गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

तेंदू पत्ता संग्रहण ।

जंगल मे पाया जाने वाला तेंदू का पेड बहुत  उपयोगी पेड़ है ।इसके चीकू के स्वाद वाले पके पीले फल  अप्रैल माह मे पक कर झड जाते है या इन्हें जंगली बंदर खा जाते है । इसके बाद तेंदू के पेडो पर नई पत्तियां आने लगती हे जो जून माह मे पूरी तरह से विकसित हो जाती है ।इन्हीं पत्तियों का उपयोग बीडी बनाने मे होता है ।
तेंदू पत्ता संग्रहण ।
मईं माह मे पतझडी जंगलो मे छोले के पेड के वाद तेंदू ही हरे भरे दिखाई देते है । इसी मोषम मे तेंदू की पतती तुडवाई जाती है । वन विभाग के संरक्षण मे यह काम होता है ।और वन  अंचलो के ग्रामीण मजदूर  इस काम को करते है । इन मजदूरो से 50 पत्ता की गडडी बनवाई जाती है जिसे वन विभाग 150 रू प्रति सैकडा के हिसाव से खरीदता है । एक मजदूर  एक दिन मे 200 गडडी बन लेता है । तेंदूपत्ता सीजन  एक माह तक चलता है । जो वनवासियो के लिए त्योहार से कम नही होता है । गरमी के मोषम मे जंगल घूमने के साथ ही यह लोग  इस काम  से अच्छा लाभ भी कमा लेते है ।
वन विभाग  इन तेंदू के पत्ते की हरी गडडीयो को खरीद कर  15 दिन तक धूप मे सुखाने के बाद जालीदार बोरो मे भरवा कर गोदामों मे भरवा देता है । इसके बाद आफ सीजन मे इन पत्तो का उपयोग बीडी बनाने मे होता है । जंगल से लाई गई यह तेंदू की पत्ती बीडी रूप मे बाजार मे आने तक बहुत मेहगी हो जाती है ।
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रबर बलून विजनस 500₹ से शुरू ।

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