गुरुवार, 15 जून 2017

कंचन तेरी याद में ।

में जब भी कभी सुनता हू प्रेम के कहीं ' 
तव में खो जाता हू ' कचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी पढता हू कोई प्रेम कहानी '
 तव कल्पना मे तुम दिखती हो ' कंचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी देखता हू कोई फिल्म कभी ' 
तब नाइका मे तुम नजर  आती हो ' कंचन तेरी याद मे ।

में उदास होकर कभी जाता हू मंदिर कभी ' 
तब राधा के रूप मे तुम्हे पाता हू ' कंचन तेरी याद मे ।

में जब भी कभी सोता हू तो देखता हू तेरा ही सपना ' 
मुझे हर बक्त तेरी फिक्र है ' कंचन तेरी याद मे ।

मे पत्थर था तुम  कंचन हो पर फिर भी अभी '
पानी मे बन गया हू ' कचन तेरी याद मे ।

मे जानता हू की तुम भी बधी हो जमाने की जंजीर से मेरी ही तरह ' 
फिर भी तुम्हें पाने के लिए क्यो मे पागल हू ' कंचन तेरी याद मे ।

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समय एक भ्रम है !

समय क्या है ? समय पर  मैने बहुत सोच विचार किया ' समय के बारे मे बडे बडे विचारको का मत जाना तो आश्चर्य चकित रह गया की यह समय नाम की चीज तो बडी जादूई चीज है जो है भी और नही भी है । आखिर यह पहेली कैसे सुलझेगी अंत मे इस निष्कर्ष पर पहुचा की समय  एक भ्रम है ।
कभी जब हम  अतीत को र्वतमान मे पाते है या अतीत की यादो मे जाते है तो एसा लगता है की यह सबकुछ  अभी अभी हुआ है । कभी एसा लगता है की समय थमा है । आपको भी कभी ना कभी एसा जरूर लगा होगा ।हमे अपने भीतर कोई बदलाव महसूस नही होता ' वदलाव तो बाहरी जगत मे दिखाई देता है ।इसी बदलाव को समय कहा जाता है ।
आइंस्टीन ने कहा है की समय  एक भ्रम है ।अंतरिक्ष मे समय का कोई अस्तित्व ही नही है ।सबकुछ  एक साथ घटित हो रहा है ।आदमी को समय का भ्रम  इसलिए पैदा होता है की वह रह चीज को एक के बाद  एक होते देखता है ।
भोतिकशास्त्री  क्वांटम का भी यही मत है की समय नाम की कोई चीज नही है ।
औशो ने भी अपने एक प्रवचन मे अपने सात सो साल पहले के  पूर्वजन्म के बारे मे बताते हुए समय के बारे मे कहा है की मृत्यु के बाद समय खत्म हो जाता है ।मृत्यु के बाद नया जन्म लेने के बीच के अंतराल मे जो समय लगता है उसका पता नही लगाया जा सकता की कितना लंबा गेप था वहॉ एक छण  और सात सौ साल बराबर होते है । यह तो प्रथ्वी पर  आने के बाद बदलाव के हिसाव से मोटा आकलन किया जाता है की लगभग  इतना समय हो गया । समय का मुल्य तो प्रथ्वी पर  ही है ।

प्रधानमंत्री आवास योजना -ग्रामीण

🏠प्रधानमंत्री आवाज योजना _ग्रामीण " संछिप्त परिचय ।
इंदिरा आवास योजना को 2016 से प्रधानमत्री आवास योजना मे पुनः गठित किया गया है ।इस योजना के तहत भारत वासियो को जो टूटे फूटे और कच्चे मकानो मे रहते है उन्हें 2022 तक पक्के मकान बनवाने का लक्ष्य है । इस योजना से बनने वाले कमान का आकार 25 वर्ग मीटर होता है ।इस  इकाई की लागत सहायता राशी 1.20 लाख  एवं 1.30 लाख है ।हितग्राही कुछ बडा मकान बनाना चाहे तो उसे 70 हजार रू लोन भी मिल सकता है । इसके आलावा हितग्राही मनरेगा से 90\95 दिन की मजदूरी पाने का भी हकदार है ।मकान के साथ शोचालय बनाने पर 12 हजार रू की राशी अलग से मिलने का नियम है । साथ ही अन्य योजनाऔ के तालमेल से पेयजल व्यवस्था ' बिजली कनेक्शन ' गैस चुल्हा आदि भी मकान के साथ मुहैया कराने का प्रयास है ।
इस योजना मे 2011 की जनगणना के आधार पर हितग्राहियो का चयन किया जा रहा है ।हितग्राही अपने ब्लॉक से स्वीकृती आदेश पा सकता है या pmyg की बेवसाइट से भी डाउनलोड कर सकता है ।लाभार्थी को स्वीकृती आदेश मिलने के 15 दिन के भीतर 40 हजार रू की पहली किस्त मिलने का नियम है 'स्वीकृति मिलने की तारीख से 12 महिने के भीतर मकान निर्माण का काम पूरा होना चाहिए ।
ग्राम पंचायत स्तर पर 'ग्राम रोजगार सहायक ' टैग होता है जो हितग्राही को मकान बनाने जानकारी देने के साथ ही उसकी सहायता करता है ।
इस योजन के लाभार्थियों के चयन का आधार s e c cटिन नं है । जो स्वीकृति आदेश पर लिखा होता है ।इस डाटावेश को अन्य कार्यक्रमो मे भी उपयोग किया जाता है ।इस विशेष योजन केतहत निर्धारित किये गए लाभार्थी वह परिवार है जिन्हें स्थाई सूची मे शामिल किया गया है ।इस योजना मे ई- सेवा प्रदायगी की दो प्रणालियॉ है । पहली आवास साफ्ट  और दूशरी आवास  एप्प है ।

रबर बलून विजनस 500₹ से शुरू ।

गु व्वा रे 🎈💃 रबर बलून से तो सभी परिचित है जिनहे फुग्गा और गुब्बारा भी कहा जाता है । हम सभी ने अपने बचपन मे जरूर गुब्बारे खेले होगे ।गुब...