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आत्माओ का आवाहन

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यह बात सच है की आत्माए होती है और यहभी  सच है की आत्माओ को बुलाकर  उनसे अलोकिक जानकारीयॉ भी जानी जा सकती है ।दुनिया मे आत्माओ के आवाहन की अनेक विधियॉ प्रचलित है ।पर  आत्माओ के आवाहन की एक सबसे सरल सुलभ विधि है जिससे हम सभी परिचित है । जव चैत्र के नौरात्र मे गॉव के लोग जवा बोकर देवी के नाम से घट स्थापित करते है तो वहाँ नौ दिन तक पूजा पाठ के साथ ही आत्माओ को बुलाने का भी कार्यक्रम होता है जिसमे रोजाना रात को  उस स्थान को सुगंधित कर वहाँ एक विशेष धुन वजाते हुए देवी जस गीत गाए जाते है जिसके प्रभाव से वहाँ के वातावरण मे उपस्थित  आत्माए लोगो के शरीर मे आ जाती है और मस्ती से नाचतीं है बात भी करतीं है आम लोग  आत्माओ को देवी देवता कहते है और  उनसे अपने दुखो का निदान भी पूछते है जो आत्माए बताती है । लेकिन हर किसी के शरीर मे आत्मा प्रवेश नही करती जो शरीर  आत्माओ के लिए अनुकूल होता है आत्मा उसी शरीर मे आती है ।
मेने सुना है किसी ने कभी आत्मा का आवाहन किया और  आत्मा आई तो आवाहन करने बाले ने आत्मा से पूछा _ की तुम यह बताओ की इस दुनिया मे और तुम्हारी दुनिया मे क्या अंतर है ? इस र  आत्मा बोली _ वाह …

आँखों से आग जलाना !

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पोराणिक कहानियो मे लेख मिलते है की ऋषि मुनि और तपष्वी अपनी नजर से राक्षसों को जलाकर भष्म कर देते थे ।यह बाते काल्पनिक नही है । एसा आज भी संभव है । आज भी कही कही बडे यज्ञो की वेदी मे नजर से आग जलाने के लिए एसे लोगो को बुलाया जाता है जो अपनी आँखों से आग जलाते है ।यह कोई चमत्कार नही है । यह शक्ति हर  आदमी की आँखों मे होती है र  इसे पाने के लिए सालो कठिन साधना करना पडता है । तव जाकर  अग्नि दृष्टि हासिल होती है ।
अग्नि दृष्टि पाने की विधि _अग्नि दृष्टि पाने के लिए साधक को बर्षों तक सूर्य त्राटक की साधना करनी होती है ।इसमे रोज सुवह  उगते हुए लाल सूरज को बगेर पलक झपकाए एकटक देखने का अभ्यास किया जाता है ।लंबी सादना के बाद जब 32 मिनिट का सूरज त्राटक पूरा हो जाता है यानी की जव साधक बगेर पलक झपके 32मिनट तक  एकटक सूवह के सूरज को देखने मे सफल हो जाता है तव  उसकी आँखों मे अग्नि दृष्टि आ जाती है ।और फिर वह जहॉ भी जिस वस्तु को कुछ देर तक  एक टक देखता है वहॉ  आग जल  जाती है ।
अग्नि दृष्टि के लिए सूरज त्राटक करना होता है और  इसके लिए गुरु की जरूरत पडती है जो आसानी से नही मिलता है ।

सम्मोहन विधा वशीकरण ।

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संमोहन विधा या मोहनी विधा प्राचीन विधा है इसके प्रमाण पोराणिक कथाओ मे मिलते है ।जैसे महाभारत कथा मे यह प्रमाण है की कृष्ण अपनी बासुरी से मोहनी धुन वजाकर बृज की वालाओ को वश मे करके अपने चारो तरफ नचाते थे ।
इस विधा को विज्ञान ने हिप्नॉटिज्म नाम दिया है । डॉ मेसमेर ने संमोहन विधा पर बहुत काम किया इसलिए इसविधा को मेस्मेरिज्म भी कहा जाता है ।
संमोहन विधा एक  एसी विधा है जिसके उपयोग से किसी भी स्त्री पुरूष को वश मे करके उससे मन चाहा काम कराया जा सकता है । मनुष्य के दो मन होते है पहला बाहरी चेतन मन  और दूशरा आंतरिक अवचेतन मन ' संमोहन के असर से पहले चेतन मन को सुला दिया जाता है । संमोहन की स्थित मे आदमी का अवचेतन मन जाग्रत रहता है यह मन बहुत शक्तिशाली होता है और किसी भी आदेश को वगेर निर्णय लिए स्वीकार करता है । इसलिए संमोहित व्यक्ति से जोभी कहा जाता है वह  उसे सच मान कर करता है ।
संमोहन का गहरा असर _ गहरे संमोहन की स्थित मे आदमी के हाथ मे बर्फ का तुकडा थमाकर  उससे कहा जाय की यह  आग का अंगारा है और तुम्हारा हाथ जल रहा है । तो सच मे उसके हाथ पर फोडे उठ  आएंगे । मैने किसी किताव मे पढा था की…

आग बुझाने के तरीके ।

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आग मनुष्य की जरूरत होने के साथ ही विशाल रूप मे दुश्मन होती है । जिस संपत्ती मे भी आग लगती है उसे जलाकर खाक कर देती है । गरमी के दिनो मे आग का प्रकोप  आधिक होता है इन्हीं दिनो आग लगने की आधिक  घटनाए घटती है ।  इसलिए गरमी के दिनो मे आग को लेकर सावधान  और जागरूक रहना जरूरी है ।
चार तरह की आग _आग को चार भागो ABCD मे बॉटा गया है ।
Aवर्ग की आग साधारण  आग होती है जैसे _ लकडी घास फूस की आग  इसे बुझाने के लिए पानी का उपयोग होता है ।

B वर्ग की आग - यह तेल की आग होती है । इसे बुझाने के लिए धूल राख पाऊडर का उपयोग किया जाता है ।

C वर्ग की आग - यह गेस की आग है इसे बुझाने के लिए इस गेस की बिरोधी गेस का ही उपयोग होता है ।

D वर्ग  की आग - यह विजली की आग है जो करंट के स्पार्क से लगती है । इस  आग को बुझाने के लिए पानी का उपयोग नही किया जाता क्योंकि पानी मे करंट फैलता है ।
एक्शंगुलेशर _ आग के लिए संवेदनशील स्थान जैसे पेट्रोल डीजल टेको पर हम देखते है की लाल रंग के तीन चार सिलेंडर रखे होते है जिन पर ABCD लिखा होता है । यह  आग बुझाने के यंत्र होते है । Aवर्ग की आग के लिए A सिलेंडर उपयोग किया जाता है । इसी त…