मंदिर था इस बात के सारे सबूत है । मुस्लिम भी मंदिर बनाने का सर्मथन कर रहे है । तो फिर मंदिर निर्माण मे देरी क्यों हो रही है । आखिर कब तक चलेगा यह मुद्दा 'कब तक होगी राम जन्म भूमि पर राजनीती ' भारत का हिंदू सरकार की तरफ देख रहा है की आखिर कब करागी सरकार राम भूमि पर मंदिर का निर्माण ' कब बनेगा मेरे राम का मंदिर । मोदी सरकार का कहना है की 2022 तक हर गरीब हिदुस्तानी को पक्का मकान बना कर देगी सरकार ' क्या करेगे भारत के गरीब इस मकान का क्योंकि उनका भगवान बेघर हो और वह पक्के मकान मे रहे यह बात नही बनेगी । इस समय सभी परिस्थितिया अनुकूल है मोदी और यो…

महुआ पेड़ का महत्व ।

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वनवासी जन जीवन मे महुआ के पेड़ का बहुत महत्व है । महुआ इनके लिए आय का एक साधन है । मध्य भारत के जंगलो मे अधिक पाया जाने वाल महुए का पेड फागुन माह मे फूलता है । इसके पेडो से एक माह तक रोजाना महुआ के फूल झडते है । इन फूलो की मादक गंध से जंगल का बातावरण महकर मदमस्त हो जाता है । वनवासी लोग  इन महुआ के फूलो को हाथ से बीन कर  रोजाना इकटठा करते है । महुआ के पेड के नीचे रोज सुवह दो तीन तगाडी महुआ फूल मिलते है । वनवासी इन महुआ फूलो को सुखाकर बाजार मे कुंटलो से बेचते है । और  इनका उपयोग खाने मे भी करते है ।एवं इन फूलो से मदिरा भी बनाई जाती है ।
महुआ के फल_ गुलेदा ' जून माह मे पक जाते है जै खाने मे बहुत ही स्वादिष्ट होते है ।जगली लोग  और जंगली जानवर ही इनका स्वाद ले पाते है । शहर के लोगो ने तो महुआ फिल्म का गाना जरूर सुना होगा 'और महुआ का फूल भी देखा होगा पर  उनहे असली महुआ के फल का स्वाद शायद कभी नशीव नही हुआ होगा । क्योंकि यह फल बाजारो मे नही बिकते है । महुआ के फल की गुठली का भी व्यापार होता है इसे गुली कहते है इसका तेल निकलता है जो खाने के उपयोग मे आता है ।
महुआ नाम की एक पुरानी फिल्…

सिर पर बाल उगाने की औषधि ।

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सिर के बालो की सभी बिमारियो जैसे बाल झडना ' बाल सफेद होना आदि । सभी बिमारीयो का मुख्य कारण हैं  केमीकल युक्त केश तेल  और साबुन शेम्पो एवं हेयर डाई । इनका उपयोग कम करना चाहिए । साथ ही वासिंग पाउडर तो भूलकर भी बालो मे कभी नही लगाना चाहिए । बालो को तेज धूप मे कपड़ा आदि से ढककर रखना चाहिए ।
बाल  उगाने की औषधीय । 
आयुर्वेद मे बालो के सभी रोगो के निदान की दो मुख्य औषधीय है ।इनसे बढकर  और कोई औषधि नही है । पहली है नारियल का शुद्ध तेल  इसे साधारण न समझे बालो के लिए गुणकारी होने के कारण ही सबसे पहले बालो मे तेल लगाने का चलन नारियल के तेल से ही शूरू हुआ था ।
बालो की दुशरी राम वाण  औषधि है भ्रंगराज का पौधा ' इसका तेल बालो मे लगाने से बाल हमेशा काले वने रहते है ।यह पौधा बालो की औषधियों का राजा है ।
गंजापन (एलोपेसिया ) का घरेलू सफल  इलाज और दवा ।
नारियल का तेल  और भ्रंगराज का असली तेल बराबर बरावर भाग  आपस मे मिलाकर सुवह शाम  गंजे सिर पर लगाकर मालिश करने से सिर पर बाल  उग जाते है । भ्रंगराज का असली तेल न मिलने पर भ्रंगराज के पौधे के सभी  अंगो को सुखाकर  नारियल के तेल मे मिलाकर गरम करे और ठंडा…

तेंदू पत्ता संग्रहण ।

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जंगल मे पाया जाने वाला तेंदू का पेड बहुत  उपयोगी पेड़ है ।इसके चीकू के स्वाद वाले पके पीले फल  अप्रैल माह मे पक कर झड जाते है या इन्हें जंगली बंदर खा जाते है । इसके बाद तेंदू के पेडो पर नई पत्तियां आने लगती हे जो जून माह मे पूरी तरह से विकसित हो जाती है ।इन्हीं पत्तियों का उपयोग बीडी बनाने मे होता है ।
तेंदू पत्ता संग्रहण ।
मईं माह मे पतझडी जंगलो मे छोले के पेड के वाद तेंदू ही हरे भरे दिखाई देते है । इसी मोषम मे तेंदू की पतती तुडवाई जाती है । वन विभाग के संरक्षण मे यह काम होता है ।और वन  अंचलो के ग्रामीण मजदूर  इस काम को करते है । इन मजदूरो से 50 पत्ता की गडडी बनवाई जाती है जिसे वन विभाग 150 रू प्रति सैकडा के हिसाव से खरीदता है । एक मजदूर  एक दिन मे 200 गडडी बन लेता है । तेंदूपत्ता सीजन  एक माह तक चलता है । जो वनवासियो के लिए त्योहार से कम नही होता है । गरमी के मोषम मे जंगल घूमने के साथ ही यह लोग  इस काम  से अच्छा लाभ भी कमा लेते है ।
वन विभाग  इन तेंदू के पत्ते की हरी गडडीयो को खरीद कर  15 दिन तक धूप मे सुखाने के बाद जालीदार बोरो मे भरवा कर गोदामों मे भरवा देता है । इसके बाद आफ सीजन …

गोवर से रूपये कमाए 'ग्रामीण ।

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गॉव के हर घर मे दुधारू पशु जरूर पाले जाते है । पहले तो इन पशुओं के गोवर का उपयोग कंडे उवले बनाने मे होता था जो खाना पकाने के लिए चुल्हे मे जलाने के काम  आते थे । पर  अब गॉवो के घरो मे गैस चुल्हे आ जाने के कारण मवेशी का गोवर कूडे के ढेर पर फेका जाता है ।गॉव के रास्तों गली चोराहो के किनारे जगह जगह लगे यह गोवर कूडे के ढेर गॉव को गंदा करते है । गॉव को साफ सुथरा रखने और गोवर कूडे का उपयोग करने का एक मात्र  उपाय यह है की इससे बर्मी कपोस्ट गोवर की खाद बनाई जाए । इसके लिए गॉव के सभी पशुओं वाले   घरो मे पक्के ईट के टेंक बनाए जाए जिसमे पशुओं की सार वखरी का गोवर घास भूसा का कचडा जमा किया जाए जब यह टेंक फुल भर जाए तो इसमे पानी भर कर केचुए छोड दिए जाए और  ऊपर से घास से इस टेक को ढक दिया जाए । इसके बाद तीन चार माह मे खाद बनकर तैयार हो जाता है । किसानो के लिए तो सरकार गोवर की खाद बनाने के पक्की टंकी बनाने के लिए अनुदान भी दे रही है । गेर किसान भी अपने खरचे से यह टंकी वना सकते है इसमे अधिक खर्च नही लगता सिंगल  ईट की पॉच फिट  ऊची दीवार चारो तरफ बनाई जाती है इसकी लंबाई चोडाई अपने गोवर के हिसाव से जादा…

विना साधन के चाय बनाना ।

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इस युग मे सुवह चाय पीना एक  आम बात है ।और  घर  आए मेहमानों का स्वागत चाय से करना खास है ।आज  अदना आदमी भी घर  आए महमान को चाय जरूर पिलाता है ।आप कितने ही बडे आदमी हो अगर  आपने घर  आए मेहमान को चाय नही पिलाई तो आप कुछ नही है ।
जरा सोचिए _ यदि आपके घर मेहमान  आ जाए और  आपके पास चाय बनाने के सधनो की व्यवस्था ना हो तब  आप मेहमानो को चाय नही बना सकते और  आपकी बेइज्ती होगी । चाय बनाने के लिए दस वस्तुओं की जरूरत होती है । इनमें से एक दो चीजे न हो तो आप चाय नही बना पाएगे ।
पर हम  आपको बिना साधनो के भी चाय बनाने की यह तरकीव बता रहे है जिससे  चाय बनाने के किसी भी साधन के बिना आप चाय बनाकर पी सकते है औरो को भी पिला सकते है ।कभी भी कही भी 'आइए जाने क्या है वे विकल्प ।

चाय की वस्तुए  ___ विकल्प 
1 चुल्हा          _ ईट 'पत्थर 'रेत ' मिट्टी का घरोदा ।
2 गैस ईधन ___ तेल'कागज ' कपडा ।
3 आग      _ धूप ' बिधुत 'इंजन की गरमी ।
4 वर्तन    _ पोलीथीन पन्नी ।
5 पानी ___दूध  बर्फ ।
6 चाय पत्ती _ जली चीनी 'तुल्सी ' अदरक 'लोग ' इलाइची ।
7 चीनी ___ शुगर कैडी ' दूध ।
8 …

आत्माओ का आवाहन

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यह बात सच है की आत्माए होती है और यहभी  सच है की आत्माओ को बुलाकर  उनसे अलोकिक जानकारीयॉ भी जानी जा सकती है ।दुनिया मे आत्माओ के आवाहन की अनेक विधियॉ प्रचलित है ।पर  आत्माओ के आवाहन की एक सबसे सरल सुलभ विधि है जिससे हम सभी परिचित है । जव चैत्र के नौरात्र मे गॉव के लोग जवा बोकर देवी के नाम से घट स्थापित करते है तो वहाँ नौ दिन तक पूजा पाठ के साथ ही आत्माओ को बुलाने का भी कार्यक्रम होता है जिसमे रोजाना रात को  उस स्थान को सुगंधित कर वहाँ एक विशेष धुन वजाते हुए देवी जस गीत गाए जाते है जिसके प्रभाव से वहाँ के वातावरण मे उपस्थित  आत्माए लोगो के शरीर मे आ जाती है और मस्ती से नाचतीं है बात भी करतीं है आम लोग  आत्माओ को देवी देवता कहते है और  उनसे अपने दुखो का निदान भी पूछते है जो आत्माए बताती है । लेकिन हर किसी के शरीर मे आत्मा प्रवेश नही करती जो शरीर  आत्माओ के लिए अनुकूल होता है आत्मा उसी शरीर मे आती है ।
मेने सुना है किसी ने कभी आत्मा का आवाहन किया और  आत्मा आई तो आवाहन करने बाले ने आत्मा से पूछा _ की तुम यह बताओ की इस दुनिया मे और तुम्हारी दुनिया मे क्या अंतर है ? इस र  आत्मा बोली _ वाह …

आँखों से आग जलाना !

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पोराणिक कहानियो मे लेख मिलते है की ऋषि मुनि और तपष्वी अपनी नजर से राक्षसों को जलाकर भष्म कर देते थे ।यह बाते काल्पनिक नही है । एसा आज भी संभव है । आज भी कही कही बडे यज्ञो की वेदी मे नजर से आग जलाने के लिए एसे लोगो को बुलाया जाता है जो अपनी आँखों से आग जलाते है ।यह कोई चमत्कार नही है । यह शक्ति हर  आदमी की आँखों मे होती है र  इसे पाने के लिए सालो कठिन साधना करना पडता है । तव जाकर  अग्नि दृष्टि हासिल होती है ।
अग्नि दृष्टि पाने की विधि _अग्नि दृष्टि पाने के लिए साधक को बर्षों तक सूर्य त्राटक की साधना करनी होती है ।इसमे रोज सुवह  उगते हुए लाल सूरज को बगेर पलक झपकाए एकटक देखने का अभ्यास किया जाता है ।लंबी सादना के बाद जब 32 मिनिट का सूरज त्राटक पूरा हो जाता है यानी की जव साधक बगेर पलक झपके 32मिनट तक  एकटक सूवह के सूरज को देखने मे सफल हो जाता है तव  उसकी आँखों मे अग्नि दृष्टि आ जाती है ।और फिर वह जहॉ भी जिस वस्तु को कुछ देर तक  एक टक देखता है वहॉ  आग जल  जाती है ।
अग्नि दृष्टि के लिए सूरज त्राटक करना होता है और  इसके लिए गुरु की जरूरत पडती है जो आसानी से नही मिलता है ।

सम्मोहन विधा वशीकरण ।

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संमोहन विधा या मोहनी विधा प्राचीन विधा है इसके प्रमाण पोराणिक कथाओ मे मिलते है ।जैसे महाभारत कथा मे यह प्रमाण है की कृष्ण अपनी बासुरी से मोहनी धुन वजाकर बृज की वालाओ को वश मे करके अपने चारो तरफ नचाते थे ।
इस विधा को विज्ञान ने हिप्नॉटिज्म नाम दिया है । डॉ मेसमेर ने संमोहन विधा पर बहुत काम किया इसलिए इसविधा को मेस्मेरिज्म भी कहा जाता है ।
संमोहन विधा एक  एसी विधा है जिसके उपयोग से किसी भी स्त्री पुरूष को वश मे करके उससे मन चाहा काम कराया जा सकता है । मनुष्य के दो मन होते है पहला बाहरी चेतन मन  और दूशरा आंतरिक अवचेतन मन ' संमोहन के असर से पहले चेतन मन को सुला दिया जाता है । संमोहन की स्थित मे आदमी का अवचेतन मन जाग्रत रहता है यह मन बहुत शक्तिशाली होता है और किसी भी आदेश को वगेर निर्णय लिए स्वीकार करता है । इसलिए संमोहित व्यक्ति से जोभी कहा जाता है वह  उसे सच मान कर करता है ।
संमोहन का गहरा असर _ गहरे संमोहन की स्थित मे आदमी के हाथ मे बर्फ का तुकडा थमाकर  उससे कहा जाय की यह  आग का अंगारा है और तुम्हारा हाथ जल रहा है । तो सच मे उसके हाथ पर फोडे उठ  आएंगे । मैने किसी किताव मे पढा था की…

आग बुझाने के तरीके ।

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आग मनुष्य की जरूरत होने के साथ ही विशाल रूप मे दुश्मन होती है । जिस संपत्ती मे भी आग लगती है उसे जलाकर खाक कर देती है । गरमी के दिनो मे आग का प्रकोप  आधिक होता है इन्हीं दिनो आग लगने की आधिक  घटनाए घटती है ।  इसलिए गरमी के दिनो मे आग को लेकर सावधान  और जागरूक रहना जरूरी है ।
चार तरह की आग _आग को चार भागो ABCD मे बॉटा गया है ।
Aवर्ग की आग साधारण  आग होती है जैसे _ लकडी घास फूस की आग  इसे बुझाने के लिए पानी का उपयोग होता है ।

B वर्ग की आग - यह तेल की आग होती है । इसे बुझाने के लिए धूल राख पाऊडर का उपयोग किया जाता है ।

C वर्ग की आग - यह गेस की आग है इसे बुझाने के लिए इस गेस की बिरोधी गेस का ही उपयोग होता है ।

D वर्ग  की आग - यह विजली की आग है जो करंट के स्पार्क से लगती है । इस  आग को बुझाने के लिए पानी का उपयोग नही किया जाता क्योंकि पानी मे करंट फैलता है ।
एक्शंगुलेशर _ आग के लिए संवेदनशील स्थान जैसे पेट्रोल डीजल टेको पर हम देखते है की लाल रंग के तीन चार सिलेंडर रखे होते है जिन पर ABCD लिखा होता है । यह  आग बुझाने के यंत्र होते है । Aवर्ग की आग के लिए A सिलेंडर उपयोग किया जाता है । इसी त…

विच्छू की दवा और इलाज ।

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विच्छू _यह जहरीला जीव जव किसी को  काटता है । तो उस  आदमी को असहनीय दर्द होता है । हालाकि विच्छू के काटने से आदमी मरता नही है । केवल दर्द होने से तडफता है । यह दर्द 24 घंटे मे अपने आप खत्म हो जाता है । पर विच्छू के काटने का दर्द होने पर घंटे साल जैसे कटते है ।जिसको कभी भी विच्छू ने नही काटा वह  इस का अंदाजा नही लगा सकता की आखिर कितना दर्द होता है विच्छू के काटने पर ' वस यह समझ ले की किसी को सौ मधुमक्खियॉ  एक साथ काटे और  उसे जितना दर्द होगा उतना ही एक विच्छू के काटने पर होता है ।
विच्छू की दवा _ पान का पत्ता विच्छू की सबसे उत्तम दवाई है । पान मे जहर नाशक शक्ति पाई जाती है ।
विच्छू का इलाज _ विच्छू का जहर  उतारने के लिए सवसे पहले जिस स्थान पर शरीर पर विच्छू ने डंक मारा हो ठीक उसी स्थान पर सुई चुभाकर खून निकाला जाता है ।इसके बाद पान के पत्ते का डंठल काटकर पान का पत्ता मरीज को खिला दिया जाता है और डंठल कूछ देर तक घाव पर लगाया जाता है  उसी स्थान पर ' पान के डंठल का रस खून के संपर्क मे आने से जहर जल्द ही खत्म हो जाता है और मरीज राहत की सांस लेता है । क्योंकि दर्द बहुत कम हो जाता है …

स्मार्ट फोन और वाइक से अॉखो को खतरा ।

आदमी के लिए अॉखे कुदरत की आनमोल देन है ।अॉखे है तो यह सुन्दर संसार है वरना अंधेरा है ।इसलिए अॉखो के प्रति सबधान रहना बहुत जरूरी है ।इस युग मे मोवाइल  और मोटरसाइकिल  जीवन का अहम हिस्सा बन गए है इनके विना जीवन का पहिया नही चलता है । पर  इनका साबधानी से उपयोग करना ही आदमी के लिए हितकर है । नेत्र विशेषज्ञो के अनुसार वाइक  और स्मार्ट फोन लोगो की अॉखो पर धातक  असर डाल रहे है ।
स्मार्ट मोवाइल फोन का उपयोग आज बहुत हो रहा है ।जमाने की अॉख मोवाइल पर थमी है ।हर कोई अपने मोवाइल पर व्यस्त दिखता है अगर किसी से पूछो कि क्या कर रहे हो ' तोवह कहता है वाटस अप ! बहुत देर तक या देर रात तक मोवाइल पर  अॉखे लगाना हानीकारक है एसा करने से अॉखो की रोशनी कम होती है । इसलिए स्मार्ट फोन का कम या समयक  उपयोग करना चाहिए ।
वाइक का उपयोग _ नंगी अॉखो से वाइक चलाना अॉखो लिए मेहगा पडता है ।रास्ते की धूल ' धूआ 'कंकड ' मच्छर हवा अॉखो से टकराती है ।जिससे अॉख मे जलन चुभन महसूस होती है और  अॉखे लाल हो जाती है । आज  अॉखे खराव होने का सबसे बडा कारण नंगी अॉखो से वाइक चलाना ही है ।इसलिए वाइक चलाते सयम चश्मे का उ…

विडियो बनाने वाली कमीज ।

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आपराधिक गतिविधियों को रोकने या कम करने अथवा अपराधियों को पकडवाने का एक नायाव तरीका है ।विडियो बनाने वाली कमीज  इस कमीज सर्ट को पहन कर कभी भी कहीं भी किसी का भी विडियो खिचा जा सकता है ।
यह कमीज हमे खुद ही अपने टेलर से बनवाना होता है ।जिसमे सीने पर दो ढक्कन वाले जेव लगवाए जाते है । यह जेव पॉकेट  आपको अपने मोवाइल फोन सेट के आकार के हिसाव से लगवाने पडते है । जेव मे मोवाइल रखने पर वह पूरी तरह फिट बैठे । और सबसे खास बात दोनो पॉकेट पर छोटे आकर के कॉज नुमा छेद बनवाए जाते है जिन्मे से मोवाइल केमरे का लेंस बाहर के सीन साफ देख सके । बाहर से देखने पर यह छेद साफ नही दिखने चाहिए और दिखे भी तो लोग  इन्हे डिजाइन समझे ।दूसरे पॉकेट पर छेद केवल लोगो को गुमराह करने के लिए लगवाया जाता है । अब  इस कमीज को पहन कर  इसकी जेव मे अपना मोवाइल केमरा चालू करके रखे और  अपराधियों के विडियो बनाए किसी को पता भी नही चलेगा ।
विडियो बनाने का यह तरीका आजमाया हुआ है जो सफल है । यदि समाज मे सी सी टीवी केमरे की तरह ही सभी लोगो की पॉकेट पर भी केमरे लग जाए तो समाज मे आपराधिक गतिविधियो पर लगाम लग सकती है ।
ईश्वर करें एसा ही हो …

भविष्य मे खेती का रूप ।

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आज परंपरागत खेती करना घाटे का सोदा शिद्ध हो रहा है । इसलिए आने वाले समय मे खेती का स्वरूप बदलेगा 'और खेती मे यह बदलाव समय की मॉग है ।
बैज्ञानिक खेती _आगामी समय मे वैज्ञानिक खेती ही लाभदायक शिद्ध होगी ।खेती वाडी के सभी काम वैज्ञानिक तरीको से होगे एवं कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से ही खेती का हर काम करना ही कृषक के लिए हितकर होगा ।
रासायन रहित खेती _आज खेती मे रासायनो के दुष्परिणाम सामने आ रहे है ।इसलिए भावी समय मे रसायन मुक्त खेती ही होगी । खेतो मे गोबर की देशी खाद 'और  आयुर्वेद कीटनाशक दवाओं का ही अधिक उपयोग होगा ।
जल प्रबंधन _ आने वाले वर्षों मे बरसा कम होने से भूमी गत जल स्तर घटेगा । इसलिए खेत का पानी खेत की जमीन मे ही रहे इसके लिए खेतो मे मेड बंधान ' सोखता गड्ढे ' तालाव  आदि के इतजाम करने होगे ।
पोली हाउस खेती _ खेती मे आने वाली सभी समश्याओ को कम करने का तरीका है पोली हाउस मे खेती करना । पोली हाऊस मे तापमन नियंत्रण करके कम पानी कम जमीन पर बारह महिने किसी भी मोषम मे कोई भी फसल लगाई जा सकती है ।और फसल  उत्पादन लिया जा सकता है । इन सुविधाओ को देखते हुए पोली हाउस खेती का दाय…

राशि के शुभ पेड पौधे ।

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हमारी राशि पर ग्रहो के अशुभ प्रभाव को रोकने के लिए ज्योतिषी हमे रत्न धारण करने की सलाह देते है । पर  असली रत्न बहुत मेहगे मिलते है । और हर  आदमी इन्हे नही खरीद सकता इसलिए इनके स्थान पर  उपरत्न धारण किये जाते है । पर यह  उपरत्न ग्रहो के असर को पूरी तरह नही रोकते केवल हमारी शंका का ही समाधान होता है ।
इन मेहगे रत्नो के स्थान पर मुफ्त के पेड पौधे भी अपने घर पर लगाए जा सकते है । जो रत्नो की ही तरह ग्रहो के असर को रोकने मे सक्षम होते है । जाने की किस राशि के लिए कौन सा पेड पौधा शुभ होता है । और  अपनी राशि के अनुसार उसे अपने घर पर लगाए ।
राशियॉ  _ पेड या पौधा ।
मेष _ अन्तमूल
बृषक _ शंखपुखा 
मिथुन _ विधारा
कर्क _खिरनी
सिंह _ बील
कन्या _ विधारा
तुला संखपुखा
वृश्चिक _ अन्तमूल
धनु _हल्दी केना
मकर  _ बथुआ
कुभ _ बथुआ
मीन _ हल्दी केना ।

सफलता पाने का मंत्र !

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मंत्र _ क्या ' क्यों ' कैसे ' कब ' कितना ' !

क्या _क्या करें ' क्या काम करें । हर  आदमी के लिए जीवन जीने के लिए कुछ न कुछ काम करना तो जरूरी होता है । पर क्या काम करे ।यह निश्चित करना भी बहुत जरूरी है ।अपनी आत्मा से पूछे ।और  अपनी योग्यता 'क्षमता के अनुसार काम का चुनाव करे । यह पक्का निश्चय करे की हमे यह काम करना है । इसके बाद ही काम शुरु करे ।
क्यों _क्यों करें ।हम यह काम क्यों करना चाहते है । इससे हमे क्या मिलेगा । हम क्या पाना चाहते है । दोलत  इज्जत शोहरत ताकत मोक्ष  आदि मे से क्या हम पाना चाहते है । इस काम के पीछे हमारा उद्देशय क्या है ।क्योंकि हर काम के पीछे कोई ना कोई उद्देश्य जरूर होता है । इसलिए यह स्पस्ट होना चाहिए की इस काम के पीछे हमारा यह मकसद है और  इस मकसद के लिए हम यह कर रहे है । तभी काम करें ।
कैसे _कैसे करें । इस काम की बिधि क्या है ।इसका तरीका क्या है । यह काम कैसे होगा । यह समझने के बाद जव पूरा यकीन हो जाए की यह काम  इस तरह से होगा और मे इसे कर सकता हू । तभी वह काम करें ।
कब _ कब करें । किसी भी काम का एक समय  एक  आयु होती है ।इसलिए हय निश्चित …

चावल का तेल स्वास्थ्य बर्धक है ।

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किसान धान पैदा करता है । और  उस धान से चावल बनवाने के लिए । धान से चावल निकालने वाले संयंत्रों (चक्की ) पर जाकर  अपनी धान के चावल बनवाता है ।और चक्की बाले को चावल बनाने के रूपये भी देता है और धान की भूसी भी फ्री मे देता है । जवकी किसान यह नही जानता की यह धान की भूसी कितनी कीमती होती है । जिसे यह चक्की बाले मेहगे दाम पर बेचतें है । क्योंकि इस चावल की भूसी से तेल निकलता है जो खाने के काम  आता है । धान के इस तेल को 'राइस ब्रान  अॉयल ' के नाम से जाना जाता है । 100 किलो धान की भूसी से लगभग 15 लीटर तक तेल निकलता है ।इसके बाद बची खली से पशु आहार बनता है । यह धान का तेल पाचक तेल के रूप मे लोकप्रिहै ।और यह तेल स्वास्थ्य बर्धक भी माना जाता है । क्योंकि इसमे कोलेस्टॉल को कम करने की ताकत होती है ।इसलिए आम खाद्य तेलो से यह तेत मेहगा होता है ।एशियाई देशों मे राइस  अॉयल खाने मे अधिक उपयोग होता है । पर  अब भारत मे भी इस तेल की मॉग बढ रही है ।चावल के तेल का बाजार हर साल बढ रहा है । खाद्य तेल बनाने वाली कंपनीया इस तेल की मॉग पूरी करने के लिए अपना उत्पादन बढा रही है । धान का तेल निकालने बाले नए…

बेरी के बेर और आय के ढेर !

फरवरी महिने मे बेर का सीजन  आते ही ही बेरी के झाडो पर पके हुए बेर लद जाते है ।और बेर के पके हुए फलो की झडी लग जाती है ।गॉव दिहात मे बेरो के झाडो के नीचे पके हुए खट्टे मीठे बेर के फल बिछे रहते है और लोग  इन फलो को अपने पैरो तले कुचलते हुए इनके  उपर से निकल जाते है पर यह लोग  इनकी कीमत नही समझते है ।अगर  इन बेरो को बच्चों से रोज बिनवा कर इकट्ठा कर लिया जाए और  इनहे धूप मे सुखालिया जाए ।और फिर अॉफ सीजन मे शहर के किसी बेरो के खरीददा को बेचा जाय तो यह बेर 20 रू किलो तक बिकते है । क्योकि अॉफ सीजन मे लोग बेरो को उवाल कर खाना बहुत पसंद करते है । एक बेर के झाड से 50 से 200 किलो तक बेर पूरे सीजन मे मिलते है ।जिस ग्रामीण जन के पास पास बेरी के दो चार झाड हो वह  एक सीजन मे बेर से 10_15 हजार रुपय सहज की कमा सकता है । और बेर  उसकी  आय का एक छोटा ही सही पर जरिया बन सकता है । तो फिर देर किस बात की करे बेर  इकट्ठे ।
अगर बेर के झाड न भी हो तो इनहे बाजार से बडे आकार के बेर खरीद कर खाए और  इनकी गुठली इकटठी रख ले और बारिश शुरू होने के बाद जुलाई मे इन बीजो को माकान के पास की खाली जगह पर जमीन मे एक  इच निचे…

भीम एप्प की पूरी जानकारी ।

भीम एप दिसंवर 2016 को जारी हुआ । तभी से हय  एप सुर्खीयो मे बना है ।और भारत मे यह  एप सबसे जादा डाऊनलोड किया जा रहा है ।और  अब भारत सरकार इसका प्रचार बडी तेजी से कर रही ।भारत मे सरकार डिजिटल मनी के लेनदेन को बढाने के लिए लोगो को भीम  एप का उपयोग करने की सलाह दे रही है ।इस  एप का नाम बाबा साहव भीम राव  अंबेडकर के नाम पर रखा गया है ।  भीम  एप  एंड्राइड मोवाइल पर काम करता है और  इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है । फ्री मे ' यह  एप हिंदी अंग्रेजी भाषा के साथ ही अन्य भरतिय भाषाओ मे भी काम करेगा । भीम  एप लगभग सभी भारतिय बैंको के लिए काम करता है ।
भीम एप को डाउनलोड करने के लिए गूगल सर्चबाक्स मे 'भीम  एप डाउनलोड 'टाइप करे और सर्चकरे आने बाले परिणामो मे से किसी भी एक पर क्लिक करे और वहाँ से यह  एप लोड करे । इसके बाद  इंसकाल करे ।फिर एप को खोले 'और मेन मेनू मे जाए ' बैंक एकाउंट स्लेक्ट करे ' अब सेट upi पिन अॉप्सन चुने 'अब  अपने atmकार्ड का छह  अंक का नं डाले समाप्ती तारीख सहित ' इसके बाद otp मिलने पर  इसे एप मे डायल करे ' अब  अपना upiपिन बनाए । …

सबसे सरल विजनस नेटवर्क मार्केटिंग ।

मल्टी लेवल मार्केटिंग या नेटवर्क मार्केटिंग को डायरेक्ट सेलिंग भी कहते है । यह विजनस सबसे पहले कनाडा मे शुरू हुआ था । इस सिस्टम से कंपनी अपने उत्पाद सीधे ग्राहक तक पहुचाती हैं और  उन विजनस करने का भी मोका देतीं है । यह विजनस सबसे सरल विजनस है । नेटवर्क मार्केटिंग का विजनस कोई भी व्यक्ति कर सकता है और  आय पा सकता है ।क्योंकि इस काम मे न  अधिक पढाई लिखाई की जरूरत होती है 'न रूपयो की ना अधिक मेहनत की और ना समय का बंधन ना उम्र की सीमा ' इस विजनस मे स्थान की भी जरूरत नही पडती है ।जव चाहे जितना चाहे जहाँ चाहे काम करे ओर पैसा कमाए । और यह विजनस करने की ट्रेनिंग भी कपनी अपने ग्राहको को फ्री मे देती है । बस  अपनी मन पसंद नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी को चुनकर  उसकी ज्वाइनिंग लेना होता है । इन कपनीयो की ज्वाइनिंग जीरो से लेकर 15 हजार रूपये तक है । इसके बाद हमे उस कंपनी के उत्पाद खरीदना होता है । तो वह तो हम दुशरी कंपनी के भी खरीदकर स्तमाल करते है । अब  अपनी कंपनी के खरीदकर  उपयोग करे जिन पर हमे कमीशन भी मिलेगा ।और हम दूशरो को कंपनी मे ज्वाइन करेगे और वह लोग भी कंपनी के प्रोडक्ट खरीदेगे उन प…

सब्जी बीजों से बनते है 'मगज और मेवा ।

कद्दू 'खरबूजा 'तरबूज ' लोकी और खीरा के पके बीजो को हम बेकार समझकर फेक देते है ।जवकी इनही बीजो से कीमती मगज  और मेवे बनते है । इन बीजो के छिल्के को हाथ से छीलकर निकाली जाती है इनकी गिरी जिसे बिजी ' गिरी 'मिंगी ' मेवा और मगज कहते है ।
सब्जियों के बीजो की गिरी का उपयोग ।
इन बीज की गिरी का उपयोग मिठाईयॉ ' हलवा ' खीर  और मगज के लड्डू बनाने मे किया जाता है । जन्म अष्टमी के पर्व पर  इन मेवो का उपयोग मिष्ठानो मे विशेष तोर पर किया जाता है ।ठंडे पेय ठंडाई बनाने मे खीरा ओर चीमडी के बीज की गिरी का उपयोग दिमाग को एनर्जी देने के लिए किया चाता है । उत्तर भारत मे इन मेवो का उपयोग  अधिक होता है । किराना दुकानो पर  इन गिरी मेवो खरीदे बैचे जाते है ।इन मेवो का मुल्य 300₹ से 650 रू तक होता है । घरेलू उपयोग के लिए तो जो महिलाए इन मेवो के बारे मे जानतीं है वह  इन बीजो को हाथ से छीलकर कुछ थोडे से गिरी के मेवे अपने उपयोग के लिए घर पर ही तैयार कर लेती है ।
हाथरस गिरी व्यापार का केंद्र है ।
भारत मे हाथरस गिरी व्यापार का बडा केंद्र है ।यहाँ पर हर दिन 4_5 टन बीजो से गिरी निकाली जाती…

हवा मिठाई का विजनस ।

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हवा मिठाई का अविष्कार सबसे हले यूरोप मे 19 वी सताब्दी मे हुआ था । इसके बाद यह मिठाई कॉटन कैंडी के नाम से दुनिया मे प्रशिद्ध हुई ।
कॉटन कैंडी _गुडिया के बाल नाम से जानी जाने वाली हय मिठाई बच्चो की पसंदीदा मिठाई है ।
कॉटन कैंडी का विजनस कम मेहनत कम लागत से शुरू किया जाने वाला गृह  उधोग है ।जो अधिक मुनाफा देता है । इस काम को कोई भी साधारण सूझवूझ वाला आदमी मात्र 2000 रू की लागत से आरंभ कर सकता है । जहाँ पर कॉटन कैंडी बनाने का काम होता है वहॉ से तीन दिन की ट्रेनिंग लेकर यह काम सीखा जा सकता है । इसके बाद जरूरत होती है कॉटन कैडी बनाने बाली मशीन की जो बाजार मे 10_15 हजार रूपये की कीमत मे मिलती है ।छोटे स्तर पर काम करने के लिए मिनी कॉटन कैंडी मेकर से भी काम चलाया जा सकता है जो और भी कम कीमत पर मिल जाता है । इसके बाद कच्चे माल के रूप मे - चीनी ' तेल ' खाने के रंग ' स्टिक (काडी) फलो के एसेंस ' प्लास्टिक पीपी (पन्नी ) आदि की जरूरत होती है । इसके बाद तो 200 रू के कच्चे माल से हजार रू का माल तैयार होता है क्योंकि एक किलो चीनी से लगभग 100 कॉटन कैडी के पेकिट तैयार होते है । जो दस रू प…

रोजगार शिक्षा ' प्रशार मे कमी है !

यह सूचना क्रांति का युग है जहाँ हर तरह की जानकारियॉ सहज सुलभ है । पर  आदमी की पहली जरूरत रोजगार है ।और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषय की शिक्षा का ही देश मे अभाव है । जिसके कारण देश मे बेरोजगारी की समस्या है ।
समाचार पत्र- समाचार पत्र देश मे पतझड के पत्तों की तरह रोज छपते है । पर  इनमें रोजगार से संवंधित संमंग्री बहुत कम होती है ।  और रोजगार विषय पर आधारित  एक पत्र को छोडकर कोई दूशरा समाजार पत्र नही छपता है ।
पत्रिकाए- प्रिंट मीडिया मे लगभग सभी विषयो पर पत्रिकाए है । लेकिन  उधोग धंधे पर कोई पत्रिका नजर नही आती ।
रेडियो - रेडियो स्टेशनो पर भी रोजगारो से संवंधित कार्यक्रम नाम के लिए ही प्रशारित होते है ।रेडियो पर भी रोजगार विषय पर  आधारित  अलग से कोई स्टेशन नही है ।
टीवी -प्रशार भारती की टीवी सेवा के सो से भी अधिक टीवी चेनल है जो देश के कोने कोने तक पहुचकर  अपना प्रशारण देते है। पर रोजगार विषय का कोई भी टीवी चेनल नही है ।
इंटरनेट -इटरनेट पर तो हर विषय की जानकारियो का खजाना है । लेकिन हर  आदमी की पहुँच इंटरनेट तक नही है ।
फिल्म - फिल्में मनोरंजंन के साथ ही शिक्षा काभी  एक  अच्छा माध्यम होती है ।…

दुकान से दुगनी कमाई करने का तरीका ।

दुकान चलाने का फंडा -दुकान चलाने के आम तरीको से जितनी कमाई होती है ।उससे दुगनी कमाई इस फंडा से होती है । हर दुकानदार यही चाहता है की उसे अपनी दुकान से आधिक से अधिक आय हो पर कैसे ?
एक गॉव मे रोड पर बस स्टाफ के पास  एक बडी किराना स्टोर है जहाँ स्टेशनरी अदि सामान भी मिलता है ।वहाँ पर लिखा है "कृपया ग्राहक छुट्टे रुपये दे " एक यात्रा के दोरान मे उस दुकान पर पहुचा ओर मेने वहॉ से एक लीडपेन खरीदा और दुकानदार को बीस रुपये का नोट दिया 'तो वह दुकानदार कहने लगा भैया छुट्टा नही है आप  एक पेन  और ले लीजिए आप के बीस रुपए पूरे हो जाएगे । तब मेने एक पेन  और खरीद लिया । मे कुछ देर  उस दुकान पर रुका और मेने देखा की हर  अजनवी ग्राहक के साथ  एसा ही किया जा रहा था । एक वस्तू खरीदने पर वह दुकानदार छुट्टे रुपये ना होने के वहाने से लोगो को दो वस्तुए बेच रहा था । पर  उसी गांव के स्थानीय लोगो के साथ  एसा नही करता था वह दुकानदार क्योकि वह  उसके नियमित ग्राहक थे ।मेरे सामने उसी गांव की एक लडकी ने उस दूकान से दस रुपए के चॉकलेट खरीदे और बीस का नोट दिया तो दुकानदार ने उस लडकी को तुरंत दस का नोट वापस क…

यह मेरे भारत की पहचान ।

जिसके नाम ' आर्यवर्त ' इंडिया ' भारत और हिन्दुस्तान "
यह मेरे भारत की पहचान "

जिसकी भाषा हिंदी ' धर्म हिंदू ' सागर हिंद और  नाम हिन्दुस्तान "
 यह मेरे भारत की पहचान "

जहाँ के भगवन ' राम ' कृष्ण ' महावीर    ओर बुध भगवान "
 हय मेरे भारत की पहचान "

जहाँ थे जन्मे ' वाली ' रावण ' भीम  और महावली हनुमान "
यह मेरे भारत की पहचान "

जिसके दानी ' कर्ण ' हरीश्रचंद्र 'राजा वली ओर मोरतधव्ज का महादान "
 यह मेरे भारत की पहचान "

यहॉ के उत्सव ' होली ' दिवाली 'दशहरा और रक्षाबंधान "
यह मेरे भारत की पहचान "

जिसकी बुलंदी ' कुतुम्बमीनार ' ताजमहल 'अजता और लालकिले सी शान "
यह मेरे भारत की पहचान "

जिसके अंग ' सिर श्रीनगर 'नाक नागपुर ' दिल दिल्ली और मुम्बई मेरी जान "
यह मेरे भारत की पहचान "

जिसका चिन्ह ' मोर 'शेर 'कमल का फूल  और तिरंगा निसान " 
यह मेरे भारत की पहचान "
🌷🚜🌷⛺🎌💗👳जय किसान👳

नकली अॉवला केश तेल की सच्चाई ।

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🍏अॉवला बहुत गुणकारी होता है । इसलिए अॉवला केश तेल को भी लोग बालो के लिए बहुत लाभदाक समझकर  इसका खूब उपयोग करते है 'खासकर महिलाए । पर लोग यह नही जानते की यह तेल बालो के लिए हानिकारक है ।और  इसका अॉवला से कोई संबंध नही है । क्योंकि अॉवला फल या अॉवले के पेड के किसी भी भाग मे तेल नहीँ पाया जाता है । जो केश तेल  अॉवला तेल के नाम से बाजार मे मिलते है वह सब नकली है ।
यह तेल कच्चे तेल जिससे केरोसिन  आदि बनते है ' इससे बनने वाले वहाइट  अॉयल मे कलर  और  अॉवला की कृत्रिम सुगंध  आदि मिलाकर रसायनो से तैयार होता है । यह तेल केरोसीन जैसे ज्वलनशील होते है । तभी तो यह बालो मे लगाने के कुछ देर बाद  उड जाते है ।
कृत्रिम कंपाउन्ड सुगधियॉ _ जिस तरह से दो या दो से अधिक रंगों को आपस मे मिलाने पर  एक तीसरा रंग बन जाता है । ठीक  उसी प्रकार दो या दो से अधिक सुगंधो को मिलाकर नई नई कृत्रिम कंपाउन्ड सुगंधे बनाई जाती है । इसीलिए तो कुछ सुगंधे प्रकृती के किसी भी फूल और पेड पौधों की सुगंध जैसी नही होती है ।
अॉवला की सुगंध का कंपाउन्ड किसी कंपाउन्डर ने बनाया होगा । इस कंपाउन्ड की गंध अॉवला जैसी बनी होगी इसलिए…

सिनेमा और टीवी इतिहास के सुन्हरे पल ।

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केमरा का सबसे पहला आविष्कार इराकी बैज्ञानिक 'इब्न  अल हुजैन ' ने सन 1015 से1021 के बीच किया था । इसके बाद केमरा विकास करते करते आज हर मोवाइल फोन सेट मे आने लगा है ।
भारत मे सिनेमा का आरंभ ।
1886 मे भारत मे सिनेमा की शुरूवात हुई ।जब बंबई के एक हॉटल मे ल्यूमेरे ब्रर्दस ने कुछ चलचित्रो का प्रदर्शन किया था । दादा सहिव फालके ने पहली मूक फिल्म 'राजा हरिश्रचंद्र' बनाई । जिसे 1913 मे दिखाया गया था । इसके बाद भारत मे मूक फिल्मे बनने का चलन  आरंभ हुआ । 1930 मे भरत मे पहली बोलती फिल्म ' आलम  आरा ' बनी जो उरदू भाषा मे थी इसे 1930 मे दिखाया गया था । आलम  आरा का निर्देशन  अर्देशिर  इरानी ने किया था । 1937 मे रिलीज हुई भारत की पहली रंगीन फिल्म ' किसान कन्या ' इस फिल्म के निर्माता अर्देशिर  इरानी थे । किसान कन्या हिंदी भाषा मे पहली रंगीन मूवी थी । इसके बाद बहुत सी फिल्मे बनी ।
शोले _15 अगस्त 1975 मे भारत की सबसे सुपर हिट फिल्म शोले आई । इस फिल्म के निर्माता निर्देशक जे पी शिप्पी और  उनके पिता रमेश शिप्पी थे । इस फिल्म ने सफलता की बुलंदी को छुआ । शोले के मुख्य आदाकारो मे…

सफलता की चाबी ।

दुनिया मे सफलता सभी चाहते है । पर बहुत कम लोग ही सफल होते है बाकी असफल रहते है आखिर एसा क्यों होता है ? इसका उत्तर पाने और सफलता की चाबी ढूंढने के लिए ' सफलता और  असफलता पर दुनिया मे बहुत शोध हुआ है । जिसके परिणाम मे जो बात निकल कर सामने आई वह यह है की कुछ उसुलो को बार बार  अमल मे लाने का नतीजा ही सफलता होती है । वे उसूल  एवं गुर सूत्र है जैसे _ कडी मेहनत ' लगन ' गहरी इच्छा ' निरंतरता ' हर  आदमी को खुश न करना ' साकारात्मक नजरिया और  अवसर की पहचान  आदि ।
अवसर की पहचान
किसी भी काम का योग बनाने मे समय  और मेहनत लगती है ।पर कभी कभी  कुदरती योग बनता है ।जो किसी काम को पूरा करने का स्वर्णिम  अवसर होता है । हमे उस  अवसर को पहचान कर  उसका लाभ लेने की जरूरत होती है ।  कभी कभी अवसर बाधा के रूप मे भी आते है । हमारे पास  अवसर को पहचानने की नजर होनी चाहिए ' विचारको के अनुसार हर समस्या अपने साथ कोई ना कोई अवसर जरूर लाती है । अवसर समस्या के बराबर या उससे बडा छोटा भी हो सकता है । एक बात  और हर दूशरा अवसर ठीक पहले अवसर जैसा कभी नही आता भले ही वह पहले अवसर से और भी बेहतर क्य…

एक पनहारी लगे बडी प्यारी ।

एक पनहारी लगे बडी प्यारी ' जब पनघट पे आए जाए ।

हाथ मे गगरा कमर से कसेंडी चिपकाए
घर से निकले पनहारी पनघट को जाए ' एक पनहारी____

गेरो को देख मुह पर परदा गिराए
अपने प्रेमी को मुखडा दिखाए ' एक पनहारी ________

कुआ बावडी की रोंनक बढाए
नल नदिया के भाग्य जगाए ' एक पनहारी ______

 राह मे मनचले मसखा लगाए
कभी पवन पल्लू उडाए ' एक पनहारी ________

 जब पनहारी घडा सिर पर  ऊठाए
भरा घडा सीने से लग लग जाए ' एक पनहारी_____

 कुए पर बरतन नहलाए
प्यासे पथिको को पानी पिलाए 'एक पनहारी _______

कलश सिर पर रखे डगर मे खडी दिखाए
पनहारी सखिन संग घंटों तक बतियाए ' एक पनहारी लगे बडी प्यारी जब पनघप पे आए जाए ।
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