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तेंदू पत्ता संग्रहण ।

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जंगल मे पाया जाने वाला तेंदू का पेड बहुत  उपयोगी पेड़ है ।इसके चीकू के स्वाद वाले पके पीले फल  अप्रैल माह मे पक कर झड जाते है या इन्हें जंगली बंदर खा जाते है । इसके बाद तेंदू के पेडो पर नई पत्तियां आने लगती हे जो जून माह मे पूरी तरह से विकसित हो जाती है ।इन्हीं पत्तियों का उपयोग बीडी बनाने मे होता है ।
तेंदू पत्ता संग्रहण ।
मईं माह मे पतझडी जंगलो मे छोले के पेड के वाद तेंदू ही हरे भरे दिखाई देते है । इसी मोषम मे तेंदू की पतती तुडवाई जाती है । वन विभाग के संरक्षण मे यह काम होता है ।और वन  अंचलो के ग्रामीण मजदूर  इस काम को करते है । इन मजदूरो से 50 पत्ता की गडडी बनवाई जाती है जिसे वन विभाग 150 रू प्रति सैकडा के हिसाव से खरीदता है । एक मजदूर  एक दिन मे 200 गडडी बन लेता है । तेंदूपत्ता सीजन  एक माह तक चलता है । जो वनवासियो के लिए त्योहार से कम नही होता है । गरमी के मोषम मे जंगल घूमने के साथ ही यह लोग  इस काम  से अच्छा लाभ भी कमा लेते है ।
वन विभाग  इन तेंदू के पत्ते की हरी गडडीयो को खरीद कर  15 दिन तक धूप मे सुखाने के बाद जालीदार बोरो मे भरवा कर गोदामों मे भरवा देता है । इसके बाद आफ सीजन …

गोवर से रूपये कमाए 'ग्रामीण ।

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गॉव के हर घर मे दुधारू पशु जरूर पाले जाते है । पहले तो इन पशुओं के गोवर का उपयोग कंडे उवले बनाने मे होता था जो खाना पकाने के लिए चुल्हे मे जलाने के काम  आते थे । पर  अब गॉवो के घरो मे गैस चुल्हे आ जाने के कारण मवेशी का गोवर कूडे के ढेर पर फेका जाता है ।गॉव के रास्तों गली चोराहो के किनारे जगह जगह लगे यह गोवर कूडे के ढेर गॉव को गंदा करते है । गॉव को साफ सुथरा रखने और गोवर कूडे का उपयोग करने का एक मात्र  उपाय यह है की इससे बर्मी कपोस्ट गोवर की खाद बनाई जाए । इसके लिए गॉव के सभी पशुओं वाले   घरो मे पक्के ईट के टेंक बनाए जाए जिसमे पशुओं की सार वखरी का गोवर घास भूसा का कचडा जमा किया जाए जब यह टेंक फुल भर जाए तो इसमे पानी भर कर केचुए छोड दिए जाए और  ऊपर से घास से इस टेक को ढक दिया जाए । इसके बाद तीन चार माह मे खाद बनकर तैयार हो जाता है । किसानो के लिए तो सरकार गोवर की खाद बनाने के पक्की टंकी बनाने के लिए अनुदान भी दे रही है । गेर किसान भी अपने खरचे से यह टंकी वना सकते है इसमे अधिक खर्च नही लगता सिंगल  ईट की पॉच फिट  ऊची दीवार चारो तरफ बनाई जाती है इसकी लंबाई चोडाई अपने गोवर के हिसाव से जादा…

विना साधन के चाय बनाना ।

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इस युग मे सुवह चाय पीना एक  आम बात है ।और  घर  आए मेहमानों का स्वागत चाय से करना खास है ।आज  अदना आदमी भी घर  आए महमान को चाय जरूर पिलाता है ।आप कितने ही बडे आदमी हो अगर  आपने घर  आए मेहमान को चाय नही पिलाई तो आप कुछ नही है ।
जरा सोचिए _ यदि आपके घर मेहमान  आ जाए और  आपके पास चाय बनाने के सधनो की व्यवस्था ना हो तब  आप मेहमानो को चाय नही बना सकते और  आपकी बेइज्ती होगी । चाय बनाने के लिए दस वस्तुओं की जरूरत होती है । इनमें से एक दो चीजे न हो तो आप चाय नही बना पाएगे ।
पर हम  आपको बिना साधनो के भी चाय बनाने की यह तरकीव बता रहे है जिससे  चाय बनाने के किसी भी साधन के बिना आप चाय बनाकर पी सकते है औरो को भी पिला सकते है ।कभी भी कही भी 'आइए जाने क्या है वे विकल्प ।

चाय की वस्तुए  ___ विकल्प 
1 चुल्हा          _ ईट 'पत्थर 'रेत ' मिट्टी का घरोदा ।
2 गैस ईधन ___ तेल'कागज ' कपडा ।
3 आग      _ धूप ' बिधुत 'इंजन की गरमी ।
4 वर्तन    _ पोलीथीन पन्नी ।
5 पानी ___दूध  बर्फ ।
6 चाय पत्ती _ जली चीनी 'तुल्सी ' अदरक 'लोग ' इलाइची ।
7 चीनी ___ शुगर कैडी ' दूध ।
8 …

आत्माओ का आवाहन

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यह बात सच है की आत्माए होती है और यहभी  सच है की आत्माओ को बुलाकर  उनसे अलोकिक जानकारीयॉ भी जानी जा सकती है ।दुनिया मे आत्माओ के आवाहन की अनेक विधियॉ प्रचलित है ।पर  आत्माओ के आवाहन की एक सबसे सरल सुलभ विधि है जिससे हम सभी परिचित है । जव चैत्र के नौरात्र मे गॉव के लोग जवा बोकर देवी के नाम से घट स्थापित करते है तो वहाँ नौ दिन तक पूजा पाठ के साथ ही आत्माओ को बुलाने का भी कार्यक्रम होता है जिसमे रोजाना रात को  उस स्थान को सुगंधित कर वहाँ एक विशेष धुन वजाते हुए देवी जस गीत गाए जाते है जिसके प्रभाव से वहाँ के वातावरण मे उपस्थित  आत्माए लोगो के शरीर मे आ जाती है और मस्ती से नाचतीं है बात भी करतीं है आम लोग  आत्माओ को देवी देवता कहते है और  उनसे अपने दुखो का निदान भी पूछते है जो आत्माए बताती है । लेकिन हर किसी के शरीर मे आत्मा प्रवेश नही करती जो शरीर  आत्माओ के लिए अनुकूल होता है आत्मा उसी शरीर मे आती है ।
मेने सुना है किसी ने कभी आत्मा का आवाहन किया और  आत्मा आई तो आवाहन करने बाले ने आत्मा से पूछा _ की तुम यह बताओ की इस दुनिया मे और तुम्हारी दुनिया मे क्या अंतर है ? इस र  आत्मा बोली _ वाह …

आँखों से आग जलाना !

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पोराणिक कहानियो मे लेख मिलते है की ऋषि मुनि और तपष्वी अपनी नजर से राक्षसों को जलाकर भष्म कर देते थे ।यह बाते काल्पनिक नही है । एसा आज भी संभव है । आज भी कही कही बडे यज्ञो की वेदी मे नजर से आग जलाने के लिए एसे लोगो को बुलाया जाता है जो अपनी आँखों से आग जलाते है ।यह कोई चमत्कार नही है । यह शक्ति हर  आदमी की आँखों मे होती है र  इसे पाने के लिए सालो कठिन साधना करना पडता है । तव जाकर  अग्नि दृष्टि हासिल होती है ।
अग्नि दृष्टि पाने की विधि _अग्नि दृष्टि पाने के लिए साधक को बर्षों तक सूर्य त्राटक की साधना करनी होती है ।इसमे रोज सुवह  उगते हुए लाल सूरज को बगेर पलक झपकाए एकटक देखने का अभ्यास किया जाता है ।लंबी सादना के बाद जब 32 मिनिट का सूरज त्राटक पूरा हो जाता है यानी की जव साधक बगेर पलक झपके 32मिनट तक  एकटक सूवह के सूरज को देखने मे सफल हो जाता है तव  उसकी आँखों मे अग्नि दृष्टि आ जाती है ।और फिर वह जहॉ भी जिस वस्तु को कुछ देर तक  एक टक देखता है वहॉ  आग जल  जाती है ।
अग्नि दृष्टि के लिए सूरज त्राटक करना होता है और  इसके लिए गुरु की जरूरत पडती है जो आसानी से नही मिलता है ।

सम्मोहन विधा वशीकरण ।

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संमोहन विधा या मोहनी विधा प्राचीन विधा है इसके प्रमाण पोराणिक कथाओ मे मिलते है ।जैसे महाभारत कथा मे यह प्रमाण है की कृष्ण अपनी बासुरी से मोहनी धुन वजाकर बृज की वालाओ को वश मे करके अपने चारो तरफ नचाते थे ।
इस विधा को विज्ञान ने हिप्नॉटिज्म नाम दिया है । डॉ मेसमेर ने संमोहन विधा पर बहुत काम किया इसलिए इसविधा को मेस्मेरिज्म भी कहा जाता है ।
संमोहन विधा एक  एसी विधा है जिसके उपयोग से किसी भी स्त्री पुरूष को वश मे करके उससे मन चाहा काम कराया जा सकता है । मनुष्य के दो मन होते है पहला बाहरी चेतन मन  और दूशरा आंतरिक अवचेतन मन ' संमोहन के असर से पहले चेतन मन को सुला दिया जाता है । संमोहन की स्थित मे आदमी का अवचेतन मन जाग्रत रहता है यह मन बहुत शक्तिशाली होता है और किसी भी आदेश को वगेर निर्णय लिए स्वीकार करता है । इसलिए संमोहित व्यक्ति से जोभी कहा जाता है वह  उसे सच मान कर करता है ।
संमोहन का गहरा असर _ गहरे संमोहन की स्थित मे आदमी के हाथ मे बर्फ का तुकडा थमाकर  उससे कहा जाय की यह  आग का अंगारा है और तुम्हारा हाथ जल रहा है । तो सच मे उसके हाथ पर फोडे उठ  आएंगे । मैने किसी किताव मे पढा था की…

आग बुझाने के तरीके ।

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आग मनुष्य की जरूरत होने के साथ ही विशाल रूप मे दुश्मन होती है । जिस संपत्ती मे भी आग लगती है उसे जलाकर खाक कर देती है । गरमी के दिनो मे आग का प्रकोप  आधिक होता है इन्हीं दिनो आग लगने की आधिक  घटनाए घटती है ।  इसलिए गरमी के दिनो मे आग को लेकर सावधान  और जागरूक रहना जरूरी है ।
चार तरह की आग _आग को चार भागो ABCD मे बॉटा गया है ।
Aवर्ग की आग साधारण  आग होती है जैसे _ लकडी घास फूस की आग  इसे बुझाने के लिए पानी का उपयोग होता है ।

B वर्ग की आग - यह तेल की आग होती है । इसे बुझाने के लिए धूल राख पाऊडर का उपयोग किया जाता है ।

C वर्ग की आग - यह गेस की आग है इसे बुझाने के लिए इस गेस की बिरोधी गेस का ही उपयोग होता है ।

D वर्ग  की आग - यह विजली की आग है जो करंट के स्पार्क से लगती है । इस  आग को बुझाने के लिए पानी का उपयोग नही किया जाता क्योंकि पानी मे करंट फैलता है ।
एक्शंगुलेशर _ आग के लिए संवेदनशील स्थान जैसे पेट्रोल डीजल टेको पर हम देखते है की लाल रंग के तीन चार सिलेंडर रखे होते है जिन पर ABCD लिखा होता है । यह  आग बुझाने के यंत्र होते है । Aवर्ग की आग के लिए A सिलेंडर उपयोग किया जाता है । इसी त…

विच्छू की दवा और इलाज ।

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विच्छू _यह जहरीला जीव जव किसी को  काटता है । तो उस  आदमी को असहनीय दर्द होता है । हालाकि विच्छू के काटने से आदमी मरता नही है । केवल दर्द होने से तडफता है । यह दर्द 24 घंटे मे अपने आप खत्म हो जाता है । पर विच्छू के काटने का दर्द होने पर घंटे साल जैसे कटते है ।जिसको कभी भी विच्छू ने नही काटा वह  इस का अंदाजा नही लगा सकता की आखिर कितना दर्द होता है विच्छू के काटने पर ' वस यह समझ ले की किसी को सौ मधुमक्खियॉ  एक साथ काटे और  उसे जितना दर्द होगा उतना ही एक विच्छू के काटने पर होता है ।
विच्छू की दवा _ पान का पत्ता विच्छू की सबसे उत्तम दवाई है । पान मे जहर नाशक शक्ति पाई जाती है ।
विच्छू का इलाज _ विच्छू का जहर  उतारने के लिए सवसे पहले जिस स्थान पर शरीर पर विच्छू ने डंक मारा हो ठीक उसी स्थान पर सुई चुभाकर खून निकाला जाता है ।इसके बाद पान के पत्ते का डंठल काटकर पान का पत्ता मरीज को खिला दिया जाता है और डंठल कूछ देर तक घाव पर लगाया जाता है  उसी स्थान पर ' पान के डंठल का रस खून के संपर्क मे आने से जहर जल्द ही खत्म हो जाता है और मरीज राहत की सांस लेता है । क्योंकि दर्द बहुत कम हो जाता है …

स्मार्ट फोन और वाइक से अॉखो को खतरा ।

आदमी के लिए अॉखे कुदरत की आनमोल देन है ।अॉखे है तो यह सुन्दर संसार है वरना अंधेरा है ।इसलिए अॉखो के प्रति सबधान रहना बहुत जरूरी है ।इस युग मे मोवाइल  और मोटरसाइकिल  जीवन का अहम हिस्सा बन गए है इनके विना जीवन का पहिया नही चलता है । पर  इनका साबधानी से उपयोग करना ही आदमी के लिए हितकर है । नेत्र विशेषज्ञो के अनुसार वाइक  और स्मार्ट फोन लोगो की अॉखो पर धातक  असर डाल रहे है ।
स्मार्ट मोवाइल फोन का उपयोग आज बहुत हो रहा है ।जमाने की अॉख मोवाइल पर थमी है ।हर कोई अपने मोवाइल पर व्यस्त दिखता है अगर किसी से पूछो कि क्या कर रहे हो ' तोवह कहता है वाटस अप ! बहुत देर तक या देर रात तक मोवाइल पर  अॉखे लगाना हानीकारक है एसा करने से अॉखो की रोशनी कम होती है । इसलिए स्मार्ट फोन का कम या समयक  उपयोग करना चाहिए ।
वाइक का उपयोग _ नंगी अॉखो से वाइक चलाना अॉखो लिए मेहगा पडता है ।रास्ते की धूल ' धूआ 'कंकड ' मच्छर हवा अॉखो से टकराती है ।जिससे अॉख मे जलन चुभन महसूस होती है और  अॉखे लाल हो जाती है । आज  अॉखे खराव होने का सबसे बडा कारण नंगी अॉखो से वाइक चलाना ही है ।इसलिए वाइक चलाते सयम चश्मे का उ…